तुर्की ने कहा- इसराइल नए दुश्मन की तलाश में है, लेकिन हम डरेंगे नहीं

नेतन्याहू और अर्दोआन

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इमेज कैप्शन, इसराइल के राष्ट्रपति बिन्यामिन नेतन्याहू और तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्दोआन बीते कुछ महीनों से एक दूसरे पर तीखी टिप्पणी कर रहे हैं
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तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने कहा है कि इसराइल इस समय एक नए दुश्मन की तलाश में है.

गुरुवार को सीएनएन तुर्क से बातचीत में फ़िदान ने कहा, "जब तक इसराइल या कोई अन्य पक्ष तुर्की के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के ख़िलाफ़ काम करता रहेगा, तब तक हमें किसी से डरने, हिचकिचाने या पीछे हटने की कोई वजह नहीं है."

फ़िदान ने कहा कि ऐसी स्थिति में तुर्की को टकराव से कोई समस्या नहीं है.

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा, "अगर बात वहाँ तक पहुँचती है, तो यह हमारे लिए कोई मुद्दा नहीं है. इसराइल सिर्फ़ मेरी समस्या नहीं है, यह पूरी दुनिया की समस्या है. इसराइल सिर्फ तुर्की की समस्या नहीं है और न ही यह केवल राष्ट्रपति अर्दोआन का मुद्दा है."

हकान फ़िदान ने कहा, "फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि राष्ट्रपति अर्दोआन खुलकर यह कह रहे हैं कि जो ग़लत है, वह ग़लत है."

फ़िदान ने कहा, ''इस पर पूरी मानवता को विचार करना चाहिए. लेकिन हर कोई इसे जानता है और महसूस करता है. लोग बंद कमरों में इस बारे में फुसफुसाते हैं और कभी-कभी खुलकर भी कहते हैं."

इसराइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग

तुर्की

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इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने कहा कि राष्ट्रपति अर्दोआन 'ग़लत को ग़लत' कह रहे हैं

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा, "यह पूरी मानवता की समस्या है. इसे हमें इसी रूप में देखना चाहिए. ये लोग अब ऐसा बोझ बन चुके हैं, जिसे मानवता अब और नहीं ढो सकती."

उन्होंने कहा, "इन नीतियों और इस सोच के साथ मानवता यह बोझ नहीं उठा सकती. मानवीय अंतरात्मा इसे स्वीकार नहीं कर सकती.''

"राजनीतिक व्यवस्थाएं इसे संभाल नहीं सकतीं और आर्थिक व्यवस्थाएं भी इसे सहन नहीं कर सकतीं. आप किसी भी नज़रिये से देखें, ऐसा कोई मानदंड नहीं बचता, जिसके तहत इन्हें इस रूप में स्वीकार किया जा सके."

फ़िदान ने कहा, "हो सकता है तुर्की अकेला ऐसा देश है जो इस पर खुलकर बोल रहा है, लेकिन यह आप सभी की भी समस्या है. अगर आप मुझसे उम्मीद करते हैं कि मैं अकेले ही आपकी ओर से इस समस्या का समाधान करूं, तो सभी को आगे आना होगा.

उन्होंने इसराइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग कहते हुए कहा, "सभी को कूटनीतिक रुख़ अपनाना होगा और उन लोगों पर ज़रूरी प्रतिबंध लगाने होंगे."

इसराइल ने क्या कहा?

नेतन्याहू

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इमेज कैप्शन, इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू आए दिन तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन पर तीख़ी टिप्पणी करते रहते हैं

फ़िदान की इस टिप्पणी पर इसराइल से काफ़ी प्रतिक्रिया आ रही है. तुर्की के विदेश राज्य मंत्री गिडियोन सार ने कहा कि तुर्की के विदेश मंत्री ने उकसाऊ भाषा का इस्तेमाल किया है.

गिडियोन एक्स पर लिखा, ''यहूदियों को असहनीय बोझ बताकर अमानवीय बनाना, इतिहास के सबसे भयावह विनाशकारी शासन तंत्रों की क्लासिक भाषा है. सभ्य दुनिया और तुर्की के नेटो सहयोगियों को इसराइल को मिटाने की इस स्पष्ट अपील की साफ़ और कड़ी निंदा करनी चाहिए.''

इसराइली पत्रकार मारियो नावफल ने एक्स पर लिखा है, ''तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल 'एक नए दुश्मन की तलाश' में है और तुर्की को 'टकराव से कोई समस्या नहीं' है. इसके बाद उन्होंने इसराइल को 'दुनिया की समस्या' बताया.''

उन्होंने कहा, "यह अंकारा का खुले तौर पर क्षेत्र में ईरान की जगह मुख्य इसराइल-विरोधी ताक़त बनने की दिशा में क़दम बढ़ाना है. हमास और हिज़्बुल्लाह के कमज़ोर होने के बाद तुर्की अगले दौर का नेतृत्व करने की कोशिश कर रहा है."

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इसराइल के चैनल 14 के डिप्लोमैटिक संवाददाता तमिर मोराग ने एक्स पर लिखा है, "तुर्की के विदेश मंत्री की यहूदी-विरोधी बयानबाज़ी ने यरूशलम में किसी को चौंकाया नहीं."

"शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर तुर्की को लंबे समय से इसराइल के लिए अगले प्रमुख ख़तरे के रूप में देखा जा रहा है. ख़ासकर तब, जब ईरान से जुड़े ख़तरे से निपटने का काम पूरा हो जाएगा.''

मोराग ने लिखा है, ''समस्या केवल राष्ट्रपति अर्दोआन तक सीमित नहीं है. बल्कि इसकी जड़ें उनके आसपास के नेतृत्व के भीतर भी गहरी वैचारिक सोच में मौजूद हैं."

