लाइव, आईआईटी बॉम्बे: छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन, परीक्षा में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने की बात आई सामने

आईआईटी बॉम्बे के सेकंड ईयर का 19 वर्षीय छात्र शुक्रवार को अपने कमरे में मृत पाया गया.

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रौनक भैड़ा

  1. ब्रिटेन के पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन ने इमरान ख़ान की रिहाई की मांग करते हुए ये कहा

    बोरिस जॉनसन

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के पूर्व बोरिस जॉनसन ने जेल में बंद इमरान ख़ान की स्थिति पर चिंता जताई और उनकी रिहाई की मांग की (फ़ाइल फ़ोटो)

    ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की जेल से रिहाई के लिए ब्रिटिश सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है.

    दरअसल, जॉनसन ने ब्रिटिश अख़बार डेली मेल में शुक्रवार को प्रकाशित अपने एक लेख में जेल में बंद इमरान ख़ान की स्थिति पर चिंता जताई और उनकी रिहाई की मांग की.

    लेख में जॉनसन ने दावा किया कि 73 वर्षीय इमरान ख़ान को कई-कई दिनों तक एकांत कारावास में रखा जाता है. उनके मुताबिक़, जिस कमरे में इमरान ख़ान को रखा गया है, उसमें शौचालय भी है और उसका आकार क़रीब 6×8 फ़ीट है, जिसके कारण वो एक्सरसाइज़ भी नहीं कर पाते.

    जॉनसन ने यह भी आरोप लगाया कि इमरान ख़ान की जेल कोठरी में खिड़कियां नहीं हैं और कभी-कभी लाइट बंद कर दी जाती है, जिससे उन्हें अँधेरे में रहना पड़ता है.

    हालांकि, जेल में इमरान ख़ान को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर पाकिस्तान में पहले सामने आई आधिकारिक रिपोर्ट में अलग जानकारी दी गई थी.

    बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, फ़रवरी में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त 'फ़्रेंड ऑफ़ द कोर्ट' बैरिस्टर सलमान सफ़दर ने रावलपिंडी की अदियाला जेल में इमरान ख़ान से मुलाक़ात की थी. इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इमरान ख़ान की बताई गई परिस्थितियों और ख़ुद देखी गई सुविधाओं का उल्लेख किया था.

    रिपोर्ट के मुताबिक़, इमरान ख़ान ने सलमान सफ़दर को बताया था कि उन्हें जेल में एक्सरसाइज़ के इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें दिन में दो बार परिसर में टहलने की अनुमति है. रिपोर्ट में पर्याप्त वेंटिलेशन और दिन-रात रोशनी की सुविधा होने की बात भी दर्ज की गई थी.

    वहीं, जॉनसन ने अपने लेख में दावा किया कि इमरान ख़ान की सेहत बिगड़ रही है और उनकी रिहाई की फ़िलहाल कोई स्पष्ट उम्मीद नज़र नहीं आती. उन्होंने यह भी कहा कि इमरान ख़ान के बेटों को उनसे जेल में मिलने की अनुमति नहीं दी गई है.

    जॉनसन के मुताबिक़, "पाकिस्तान के अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर इमरान ख़ान जेल से बाहर आते हैं तो जनता के बीच उनके समर्थन के कारण वह दोबारा मज़बूत राजनीतिक स्थिति में आ सकते हैं."

    बोरिस जॉनसन ने ब्रिटिश सरकार की भी आलोचना की और कहा कि लंदन ने इमरान ख़ान के मामले में बहुत कम आवाज़ उठाई है. उन्होंने ब्रिटेन के साथ इमरान ख़ान के पुराने संबंधों और ब्रिटेन में उनके समर्थकों की संख्या का भी उल्लेख किया.

  2. आईआईटी बॉम्बे: छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन, परीक्षा में चैटजीपीटी इस्तेमाल करने की बात आई सामने

    प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स

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    इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स की मांग है कि डायरेक्टर इस्तीफ़ा दें और कॉलेज प्रशासन इस मामले की रिपोर्ट सामने रखते हुए ज़िम्मेदारी तय करे

    आईआईटी बॉम्बे के सेकंड ईयर का 19 वर्षीय छात्र शुक्रवार को अपने कमरे में मृत पाया गया.

