ट्रंप का फिर यू टर्न, कहा- होर्मुज़ स्ट्रेट सिर्फ़ ईरान को छोड़कर सभी के लिए खुला
होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के 24 घंटे बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने यू टर्न लेते हुए कहा है कि यह जलमार्ग ईरान को छोड़कर सभी जहाज़ों के लिए खुला है.
ट्रंप का फिर यू टर्न, कहा- होर्मुज़ स्ट्रेट सिर्फ़ ईरान को छोड़कर सभी के लिए खुला
इमेज स्रोत, SAUL LOEB / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों पर 20 प्रतिशत टोल वसूलेगा
होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के 24 घंटे बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने यू टर्न लेते हुए कहा है कि यह जलमार्ग ईरान को छोड़कर सभी जहाज़ों के लिए खुला है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, "हम पूरी नाकाबंदी लागू करेंगे,
लेकिन यह सिर्फ़ उन जहाज़ों पर लागू होगीस जो ईरान
के बंदरगाहों से आ रहे हैं, वहां जा
रहे हैं या किसी भी तरह का ईरानी माल ढो रहे हैं."
ट्रंप ने दावा किया कि तेल की आपूर्ति 'पहले से कहीं ज़्यादा' हो रही है. उन्होंने कहा, "इसका श्रेय अमेरिका की सेना की शानदार ताक़त को जाता है. मैं रक्षा
मंत्री पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन
डैन केन और यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को विशेष
सलाम करता हूं."
"इन्हीं की वजह से, और
दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना के सभी जवानों की बदौलत, होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान को छोड़कर सभी जहाज़ों की आवाजाही के लिए
खुला है. इसकी वजह ईरान का झूठा, हिंसक और
दुर्भावनापूर्ण नेतृत्व है, जो अपने
देश को पूरी तबाही की ओर ले जा रहा है."
ट्रंप ने अमेरिका की जीत होने की बात फिर दोहराते हुए कहा, "अमेरिका पहले से कहीं ज़्यादा बड़ी जीत हासिल कर रहा है."
ग़ौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप ने एलान किया था कि अमेरिका ही होर्मुज़ का गार्डियन है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के एवज़ में वो 20 फ़ीसदी टोल वसूलेगा.
जबकि ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "यह 20% निश्चित रूप से बहुत ज़्यादा है."
28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला कर दिया, जिसके बाद ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद कर दिया था. इसी जलमार्ग के ज़रिये पहले दुनिया के लगभग 25% तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की लगभग 20% सप्लाई गुज़रती थी.
बेंगलुरु: बच्चों से दुर्व्यवहार के आरोपों में घिरी डे केयर एजेंसी ने पूर्व कर्मचारी पर लगाया ये आरोप, इमरान क़ुरैशी, बेंगलुरु से बीबीसी हिन्दी के लिए
इमेज स्रोत, DCPC, Bangluru East
इमेज कैप्शन, बेंगलुरु में आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनी कैपजेमिनी में डे केयर क्रेच से जुड़ा एक दुर्व्यवहार का मामला हाल ही में सामने आया था
बेंगलुरु में कैपजेमिनी के डे केयर सेंटर का संचालन करने वाली एजेंसी लिटल स्कॉलर्स ने अब दावा किया है कि वह पूर्व कर्मचारियों के 'दुर्भावनापूर्ण बदनामी अभियान' का शिकार हुई है.
एजेंसी का आरोप है कि यह अभियान कथित तौर पर कुछ असंतुष्ट पूर्व कर्मचारियों ने चलाया.
तीन हफ़्ते पहले यह डे केयर सेंटर उस समय सुर्ख़ियों में आया था, जब बेंगलुरु स्थित आईटी कंपनी के परिसर में स्थित डे केयर में छोटे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया था.
देखभाल करने वाली एक कर्मचारी के दुर्व्यवहार की वजह से कम से कम एक बच्चा मानसिक सदमे का शिकार हुआ.
