पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी हलचल जारी, चुनाव आयोग ने लिया अहम फ़ैसला

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पश्चिम बंगाल में शनिवार को बीजेपी और टीएमसी वोटों की गिनती के लिए सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को नियुक्त करने के मुद्दे पर आमने-सामने रहे.

वहीं चुनाव आयोग ने मतगणना को लेकर राज्य में अतिरिक्त ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने का फ़ैसला लिया है.

दूसरी ओर शनिवार को केंद्रीय कर्मचारियों के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को टीएमसी अपनी जीत बता रही है तो वहीं बीजेपी इसे ममता बनर्जी की हार बता रही है.

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग समाप्त हुई थी लेकिन अब फ़ाल्टा सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी. इसका मतलब है कि सोमवार को पश्चिम बंगाल की सिर्फ़ 293 सीटों समेत देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजे आएंगे है.

लेकिन वोटों की गिनती से पहले पश्चिम बंगाल का सियासी घमासान शांत होता नहीं दिख रहा है.

आमतौर पर किसी राज्य की विधानसभा या लोकसभा चुनावों के बाद वोटों की गिनती से पहले सियासी दल अपनी-अपनी जीत के दावे करते हुए दिखते हैं.

लेकिन बंगाल में मचे सियासी घमासान ने मौजूदा चुनाव में इस राज्य की तरफ लोगों का ध्यान ज़्यादा खींचा है. राजनीतिक दलों के दावों से ज़्यादा हर रोज़ नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं.

यह विवाद न केवल बयानबाज़ी तक सीमित है बल्कि यह पहले हाई कोर्ट पहुँचा और फिर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में इसकी गूंज सुनाई दी.

वोटों की गिनती में केंद्रीय कर्मचारियों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद टीएमसी अपनी जीत के दावे कर रही है, जबकि बीजेपी इसे हार बता रही है.

वहीं चुनाव आयोग ने राज्य में अतिरिक्त ऑबज़र्वर भी नियुक्त करने की जानकारी दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

टीएमसी ने विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती के सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के मुख्य चुनाव अधिकारी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका (एसएलपी) दायर की थी.

इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मतगणना के पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा.

बार एंड बेंच के मुताबिक़, निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोटों की गिनती राज्य सरकार के प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगी.

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बाग़ची की बेंच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी.

इस फ़ैसले में केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइज़र बनाने का आदेश दिया गया था. इसके ख़िलाफ़ टीएमसी ने पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में अपील की थी, जहां गुरुवार को उसकी अपील ख़ारिज हो गई थी.

शनिवार को निर्वाचन आयोग का पक्ष जानने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की अपील पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "एसएलपी (स्पेशल लीव पिटिशन) में और आदेश की ज़रूरत नहीं है. हम नायडू की बात दर्ज करते हैं कि निर्वाचन आयोग के सर्कुलर का पूरी तरह पालन किया जाएगा."

पश्चिम बंगाल में 4 मई को वोटों की गिनती होनी है, इसलिए इस मामले को फ़ौरन सुना गया.

टीएमसी-बीजेपी आमने-सामने

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि 'यह ख़बर ग़लत है कि सुप्रीम कोर्ट में हमारी याचिका ख़ारिज हो गई है.'

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को झटका लगा है, न कि टीएमसी को.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों का चुनाव केंद्र और राज्य, दोनों के कर्मचारियों में से रैंडम तरीके से किया जाना चाहिए. यह सिर्फ़ केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए. चुनाव आयोग ने इसका पालन करने का वादा किया है."

वहीं बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "पश्चिम बंगाल चुनावों की मतगणना में दख़ल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार संवैधानिक रूप से सही है और यह टीएमसी के राजनीतिक और नैतिक एजेंडे पर सवाल खड़े करता है."

जबकि खड़गपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष ने कहा, "जो जनता के सामने हार गया हो, वो कहीं नहीं जीत सकता."

इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट को मामलों को समग्र रूप से देखना चाहिए था. बेहतर होता अगर कोर्ट मतदाताओं के एक बड़े वर्ग की चिंताओं पर ध्यान देता और यह सुनिश्चित करता कि वोटों की गिनती के दिन उन शंकाओं का समाधान हो जाए. इससे एक मज़बूत मिसाल कायम होती."

चुनाव आयोग ने की अहम घोषणा

चुनाव आयोग ने शनिवार को बताया कि पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती सुरक्षित, शांतिपूर्ण और पारदर्शी रखने के लिए 165 अतिरिक्त ऑब्ज़र्वर और 77 पुलिस ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए गए हैं.

चुनाव आयोग ने कहा है, "संविधान से मिले अधिकारों के तहत ये फ़ैसला किया है. इस दौरान ये सारे ऑब्ज़र्वर इलेक्शन कमीशन में डिप्यूटेशन के आधार पर काम करेंगे और उसी के निर्देश और नियंत्रण में होंगे."

आयोग का कहना है, "ये 165 अतिरिक्त काउंटिंग ऑब्ज़र्वर उन 165 विधानसभा सीटों पर नियुक्त किए गए हैं जहां एक से ज़्यादा काउंटिंग हॉल हैं. पुलिस ऑब्ज़र्वर्स काउंटिंग सेंटर की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर नज़र रखेंगे, लेकिन उन्हें वोटों की गिनती के दिन काउंटिंग हॉल के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी."

चुनाव आयोग के मुताबिक़ पुलिस ऑब्ज़र्वर काउंटिंग ऑब्ज़र्वर के साथ क़रीबी तालमेल बनाकर काम करेंगे.

इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि शनिवार दोपहर बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर पहुँचे.

वहीं पीटीआई के मुताबिक़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के काउंटिंग एजेंटों के साथ एक बैठक में दावा किया कि पार्टी 294 विधानसभा सीटों में से 200 से ज़्यादा सीटें हासिल करेगी.

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कथित तौर पर गुप्त दस्तावेज़ों के आधार पर एक दावा किया है.

उन्होंने कहा है, "हमारे पास एक दस्तावेज़ है. मैं यह नहीं बताऊँगा कि यह किस पार्टी का दस्तावेज़ है. लेकिन यह उस पार्टी का गोपनीय दस्तावेज़ है जो तृणमूल के साथ चुनाव लड़ रही है."

"मीटिंग में छह नेताओं की मौजूदगी में इस पार्टी ने 78 सीटों की पहचान की है, जहां उनको जीत की संभावना दिखाई देती है. 294 सीटों पर यह उनकी अंतिम राय है."

कुणाल घोष के इस दावे पर बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, "कुणाल घोष जिन दस्तावेज़ों के आधार पर यह दावा कर रहे हैं, वह सब झूठा है. वे अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. टीएमसी सत्ता से बाहर हो रही है. उनके कार्यकर्ता काउंटिंग में जाने को तैयार रही हैं. ममता बनर्जी और कुणाल घोष अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाह रहे हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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