बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी: शिकायत, जांच और गिरफ़्तारी तक कैसे पहुंचा मामला?

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- Author, आसिफ़ अली
- पदनाम, देहरादून से बीबीसी हिन्दी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में हेराफेरी का मामला इन दिनों सुर्ख़ियों में है.
इस मामले के बाद उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है, जो मंदिर समिति की आंतरिक जांच से आगे बढ़कर पुलिस जांच, राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है.
2 जुलाई को थाली भेंट की गणना के दौरान कथित अनियमितता की सूचना सामने आने के बाद एक सामाजिक संगठन ने मंदिर समिति से शिकायत की.
इसके बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया, सरकार ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की और पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की. अब एसआईटी ने इस मामले की जांच शुरू की है.
12 जुलाई की रात एसआईटी ने समिति के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार किया. इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ़ बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी बहस छेड़ दी है कि श्रद्धालुओं के दान की निगरानी और जवाबदेही की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है.
एक शिकायत से शुरू हुआ विवाद, क्या है पूरा मामला?

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बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला 2 जुलाई को उस समय सामने आया, जब मंदिर में थाली भेंट की गणना के दौरान कथित अनियमितता की सूचना मिली. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई दावे सामने आए और मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया.
3 जुलाई को भैरव सेना के संस्थापक संदीप खत्री ने श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत भेजी.
शिकायत में चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए संबंधित कर्मचारी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई.
इस शिकायत के सार्वजनिक होने के बाद मामला केवल एक कथित वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहा. इस पूरे घटनाक्रम ने बद्रीनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थल में चढ़ावे के प्रबंधन और उसकी निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए.
इसके बाद मंदिर समिति ने आंतरिक जांच शुरू की. बाद में पुलिस ने मामला दर्ज किया और राज्य सरकार ने भी अलग से तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी.
बीकेटीसी का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया और चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई. समिति की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद अध्यक्ष कार्यालय में तैनात वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया.
बीकेटीसी ने यह भी कहा है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके ख़िलाफ़ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया?

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8 जुलाई को बीकेटीसी के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 306 और 316(5) के तहत मामला दर्ज किया गया.
एफ़आईआर के अनुसार, विभागीय जांच समिति की प्रारंभिक जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने थाली भेंट की गणना के दौरान धनराशि और अन्य भेंट सामग्री को कथित रूप से अपने निजी हित में ले लिया.
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. एसआईटी ने कर्मचारियों और गवाहों के बयान दर्ज किए और 2 जुलाई की सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया.
उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में जांच दल ने दावा किया कि प्रमोद नौटियाल कई बार गणना कक्ष से नकदी और अन्य भेंट सामग्री मोबाइल फोन के नीचे छिपाकर और अपनी जेब में रखकर बाहर ले जाते दिखाई दिए. पुलिस का यह भी दावा है कि इनमें 500 रुपये के नोट, सोना-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला और केसर के पैकेट शामिल थे.
इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने 12 जुलाई की रात प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कहा है कि अभियुक्त को न्यायालय में पेश किया जा रहा है और मामले की आगे की जांच जारी है.
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होनी बाकी है.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

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इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है. कांग्रेस, भाकपा (माले) और बीकेटीसी अध्यक्ष की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का आरोप है कि गिरफ्तार कर्मचारी ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर कहा है कि यदि उस पर दबाव बनाया गया तो वह अन्य लोगों के नाम भी बताएगा. हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं की है.
गोदियाल का कहना है कि यदि प्रमोद नौटियाल को मंदिर में चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी दी गई थी तो इसकी जवाबदेही केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं हो सकती. उनका आरोप है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मंदिर समिति के अध्यक्ष की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए.
दूसरी ओर, भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने आरोप लगाया है कि यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि प्रमोद नौटियाल अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक थे तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें बद्रीनाथ में क्या जिम्मेदारियां दी गई थीं और क्या वे अकेले काम कर रहे थे. उन्होंने मंदिर समिति के शीर्ष स्तर की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की.
इन आरोपों पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने जवाब देते हुए कहा है कि प्रमोद नौटियाल उनके "निजी सचिव" नहीं बल्कि मंदिर समिति के कर्मचारी हैं और वे पहले भी कई अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में काम कर चुके हैं.
हेमंत द्विवेदी ने आरोप लगाया कि नौटियाल को वर्ष 2014 में तत्कालीन बीकेटीसी अध्यक्ष और वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यकाल में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के पद पर स्थायी नियुक्ति मिली थी और बाद में उन्हें वैयक्तिक सहायक के पद पर समायोजित किया गया.
हेमंत द्विवेदी ने यह भी कहा कि वर्तमान मामले में संदिग्ध कर्मचारी के ख़िलाफ़ निलंबन, एफआईआर और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई हो चुकी है, विभागीय जांच पूरी हो गई है और सरकारी उच्चस्तरीय जांच भी जारी है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि गणेश गोदियाल के बीकेटीसी अध्यक्ष रहने के दौरान भी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे थे.
कांग्रेस और भाकपा (माले) ने इन आरोपों पर बीकेटीसी अध्यक्ष के दावों से सहमति नहीं जताई है. वहीं, इन राजनीतिक आरोपों और जवाबों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा.
मुख्यमंत्री बोले- 'दोषी बख्शे नहीं जाएंगे'

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मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए.
इसके बाद राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया. गढ़वाल मंडल आयुक्त को समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य नियुक्त किया गया.
सरकार के आदेश के मुताबिक समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी है. साथ ही उसे यह भी सुझाव देना है कि भविष्य में दान-चढ़ावे के प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह कैसे बनाया जा सकता है.
मुख्यमंत्री धामी ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा.
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बद्रीनाथ धाम देश के प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और नकद, आभूषण तथा अन्य प्रकार का चढ़ावा अर्पित करते हैं. ऐसे में दान के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और मंदिर प्रशासन की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है.
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