पुलिस ने देखभाल करने वाली दो कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया है. एफ़आईआर दर्ज होने पर कई दिनों तक फ़रार रहने वाली तीसरी महिला ने अग्रिम ज़मानत ले ली है.
लिटल स्कॉलर्स की मालिक रमनदीप कौर ने पत्रकारों से कहा कि सेंटर की मैनेजर रहीं मंजुला ने "नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों विजयलक्ष्मी और सुजाता के साथ मिलकर लिटल स्कॉलर्स से पैसे उगाहने की कोशिश की."
रमनदीप कौर ने आरोप लगाया कि मंजुला ने महेंद्र नाम के एक व्यक्ति से परिचय कराया था, जिसने कथित तौर पर "एफ़आईआर दर्ज होने का दावा करते हुए पहले क़ानूनी ख़र्च के नाम पर लिटल स्कॉलर्स से 20 हज़ार रुपये लिए और फिर अतिरिक्त 2.5 लाख रुपये की मांग की."
रमनदीप कौर ने कहा कि 'महेंद्र' की दूसरी मांग मानने से उन्होंने इनकार कर दिया था. यह सब उस समय हुआ, जब वह ऑस्ट्रेलिया में थीं. वह 1 जुलाई को भारत लौटीं, लेकिन उसके बाद पुलिस जांच में सहयोग करने में व्यस्त रहीं.
उनके वकील आदित्य कृष्ण पांडे ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "अब हम बिना प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं करेंगे. इसका सिर्फ़ इतना मतलब है कि उनके (कर्मचारियों के) पास शैक्षणिक योग्यता नहीं थी."
धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग पर युवक को गोली मारने का आरोप, जांच जारी, विष्णुकांत तिवारी, बीबीसी संवाददाता
इमेज स्रोत, Anil Ahirwar
इमेज कैप्शन, शालिग्राम गर्ग, धीरेंद्र शास्त्री के भाई हैं और उन पर एक व्यक्ति को गोली मारने का आरोप लगा है
मध्य प्रदेश के छतरपुर
में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम
गर्ग पर एक युवक को गोली मारने का आरोप लगा है.
पुलिस ने इस मामले में नामजद
एफ़आईआर दर्ज करने की बात कही है और जांच शुरू कर दी है.
घायल
युवक की पहचान मोतीलाल कुशवाहा के रूप
में हुई है. उनका ज़िला अस्पताल में इलाज चल रहा है. अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन
कर उनके शरीर से गोली निकाली है. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है.
छतरपुर
के पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने मीडिया से कहा, "राजनगर के ग्राम कोड़ा से दो पक्षों के
बीच विवाद और एक युवक के घायल होने की सूचना मिली थी. पुलिस मौके पर पहुंची और
घायल को अस्पताल भेजा गया. मेडिकल जांच और एक्स रे में गोली लगने की पुष्टि हुई
है."
उन्होंने बताया, "शालिग्राम गर्ग,
सतीश, आशीष और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ
नामजद एफआईआर दर्ज की जा रही है. घटना से जुड़े वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही
है.”
घायल व्यक्ति ने पुलिस को क्या बताया
इमेज स्रोत, Anil Ahirwar
इमेज कैप्शन, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और उनके भाई शालिग्राम गर्ग की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है
घायल मोतीलाल कुशवाहा ने पुलिस को बताया कि शालिग्राम गर्ग अपने साथियों के साथ उनके घर पहुंचे, उन्हें बाहर खींचकर लाठी डंडों से पीटा और इसके बाद कई राउंड फ़ायर किए.
उनका आरोप है कि एक गोली उनके सीने में लगी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शालिग्राम गर्ग इलाके के किसानों पर ज़मीन बेचने का दबाव बना रहे हैं और इनकार करने वालों के साथ मारपीट की जाती है और धमकी दी जाती है.
घटना का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है. कथित वीडियो में कुछ लोग भागते हुए दिखाई देते हैं, जबकि घायल युवक के परिजन उनका पीछा करते नज़र आते हैं.