    आईआईटी बॉम्बे के प्रशासन के मुताबिक़, इससे पहले छात्र को परीक्षा हॉल में मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था.

    मृतक छात्र डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग का छात्र था. छात्र की मौत के बाद संस्थान परिसर में कई छात्रों ने प्रदर्शन किया.

    (आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

    इस मामले पर डीसीपी दत्तात्रेय नलवाडे ने मीडिया से कहा, "आईआईटी पवई में आज एक छात्र ने आत्महत्या की थी. उसके बाद आईआईटी के कुछ छात्र इकट्ठा हुए और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना शुरू किया. आईआईटी प्रशासन उनके साथ चर्चा करके सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है. यहाँ पर पुलिस ने सभी इंतज़ाम किए हैं."

    इस मामले में संस्थान की ओर से भी एक आधिकारिक बयान सामने आया है. बयान में कहा गया है कि छात्र ने जवाब पाने के लिए परीक्षा के प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर अपलोड किया था.

    आधिकारिक बयान में कहा गया, "पहले परीक्षा के दौरान छात्र को हॉल में मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करते हुए पाया गया था. उसने जवाब पाने के लिए परीक्षा का प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड किया था. छात्र के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई."

    "इस मामले पर इंस्ट्रक्टर और एचओडी ने भी छात्र से बात की. उन्होंने उसे समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उसके पढ़ाई के भविष्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया. बाद में शाम को वह अपने कमरे में मृत पाया गया."

    प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स की मांग है कि डायरेक्टर इस्तीफ़ा दें और कॉलेज प्रशासन इस मामले की रिपोर्ट सामने रखते हुए ज़िम्मेदारी तय करे. स्टूडेंट्स का कहना है कि वो यह आश्वासन भी चाहते हैं कि कॉलेज में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

  3. ग्रीनलैंड पर अमेरिका और डेनमार्क की बीच समझौता, ट्रंप ने क्या बताया, ओलिवर ओ'कोनेल और मैक्स मात्ज़ा

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर हमेशा के लिए पूरा कंट्रोल अमेरिका का होगा (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर एक अहम समझौता हुआ है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उसकी दूसरी सभी ज़रूरतों पर हमेशा के लिए अमेरिका का पूरा कंट्रोल होगा.

    वहीं, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने समझौते की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान औपचारिक रूप से इस पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे.

    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उसकी दूसरी सभी ज़रूरतों पर अमेरिका का हमेशा के लिए पूरा नियंत्रण होगा. इससे अमेरिका की ग्रीनलैंड को लेकर सभी चिंताएं पूरी तरह दूर हो जाएंगी. इसके लिए अमेरिका को कोई ख़र्च नहीं करना होगा."

    उन्होंने लिखा, "अब से अमेरिका की लिखित मंज़ूरी के बिना उसका कोई भी दुश्मन ग्रीनलैंड में अपना ठिकाना नहीं बना सकेगा, वहां अपनी सेना नहीं रख सकेगा और न ही ग्रीनलैंड में सेंसिटिव इन्वेस्टमेंट कर सकेगा."

    ट्रंप ने आगे लिखा, "यह एक अनंत समझौता है, यानी इसका कभी अंत नहीं होगा. आज जो कुछ हुआ है, उसे लेकर हम बहुत सम्मानित और गर्व महसूस कर रहे हैं. आज हुए सभी समझौतों को अमेरिकी लोग हमेशा याद रखेंगे."

    दरअसल, ट्रंप पिछले कई महीनों से ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कहते रहे हैं. उन्होंने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद खनिज संसाधनों को प्रमुख कारण बताया था.

    ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड पर क़ब्ज़े के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया था.

    डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा, "यह समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में अमेरिका और डेनमार्क की साझा सुरक्षा को मज़बूत करता है."

    हालांकि, उन्होंने समझौते में ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में बताए गए विशेष प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी नहीं दी.

  4. नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ़्तारी पर क्या बोलीं सायोनी घोष

    सायोनी घोष

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    इमेज कैप्शन, नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) की सांसद सायोनी घोष (फ़ाइल फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को शुक्रवार को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. इस मामले पर नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) की सांसद सायोनी घोष की प्रतिक्रिया आई है.