"जो लोग मानते हैं कि यह सिर्फ़ इसराइल की ओर से अर्मीनियाई जनसंहार को मान्यता देने की प्रतिक्रिया है, वे उस स्पष्ट दिशा को नज़रअंदाज कर रहे हैं, जिस पर मौजूदा शासन के तहत तुर्की लंबे समय से आगे बढ़ रहा है. यह इस्लामवाद और नव-ऑटोमनवाद का मिलाजुला रूप है.''

तमिर मोराग ने लिखा है, ''इसी पृष्ठभूमि में तुर्की से पैदा ख़तरे का शुरुआती असर अब इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज (आईडीएफ़) की लंबी सैन्य तैयारी पर भी दिखाई देने लगा है."

"ख़ास तौर पर प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के समर्थन से नौसेना को अपग्रेड करने की योजना पर ज़ोर बढ़ा है. मक़सद यह है कि मुख्यतः रक्षात्मक भूमिका वाली अपेक्षाकृत छोटी नौसेना को एक रणनीतिक ताक़त में बदला जाए, जो पूर्वी भूमध्यसागर में तुर्की के विशाल नौसैनिक बेड़े का सामना कर सके.''

''साथ ही, इसराइल हर संभव कोशिश कर रहा है कि लॉकहीड मार्टिन एफ़-35 लाइटनिंग II लड़ाकू जेट तुर्की को ना मिले. ऐसा माना जा रहा है कि अगर तुर्की को ये विमान मिलते हैं, तो इससे इसराइली एयर फ़ोर्स की बढ़त कमज़ोर पड़ सकती है, भले ही पूरी तरह ख़त्म न हो.''

किसकी बढ़त

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इमेज कैप्शन, अमेरिका के लिए इसराइल और तुर्की दोनों सहयोगी हैं, तुर्की तो नेटो का मेंबर भी है

जॉर्जटाउन और तेल अवीव यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ योसी शाइन ने बुधवार को 103 एफ़एम को दिए इंटरव्यू में यह चेतावनी दी कि 'क्षेत्र में तुर्की लगातार मज़बूत हो रहा है और इसराइल के प्रति उसकी दुश्मनी भी गहरी होती जा रही है.'

योसी शाइन ने कहा, ''यह मुद्दा अब राजनीतिक बन चुका है और यह तुर्की की बढ़ती ताक़त के साथ इसराइल की अपेक्षाकृत कमज़ोर होती स्थिति से जुड़ा हुआ है."

"इस समय इसराइल और तुर्की के बीच बड़ा संघर्ष चल रहा है. इसलिए स्वाभाविक है कि इसराइल तुर्की को उसके ऐतिहासिक अपराधों की याद दिलाना चाहता है, ठीक वैसे ही जैसे तुर्की इसराइल के ख़िलाफ़ बार-बार ऐसा करता है."

इसराइल

योसी शाइन ने क्षेत्र में तुर्की की मज़बूत होती भूमिका को लेकर भी चिंता जताई. ख़ासकर ऐसे समय में जब अगले सप्ताह तुर्की नेटो के 32 सदस्य देशों की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं.

उन्होंने कहा, "दुनिया में अपनी स्थिति और छवि को लेकर इसराइल एक बड़े संघर्ष से गुज़र रहा है. हमारे लिए सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि तुर्की और अन्य देश हमें ग़ज़ा में जनसंहार करने वाला देश बताने की कोशिश कर रहे हैं."

उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के बाद इसराइल की कमज़ोर हुई स्थिति का तुर्की फ़ायदा उठा रहा है.

उन्होंने कहा, "12 दिन के युद्ध के बाद तुर्की को गंभीर चिंता थी कि इसराइल अमेरिका के साथ गठबंधन में ख़ुद को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित कर लेगा."

इसराइल में तुर्की को लेकर चिंता

ट्रंप

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इमेज कैप्शन, ईरान पर इसराइली और अमेरिकी हमले के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू में आपसी मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं

उन्होंने कहा, "लेकिन अभी, जब ईरान युद्ध का अंतिम परिणाम तय नहीं हुआ है, तुर्की और मज़बूत हो रहा है, जबकि खाड़ी देश अमेरिका के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर रहे हैं."

उन्होंने कहा कि तुर्की एक शक्ति के रूप में अपनी विशेष स्थिति का फ़ायदा उठा रहा है और इसराइल के प्रति उसकी दुश्मनी लगातार बढ़ रही है.

इसी साल फ़रवरी में इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट ने कहा था कि इस इलाक़े में एक नई धुरी बन रही है, जिसमें तुर्की, क़तर, मुस्लिम ब्रदरहुड और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान शामिल हैं.

नेफ़्टाली ने कहा था कि यह गठजोड़ इसराइल के ख़िलाफ़ शत्रुता को हवा दे रहा है और सऊदी अरब को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.

बेनेट ने इस कॉन्फ़्रेंस में चेतावनी दी कि 'तुर्की इसराइल के लिए एक नया ख़तरा' बनता जा रहा है और इसे लेकर सरकार अनजान है.

इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन एक ख़तरनाक प्रतिद्वंद्वी हैं जो इसराइल को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. हमें फिर से अपनी आँखें बंद नहीं करनी चाहिए."

बेनेट ने कहा, "वर्तमान सरकार एक बार फिर सो रही है. हमारी सीमाओं पर बढ़ते कट्टरपंथी ख़तरे के चिंताजनक संकेत हैं. एक शत्रुतापूर्ण मुस्लिम ब्रदरहुड धुरी, जिसके पीछे पाकिस्तानी परमाणु हथियारों का समर्थन है और इसका नेतृत्व एक महत्वाकांक्षी और शत्रुतापूर्ण तुर्की कर रहा है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.