एक दृश्य में एक व्यक्ति के हाथ में हथियार जैसा दिखाई देता है. हालांकि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. पुलिस का कहना है कि वह वीडियो की भी जांच कर रही है.
इस मामले में अब तक शालिग्राम गर्ग या बागेश्वर धाम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
शालिग्राम गर्ग पहले भी विवादों में रह चुके हैं. वर्ष 2023 में उन पर एक दलित समुदाय की लड़की की शादी समारोह के दौरान पिस्टल लहराने, धमकी देने और मारपीट का आरोप लगा था. इस मामले में एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था.
वहीं, 2024 में सागर ज़िले के एक टोल प्लाज़ा पर टोलकर्मियों से मारपीट के आरोप में भी उनके ख़िलाफ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था.
बर्मिंघम पहला वनडेः रोहित शर्मा और विराट कोहली आउट, भारत के सामने 259 रनों का लक्ष्य
इमेज स्रोत, Oli SCARFF / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, विराट कोहली
मंगलवार को बर्मिंघम में हो रहे पहले वनडे मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत के सामने 259 रनों का लक्ष्य दिया है.
हालांकि लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को जल्द ही दो झटके लगे जब उसके दो दिग्गज बल्लेबाज़ रोहित शर्मा और विराट कोहली जल्द आउट हो गए.
रोहत शर्मा ने 21 गेंदों में 11 रन बनाए जबकि विराट कोहली ने छह गेंदों मं पांच रन बनाए.
इमेज स्रोत, Andy Kearns/Getty Images
इमेज कैप्शन, अक्षर पटेल की गेंद पर इंग्लैंड के बल्लेबाज़ जोश टॉंग बोल्ड हो गए
इससे पहले टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया. शुरुआत में इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज़ बेन डकेट (43) ने अच्छी शुरुआत दिलाई लेकिन जो रूट (नाबाद 76), लियाम डैविसन (68) को छोड़कर कोई बल्लेबाज़ नहीं चल पाया.
कप्तान हैरी ब्रूक समेत पांच बल्लेबाज़ ऐसे थे जो दहाई तक भी नहीं पहुंच सके, जिनमें दो शून्य पर और दो एक रन पर आउट हुए. हालांकि जैकब बेथेल ने 14 रन, विल जैक्स ने 20 रन और जोफ़्रा आर्चर ने 12 रनों का योगदान किया.
इंग्लैंड की टीम को 18 रन एक्स्ट्रा में मिले.
भारत की ओर से सर्वाधिक चार विकेट अक्षर पटेल ने लिया. प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने दो दो विकेट और जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे ने एक एक विकेट झटके.
शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनाया आयोग, प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है.
इसकी अध्यक्षता कलकत्ता
हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज विश्वजीत बसु करेंगे.
राज्य
सचिवालय की ओर से बीती 10 जुलाई को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयोग साल 2011 से इस साल मई तक शिक्षा, खाद्य और आपूर्ति, राहत और आपदा प्रबंधन, नगर पालिका और पंचायत के अधिकार वाले
क्षेत्र, आवास
और मत्स्य पालन के कामकाज में 'भ्रष्टाचार के आरोपों' की जांच करेगा.
गृह
मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग रिश्वखोरी, अंफान तूफ़ान के राहत में भ्रष्टाचार,
100 दिनों के
रोजगार योजना में गड़बड़ियों, सत्ता के दुरुपयोग, मिड डे मील में गड़बड़ी और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों में
भ्रष्टाचार समेत विभिन्न क्षेत्रों में लगने वालेतमाम आरोपों की जांच करेगा.
इसके अलावा गैरक़ानूनी तरीक़े से की जाने वाली
गिरफ़्तारियों, झूठे
मामलों और अवैध निर्माण में सरकारी भूमिका की भी जांच की जाएगी.
