ईरान ने कहा- अमेरिका को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी
ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुखइब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा है कि एमओयू की पहली शर्त का पालन न कर पाना दिखाता है कि अमेरिका में ईरानी लोगों का भरोसा जीतने की इच्छाशक्ति की कमी है.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसकी शुरुआत एमओयू के वादों के उल्लंघन का स्मार्ट और उचित जवाब के साथ होगा."
इब्राहिम अज़ीज़ी ने चेतावनी दी, "हम पक्के इरादे वाले हैं."
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "हम किसी मजबूरी में नहीं मिले थे, ईरान मिला था. उनका खेल ख़त्म हो चुका है. हम 60 दिन का समय पूरा होने देंगे. उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, दस सेंट भी नहीं."
वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के स्विट्जरलैंड के पूर्व निर्धारित दौरे में देरी के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के नए राउंड को टाल दिया गया है.
व्हाइट हाउस ने गुरुवार (स्थानीय समय के मुताबिक़) देर रात घोषणा की कि वेंस बातचीत के लिए नहीं जा रहे हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने के14 बिंदुओं वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुका है.
इसके तहत अन्य बातों के साथ ही ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि ईरान के "पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास" के लिए 300 अरब डॉलर का फंड बनाया जाएगा. हालांकि, अमेरिका के लिए इसमें योगदान देना अनिवार्य नहीं होगा.
हालांकि अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाक़ाबंदी हटा ली गई है, जिसका ज़िक्र दोनों देशों के बीच हुए समझौते में है.