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर एनसीपीआई में आईं सायोनी घोष ने कहा, "कांग्रेस नेता जो उम्मीदवार बने हैं... जहां तक मुझे कल तक पता था, उनके ख़िलाफ़ कुछ मामले लंबित थे. यह दो पार्टियों के बीच का मामला है, कोई भी चुनाव आयोग या अदालत का रुख कर सकता है. चाहे वह कांग्रेस हो या तृणमूल कांग्रेस हो या बीजेपी... हर किसी को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की आज़ादी है."

    उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करूंगी कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, टीएमसी के साथ आए. अगर ऐसा होता है, तो एक मज़बूत संदेश देगा कि यह गठबंधन असली है, सिर्फ़ नाम भर का गठबंधन नहीं है."

    दरअसल, इससे पहले ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. फिर ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन देने का एलान किया था. वहीं, राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ़्तारी पर कहा कि यह 'कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध' है. उन्होंने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया.

    दूसरी ओर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि राहुल गांधी को मामले की सही जानकारी नहीं दी गई थी.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मिलन प्रधान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है, जिनके ख़िलाफ़ हत्या के तीन मामले लंबित हैं. चुनाव के दौरान वारंट पर कार्रवाई करना ज़रूरी है. प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व ने शायद राहुल गांधी को सही जानकारी नहीं दी है."

    गौरतलब है कि नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खाली की थी, इस पर 6 अक्तूबर को चुनाव होगा, रिज़ल्ट 9 अक्तूबर को आएगा.

  5. तमिलनाडु: सीएम विजय 28 सितंबर से शुरू करेंगे सोने की अंगूठी वाली योजना

    मुख्यमंत्री सी जोसेफ़ विजय

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    इमेज कैप्शन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ़ विजय 28 सितंबर 2026 को इस योजना की शुरुआत करेंगे (फ़ाइल फ़ोटो)

    तमिलनाडु सरकार ने नवजातों के लिए 'थाईमामन थंगा मोथिरा थिट्टम' (मामा की सोने की अंगूठी योजना) शुरू करने की तारीख़ का एलान कर दिया है.

    मुख्यमंत्री सी जोसेफ़ विजय 28 सितंबर 2026 को इस योजना की शुरुआत करेंगे. योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी.

    न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने सरकार के हवाले से बताया, योजना के पहले चरण में वितरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां ख़रीदी गई हैं. प्रत्येक अंगूठी पर सीरियल नंबर होगा.

    योजना का लाभ लेने के लिए नवजात की मां का तमिलनाडु की स्थायी निवासी होना ज़रूरी है. इसके अलावा, मां का पीआईसीएमई और आरसीएच पहचान पत्र के लिए पंजीकरण होना अनिवार्य है. पंजीकरण के बाद संबंधित पहचान पत्र जारी किया जाता है.

    सरकार ने बताया कि योजना के तहत 22 जून (मुख्यमंत्री का जन्मदिन) से 28 सितंबर तक सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को भी इसका लाभ दिया जाएगा. इसके लिए राज्यभर में 107 वितरण केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर हर रोज़ 100 बच्चों को सोने की अंगूठी देने की व्यवस्था की गई है.

    लाभार्थियों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय ही सोने की अंगूठी उपलब्ध कराई जाएगी.

    सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने और सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने के लिए प्रोत्साहित करना है.

    यह योजना सत्तारूढ़ टीवीके के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहा है. योजना को लागू करने के लिए 23 जून 2026 को सरकारी आदेश जारी किया गया था.

    योजना की लॉन्चिंग की तारीख को लेकर फ़ैसला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद लिया गया.

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में हर साल क़रीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है.

    राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के मुताबिक़, इनमें 99.9 प्रतिशत डिलीवरी अस्पतालों में होती हैं. इनमें क़रीब 4.20 लाख प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं, जो कुल डिलीवरी का लगभग 53 प्रतिशत है.

  6. डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनएन समेत इन तीन मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस से किया 'बैन', बर्नड डेबुसमैन जूनियर और मैक्स मात्ज़ा

    डोनाल्ड ट्रंप

    इमेज स्रोत, Charles McQuillan/Getty Images

    इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों पर 'मनगढ़ंत ख़बरें' और 'झूठ' लिखने या रिपोर्ट करने का आरोप लगाया (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सीएनएन, एमएस नाऊ और पॉलिटिको को व्हाइट हाउस से 'बैन' करने का एलान किया है.

    ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों पर 'मनगढ़ंत ख़बरें' और 'झूठ' लिखने या रिपोर्ट करने का आरोप लगाया. हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में किसी विशेष ख़बर या रिपोर्ट का हवाला नहीं दिया.

    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह एलान करते हुए गर्व हो रहा है कि तुरंत प्रभाव से मैं फ़ेक न्यूज़ सीएनएन, एमएस नाऊ (जिसने हाल ही में दर्शकों की कमी और भरोसे की कमी के कारण अपना नाम एमएसएनबीसी से बदलकर एमएस नाऊ कर लिया है) और पॉलिटिको (जिसे बेईमान जो बाइडन के शासन में अमेरिकी सरकार से सीधे 8 मिलियन डॉलर का ग़लत और हास्यास्पद सब्सक्रिप्शन मिला था. यह अब तक की सबसे बड़ी रक़म है, ताकि उन्हें 'ज़िंदा' रखा जा सके. मुझे यह भ्रष्टाचार जैसा लगता है) को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित कर रहा हूं, क्योंकि वे लगातार 'फ़ेक न्यूज़' प्रकाशित कर रहे हैं!"

    उन्होंने लिखा, "मीडिया संस्थानों को अमेरिका के राष्ट्रपति, ट्रंप प्रशासन या अमेरिका के बारे में ख़बर देते समय लगातार मनगढ़ंत बातें और झूठ लिखने या बताने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए. दूसरे फ़ेक न्यूज़ मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई होगी."

    सीएनएन ने ट्रंप के इस क़दम को अमेरिकी प्रेस की स्वतंत्रता पर 'ग़ैरकानूनी हमला' बताया. नेटवर्क ने कहा कि वह व्हाइट हाउस में तैनात अपनी टीम और उसकी 'निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग' के साथ पूरी तरह खड़ा है.

    सीएनएन ने अपने बयान में कहा, "अमेरिकी संविधान के तहत हमें सरकार या राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बग़ैर प्रशासन से जुड़ी ख़बरें कवर करने का यदि ट्रंप का घोषित प्रतिबंध लागू होता है, तो वह इस संवैधानिक अधिकार पर ग़ैरकानूनी हमला होगा."

    पॉलिटिको ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह व्हाइट हाउस प्रशासन की 'निष्पक्ष रिपोर्टिंग' जारी रखेगा. संस्थान ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करने की किसी भी कोशिश का मज़बूती से विरोध करेगा.

    वहीं, एमएस नाऊ ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

  7. ट्रंप ने किया हस्ताक्षर, भारत समेत कुछ देशों पर 100% तक टैरिफ़ लगाने का प्रावधान, बर्नड डेबुसमैन जूनियर, व्हाइट हाउस रिपोर्टर

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी संसद (यूएस कांग्रेस) से ये बिल पहले ही पास हो चुका है (फ़ाइल फ़ोटो: डोनाल्ड ट्रंप)

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

    नए क़ानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस ख़रीदने वाले पांच सबसे बड़े ख़रीदार देशों पर 100% तक टैरिफ़ लगाने का अधिकार मिल गया है. इनमें रूस के प्रमुख ऊर्जा ख़रीदार भारत और चीन भी शामिल हैं.

    हालांकि, बिल अपने आप भारत या चीन पर 100% टैरिफ़ लागू नहीं करता, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसा करने का अधिकार देता है. अमेरिकी संसद (यूएस कांग्रेस) से ये बिल पहले ही पास हो चुका है.

    बिल का आधिकारिक नाम "लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026" है. यह बिल दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है.

    ग्राहम की 11 जुलाई 2026 को मृत्यु हो गई थी और वे यूक्रेन के समर्थक और रूस पर कड़े प्रतिबंधों के पक्षधर थे.

    48 पन्नों वाले इस बिल में उन देशों के लिए छूट है जो रूस से अपनी ज़रूरत की 15% से कम प्राकृतिक गैस आयात करते हैं और रूस पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए काम कर रहे हैं.

    इसके अलावा, बिल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी सरकार के बड़े अधिकारियों, बैंकों और दूसरी वित्तीय संस्थाओं के ख़िलाफ़ भी प्रतिबंध शामिल हैं.

    रूस के उन जहाज़ों के बेड़े पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल पहले से लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है.