सहायक पुलिस
महानिदेशक स्तर के आईपीएस अधिकारी के के जयरामन आयोग के सदस्य सचिव होंगे.
उनके
अलावा आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के एक-एक अधिकारी भी आयोग में शामिल रहेंगे.
एक
अधिकारी बताते हैं कि आयोग किसी मामले की जांच के दौरान किसी व्यक्ति को बयान के
लिए बुला सकता है. वह पुलिस से एफ़आईआर की भी सिफ़ारिश कर सकता है.
लेकिन
भ्रष्टाचार के जिन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं, उनकी जांच आयोग नहीं कर सकेगा. आयोग
समय-समय पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा.
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के
साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने विधानसभा में भी यह बात दोहराई थी.
दिन भरः सऊदी अरब समेत इन देशों से ट्रंप क्यों मांग रहे प्रोटेक्शन मनी?
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.
पोस्ट YouTube समाप्त
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने मेस में मांसाहारी खाने पर लगाई रोक, प्रेरणा, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
इमेज स्रोत, kgmu.org
इमेज कैप्शन, लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (फ़ाइल फ़ोटो)
उत्तर
प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में से एक किंग जॉर्ज मेडिकल
यूनिवर्सिटी ने अपने सभी हॉस्टलों के मेस में मांसाहारी खाना पकाने और परोसने पर रोक लगा
दी है.
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह केवल एक मौखिक एडवाइज़री है. स्टूडेंट्स चाहें
तो ऑनलाइन ऑर्डर कर अपने कमरों में नॉन वेज खा सकते हैं.
केजीएमयू
में कुल 18 हॉस्टल हैं, जिनमें क़रीब 2,500 स्टूडेंट्स रहते हैं.
बीबीसी
हिंदी से बातचीत में विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा,
"हमारे
यहां दो तरह के मेस चलते हैं. कुछ मेस स्टूडेंट्स सहकारी व्यवस्था (को-ऑपरेटिव) के तहत
ख़ुद संचालित करते हैं, जबकि
कुछ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित हैं."
"इसके अलावा डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन के स्टूडेंट्स के लिए सैटेलाइट फ्लैट जैसे हॉस्टल हैं, जहां उनके पास अपना किचन होता है,
वहां ऐसी कोई रोक
नहीं है.''
उन्होंने कहा, "हमने
यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेस को मौखिक रूप से सलाह दी है कि वहां नॉन वेज न
बनाया जाए और उसकी जगह पनीर, चना जैसे विकल्प दिए जाएं. को-ऑपरेटिव मेस से भी ऐसा करने को कहा गया
है, लेकिन
कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है."
"न तो हमने कैंपस में नॉन-वेज खाने पर रोक
लगाई है और न ही सरकार या राजभवन ने ऐसा करने के लिए कहा है."
राज्यपाल की टिप्पणी से जोड़ा जा रहा है फ़ैसला
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, यूपी की गवर्नर आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को दीक्षांत समारोह में नॉन वेज पर भी बात की थी (फ़ाइल फ़ोटो)
हालांकि यूनिवर्सिटी का यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले आयोजित केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों के मेस का ज़िक्र करते हुए नॉन वेज खाने पर टिप्पणी की थी.
13 जुलाई को आयोजित समारोह में आनंदीबेन पटेल ने कहा था, "राजभवन की टीम ने विश्वविद्यालय के तीन मेस का निरीक्षण किया और पाया कि वहां नॉन वेज बनता है. एक जगह एक्सपायर्ड मसालों का भी प्रयोग किया जा रहा था."
राज्यपाल ने अपने संबोधन में इसके आगे नॉन वेज पर किसी प्रतिबंध की बात नहीं कही. लेकिन अब चूंकि अगले ही दिन यूनिवर्सिटी ने नॉनवेज न बनाने को लेकर मेस में मौखिक एडवाइज़री जारी की है, तब दोनों घटनाओं को एक दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है.
हालांकि विश्वविद्यालय का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर राजभवन के किसी आदेश के आधार पर नहीं लिया गया.
डॉ. केके सिंह ने कहा, "15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल ने छात्रावासों में नॉन-वेज परोसे जाने पर नाराज़गी जताई थी. हमने उसी को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइज़री जारी की है.''
यह पहली बार नहीं है जब आनंदीबेन पटेल ने किसी यूनिवर्सिटी के छात्रावास में परोसे जाने वाले नॉन-वेज खाने पर सवाल उठाए हों.
इससे पहले 15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के तीसरे दीक्षांत समारोह में उन्होंने हॉस्टल में एक हफ़्ते में दो दिन नॉन-वेज खाना परोसे जाने की व्यवस्था पर भी टिप्पणी की थी.
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर भारत ने क्या कहा
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत और अमेरिका की संबंधित एजेंसियां कई वर्षों से मिलकर काम कर रही हैं और यह सहयोग लगातार और मज़बूत हो रहा है (फ़ाइल फ़ोटो)
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर अमेरिका में दायर आरोपपत्र को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "अमेरिका की क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई के संबंध में हमने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी घोषणा देखी है."
"इसमें कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के ख़िलाफ़ आरोपपत्र और प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी दी गई है."
उन्होंने कहा, "भारत लगातार यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और इससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क हमारे समाज के लिए गंभीर ख़तरा हैं."
"आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के मामले में भारत और अमेरिका के बीच मज़बूत, प्रभावी और लगातार बढ़ता सहयोग है. भारत और अमेरिका की संबंधित एजेंसियां कई वर्षों से मिलकर काम कर रही हैं और यह सहयोग लगातार और मज़बूत हो रहा है."
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग को ज़िम्मेदार ठहराए जाने संबंधी बयान पर जायसवाल ने कहा, "हमने रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के डिप्टी कमिश्नर की टिप्पणियों पर ध्यान दिया है."
"भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए अपने साझेदार देशों के साथ क़ानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग के ज़रिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है."
पिछले दिनों अमेरिका ने भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गैंग समेत तीन समूहों पर एक्शन लेते हुए 24 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है.
इमेज कैप्शन, अयोध्या राम मंदिर के लिए सीईओ की वैकेंसी पर आज का कार्टून.
तसलीमा नसरीन क़रीब दो दशक बाद लौटेंगी कोलकाता
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, दो दशक पहले विरोध प्रदर्शनों के चलते बांग्लादेश की लेखिका तसलीमा नसरीन को कोलकाता छोड़ना पड़ा था (फ़ाइल फ़ोटो)
करीब दो दशक पहले अपने लेखों को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ने को मजबूर हुईं बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन अगले महीने शहर लौटेंगी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह वापसी राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है. पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार इसे धार्मिक कट्टरता के आगे लंबे समय तक हुए कथित झुकाव से बदलाव के संकेत के तौर पर पेश कर रही है.
तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह 1 अगस्त को कोलकाता में रवींद्र सदन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी. इस दौरान वह कविता पाठ भी करेंगी.
धर्मनिरपेक्ष और कट्टरतावाद विरोधी संगठनों के एक समूह की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का महत्व साहित्य तक सीमित नहीं माना जा रहा है.
1994 में कट्टरपंथियों की ओर से धमकी मिलने के बाद से वो बांग्लादेश से बाहर रह रही हैं.
समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना, फिर किया कम
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, अदालत ने कोर्ट को गुमहार करने के लिए समय रैना को कड़ी फटकार लगाई है
विकलांग लोगों पर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना समेत पांच लोगों पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए ज़ुर्माना लगाया है.
बार एंड बेंच के मुताबिक़, कोर्ट ने उन पर अदालती आदेशों का उल्लंघन करने के लिए पहले 10 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया, जिसे बाद में कम करके तीन लाख रुपये कर दिया.
सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आपने आदेशों का पालन नहीं किया, तो यह राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी जाएगी."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़,
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारा मानना है कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह किया है और हमारे आदेशों का
खुलेआम उल्लंघन किया है.”
यह मामला क्योर एसएमए इंडिया फ़ाउंडेशन की एक याचिका से जुड़ा है.
इसमें समय रैना पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) के महंगे इलाज को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी करने और इस बीमारी से प्रभावित एक व्यक्ति का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया गया है.
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन को हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित कर विकलांग लोगों के इलाज के लिए बनाए गए कोष के लिए धन जुटाने का निर्देश दिया था.
सुनवाई के दौरान सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कहा, "समय रैना शो तो कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्होंने एसएमए फ़ाउंडेशन या एसएमए से पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया है.”
भोजशाला परिसर मामला: एमपी हाई कोर्ट के फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, नमाज़ पर क्या कहा?
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, धार में भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.
हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया था.
हाई कोर्ट ने वहां नमाज अदा करने पर रोक लगाई गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के उस अंतरिम आदेश के अनुरोध को नहीं माना, जिसमें यथास्थिति बहाल करने की मांग की गई थी.
याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि मुसलमानों को निर्धारित दिनों में हिंदू पूजा के साथ-साथ शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति मिले.
क़ानूनी मामलों की ख़बरें देने वाली बेवसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी की, "हमें ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए जिससे तनाव पैदा हो."
हालांकि, पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल से सटे एक अलग खुले स्थान को मुस्लिम पक्ष के लिए शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए जगह उपलब्ध कराए.
असम सरकार ने बीते दो सालों में कितने लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा, दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी से बीबीसी हिन्दी के लिए
इमेज स्रोत, Sanjeev Verma/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, राज्य सरकार ने पिछले दो सालों में अलग-अलग कैटगरी के तहत कुल 1,679 बांग्लादेशियों को वापस उनके देश भेजा है (फ़ाइल फ़ोटो: हिमंत बिस्वा सरमा)
असम सरकार ने पिछले दो सालों में फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की ओर से विदेशी घोषित किए गए कुल 193 लोगों को बांग्लादेश 'पुशबैक' किया है. यह जानकारी सरकार ने असम विधानसभा के जारी बजट सत्र के दौरान सोमवार को सदन में दी.
इन लोगों में 67 ऐसे ‘घोषित विदेशी’ भी शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल फिर से लागू किए गए 1950 के 'प्रवासी निष्कासन कानून' के तहत देश की सीमा से बाहर भेजा गया है.
जबकि राज्य सरकार ने पिछले दो सालों में अलग-अलग कैटगरी के तहत कुल 1,679 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा है.
दरअसल, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ़) के विधायक बदरुद्दीन अजमल ने प्रश्नकाल के दौरान सवाल पूछा था कि पिछले दो सालों में कितने लोगों को बांग्लादेश 'पुशबैक' यानी वापस भेजा गया है?
इस सवाल का जवाब देते हुए गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सदन को बताया, "1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच कुल 1,679 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया है. इन लोगों का निष्कासन अलग-अलग कैटेगरी में किया गया है. इन 1679 लोगों में से 193 वे लोग हैं जिन्हें फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया है."
भारत की ओर से अपनाए गए इस 'पुशबैक' तरीके का बांग्लादेश कड़ा विरोध जताता आ रहा है.
इमेज स्रोत, Dilip Sharma
इमेज कैप्शन, जिन लोगों को 'फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल' विदेशी घोषित करती है, वे गुवाहाटी हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
असल में क़ानूनी तौर पर जिन लोगों को 'फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल' विदेशी घोषित करती है, वे गुवाहाटी हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं.
जबकि देश से बाहर भेजने (डिपोर्टेशन) की औपचारिक प्रक्रिया में आपसी जांच-पड़ताल के बाद संबंधित व्यक्ति को दूसरे देश के अधिकारियों को सौंपना शामिल होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह व्यक्ति वास्तव में उसी देश का नागरिक है.
लेकिन मई 2025 से असम सरकार ने घोषित 'विदेशी' लोगों को वापस भेजने या दूसरे देश से बातचीत किए बिना उन्हें जबरन अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार धकेलने का तरीका अपनाया है.
इसके बाद बीते सितंबर में, सरकार ने 'इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ़्रॉम असम) एक्ट, 1950' (असम से प्रवासियों को निकालने का कानून) को फिर से लागू करने की घोषणा कर दी.
इसके तहत अगर, फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल से कोई अवैध नागरिक घोषित होता तो ज़िला प्रशासन बिना किसी देर के उसे सीमा पार 'पुशबैक' करने का निर्देश दे सकता है.
असम सरकार ने 'प्रवासी निष्कासन कानून' को फिर से लागू करने के बाद एक एसओपी (मानक प्रक्रिया) बनाई है. कई मौकों पर इसे लागू करके घोषित विदेशियों को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का निर्देश दिया है, जिसके बाद अधिकारी उन्हें इंटरनेशनल बॉर्डर पार भेज देते हैं.
सीएम सरमा ने कांग्रेस विधायक नूरुल इस्लाम के 'डी-वोटर्स' (संदिग्ध नागरिकता वाले वोटर) से जुड़े एक और सवाल के जवाब में कहा कि राज्य की वोटर लिस्ट में 91,385 डी-वोटर्स हैं.
अभी तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता संदीप राय रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी हिन्दी की कुछ अहम ख़बरों को आप उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं.
अरविंद केजरीवाल 16 जुलाई को सोनम वांगचुक से मिलने जाएंगे
इमेज स्रोत, Sanchit Khanna/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, अरविंद केजरीवाल ने सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की (फ़ाइल फ़ोटो)
आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को अपनी पार्टी का समर्थन दिया.
उन्होंने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की.
अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वह गुरुवार (16 जुलाई) को शाम 5 बजे जंतर-मंतर जाएंगे और सोनम वांगचुक को अपना समर्थन देंगे.
अरविंद केजरीवाल ने कहा, "सोनम वांगचुक कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी सेहत खराब हो रही है. वह देश के लिए बहुत क़ीमती हैं. मैं उनसे अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करता हूं. संघर्ष के लिए और भी तरीके हैं."
गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुके हैं.
अखिलेश यादव ने 17 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से की ये अपील
इमेज स्रोत, Deepak Gupta/Hindustan Times via Getty Images
इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव ने कहा है कि सोनम वांगचुक का जीवन पूरी दुनिया के लिए अनमोल है (फ़ाइल फ़ोटो)
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का जीवन देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अनमोल है.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंगलवार को एक पोस्ट में लिखा, "सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें. उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है, क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए."
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में केंद्र की बीजेपी सरकार पर भी तीखा हमला बोला.
उन्होंने आरोप लगाया, "जिस सरकार को जगाने के लिए सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे हैं, वह सिद्धांतहीन, भ्रष्ट और असंवेदनशील है."
उन्होंने कहा, "भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है. उनके लिए धन ही प्रधान है. वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं. उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है. जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता. सत्याग्रह का महत्व वो क्या जानें जो सत्ताग्रह के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं."
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक के अनशन का मंगलवार को 17वां दिन है. अखिलेश यादव से पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुकी हैं.
उमर अब्दुल्लाह के बयान पर बीजेपी ने भेजा 100 करोड़ का क़ानूनी नोटिस, जहांगीर अली, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से
इमेज स्रोत, Firdous Nazir/NurPhoto via Getty Images
इमेज कैप्शन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह (फ़ाइल फ़ोटो)
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 100 करोड़ रुपए के मानहानि मुकदमे की चेतावनी दी है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सत पॉल शर्मा ने अब्दुल्लाह को एक लीगल नोटिस भेजा है जिसमें उनसे वो आरोप वापस लेने को कहा गया है, जिसमें अब्दुल्लाह ने कहा था कि बीजेपी उनकी सरकार गिराने के लिए विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है.
दरअसल, सीएम अब्दुल्लाह ने 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक रैली में दावा किया था कि बीजेपी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने जम्मू इलाके के कुछ विधायकों से संपर्क किया था.
अब्दुल्लाह ने आरोप लगाया था कि विधायकों को बीजेपी में शामिल होने के लिए 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का ऑफ़र दिया गया था.
इसके बाद जम्मू-कश्मीर बीजेपी की ओर से वकील परिमोक्ष सेठ ने अब्दुल्लाह को कानूनी नोटिस भेजा. तीन पेज के इस नोटिस में अब्दुल्लाह से सात दिनों के भीतर लिखित रूप से बयान वापस लेने और बिना शर्त माफ़ी मांगने को कहा गया है.
नोटिस में कहा गया है कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे, दुर्भावनापूर्ण और बिना किसी तथ्यात्मक आधार के हैं. इसमें कहा गया है कि इन आरोपों से पार्टी की प्रतिष्ठा, सम्मान और छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है.
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सत पॉल शर्मा (फ़ाइल फ़ोटो)
बीजेपी ने चेतावनी दी है कि अगर अब्दुल्लाह सात दिनों के भीतर बयान वापस नहीं लेते और माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो पार्टी उनके ख़िलाफ़ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई शुरू करेगी. इसमें 100 करोड़ रुपये के हर्जाने के लिए मानहानि का मुकदमा भी शामिल है.
वहीं, उमर अब्दुल्लाह ने बीजेपी के कानूनी नोटिस को 'लव लेटर' बताया है. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है और इससे पता चलता है कि बीजेपी उन्हें एक ऐसी राजनीतिक ताकत मानती है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
अब्दुल्लाह ने बिना नाम लिए बीजेपी के एक नेता पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह पिछले कुछ समय से उनकी पार्टी के ख़िलाफ़ बेबुनियाद और छवि खराब करने वाले बयान दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने राजनीतिक तरीके से जवाब दिया है, लेकिन अब वह भी संबंधित नेताओं को कानूनी नोटिस भेजना शुरू करेंगे.
ईरानी हमले में भारतीय क्रू मेंबर की मौत, इंडियन एंबेसी ने क्या कहा
इमेज स्रोत, AFPTV / AFP via Getty Images
इमेज कैप्शन, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि हमले का शिकार हुए जहाज़ नियमों का उल्लंघन कर रहे थे (सांकेतिक तस्वीर)
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर मंगलवार को ईरान ने मिसाइल हमला किया, जिसमें एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई. इस हमले में छह भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हुए हैं.
यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने भी इस संबंध में बयान जारी करते हुए भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर शोक व्यक्त किया.
दूतावास ने लिखा, "दो जहाज़ों पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की दुखद मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं. हम हालात पर लगातार नज़र रखे हुए हैं और घायलों और उनके परिवारों को हर संभव मदद देने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं."
यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, उसके टैंकर मोंबासा और अल बहिया को ईरान की ओर से दागी गई दो क्रूज़ मिसाइलों ने निशाना बनाया. हमला होर्मुज़ स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में ओमान के समुद्री क्षेत्र में हुआ.
मंत्रालय ने बताया कि मोंबासा टैंकर पर तैनात एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई. वहीं, आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं. घायलों में चार की हालत गंभीर बताई गई है.
हमले के कारण दोनों टैंकरों को नुक़सान पहुंचा और उनमें आग लग गई. हालांकि, बाद में आग पर क़ाबू पा लिया गया.
यूएई रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन बताया.
मंत्रालय ने कहा, "यूएई को अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार है. किसी भी संभावित ख़तरे का सामना करने के लिए देश पूरी तरह तैयार है."
दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बयान जारी कर हमले की ज़िम्मेदारी ली और कहा कि हमले का शिकार हुए जहाज़ नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.