अभिजीत दीपके फिर पड़े बीमार, तबीयत के बारे में बीबीसी को उनकी मां ने क्या बताया

अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ पुलिस के बल प्रयोग के लिए पीएम मोदी से माफ़ी की मांग की थी (फ़ाइल फ़ोटो)

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ पुलिस के बल प्रयोग के लिए पीएम मोदी से माफ़ी की मांग की थी (फ़ाइल फ़ोटो)
    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई. शनिवार को अपने घर पर लोगों से मिलने के दौरान उन्हें असहज़ महसूस हुआ था.

अभिजीत दीपके की मां अनीता भगवान दीपके ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया है कि टायफाइड होने के बाद से अभिजीत दीपके बीमार हैं.

उन्होंने बताया, "उन्हें बहुत तेज़ खांसी है. अभी बुख़ार नहीं है, लेकिन उन्हें कई बार उल्टी हुई थी. रविवार दोपहर के क़रीब डॉक्टर उनकी फिर से जांच लिए आ रहे हैं. फ़िलहाल डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है."

उन्होंने बताया कि शनिवार को भी डॉक्टरों ने उनकी जांच की थी. उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए डॉक्टरों की टीम महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके घर पर पहुंची थी.

अभिजीत दीपके

अनीता दीपके ने बताया कि अभी अभिजीत पहले से बेहतर हैं और बुख़ार नहीं है. फ़िलहाल वो घर पर ही आराम कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि अभिजीत से मिलने के लिए लोग लगातार उनके घर पर आ रहे हैं. शनिवार को भी उन्होंने लोगों से मुलाक़ात की थी और रविवार को भी वो फिर से लोगों से मिलेंगे.

शनिवार को डॉक्टरों ने बताया था कि दीपके का ब्लड प्रेशर थोड़ा कम है और उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत है.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद सीजेपी ने उन्हें टायफाइड होने की बात कही थी. अस्पताल में भर्ती होने की दीपके ने तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की थी.

अनशन के दौरान हुआ था टायफाइड

अभिजीत दीपके

इमेज स्रोत, @abhijeet_dipke

इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके ने एक वीडियो जारी कर 25 जुलाई को बताया था कि उन्हें टायफाइड हुआ था
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 18 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था.

इसी दिन अभिजीत दीपके ने अनशन शुरू कर दिया. इस दौरान उनकी तबियत ख़राब हो गई. उन्होंने 25 जुलाई को बताया था कि ब्लड रिपोर्ट में उन्हें टायफाइड की पुष्टि हुई है.

इस दौरान उनका इलाज़ भी किया गया था.

इसी दिन केंद्र सरकार और सीजेपी के बीच समझौता हुआ और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद जंतर-मंतर पर देर रात तक जश्न मनाने के बाद प्रदर्शकारी वापस लौट गए.

दिल्ली में प्रदर्शन समाप्त करने के बाद अभिजीत दीपके भी महाराष्ट्र में अपने घर लौट गए थे. हालांकि उसके बाद अभिजीत दीपके कुछ मौक़ों पर सक्रिय ज़रूर दिखे.

इस वीडियो में उन्होंने कहा, "कल हम सभी ने मोदी जी का वीडियो देखा, जिसमें वह कह रहे थे कि वह बच्चों को माफ़ कर रहे हैं. मुझे लगता है कि मोदी जी आज भी एक वीडियो जारी करेंगे और मैं उम्मीद करता हूं कि उस वीडियो में वह 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के लिए माफ़ी मांगेंगे."

दीपके ने आगे कहा, "पुलिस ने 12-12 साल की लड़कियों के सिर फोड़ दिए और पुरुष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के कपड़े तक फाड़ दिए. लड़कियों के निजी अंगों पर भी पुलिस ने लाठियां चलाईं. मैं चाहता हूं कि आज रात जारी होने वाले वीडियो में मोदी जी उन सभी लड़कियों से माफ़ी मांगें, जिन पर पुलिस ने इतनी बर्बरता की."

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार रात इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की, जिसमें उन्होंने कहा कि "जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने मुझे और मेरी मां को भद्दी-भद्दी गालियां दीं."

उन्होंने कहा, "बचपन ग़लतियों को सुधारने का अवसर भी होता है. ये गुमराह बच्चे हैं, इन्हें राह दिखाने का समय है, मैं इन्हें माफ़ करना चाहता हूं."

टायफाइड क्या है

अभिजीत दीपके

टायफाइड एक तरह का बुखार है जो अत्यधिक संक्रामक साल्मोनेला टाइफी (Salmonella Typhi) बैक्टीरिया से होता है. यह दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलता है.

यह बीमारी उन देशों में सबसे अधिक पाई जाती है, जहां स्वच्छता की कमी है और पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है.

हर साल अनुमानित एक करोड़ से ज़्यादा लोग टायफाइड की वजह से बीमार होते हैं.

टायफाइड से बचाव के लिए दो तरह के टीके उपलब्ध हैं. इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है, लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध इलाज को अधिक कठिन बना रहा है.

कुछ लोग बिना कोई लक्षण दिखाए लंबे समय तक इस बैक्टीरिया के वाहक बने रहते हैं और इसे दूसरों तक फैला सकते हैं.

इसी साल जनवरी में लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसि ने बताया था कि भारत में लाख़ों लोग अब भी टायफाइड से पीड़ित होते हैं.

लैंसेट के एक अध्ययन के मुताबिक़, साल 2023 में भारत में क़रीब 50 लाख लोगों को टायफाइड हुआ था.

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मोहसिन वली कहते हैं, "टायफाइड को पहले मियादी बुखार कहते थे, क्योंकि इसकी दवा नहीं थी और यह 40 दिनों की मियाद पूरी करने के बाद ठीक होता है. अब इसकी कई दवाएं और वैक्सिन भी उपलब्ध हैं."

उन्होंने बताया, "यह बीमारी मल की गंदगी से फ़ैलती है और आंतों को प्रभावित करती है. इसके संक्रमण में पहले 3-4 दिन काफ़ी अहम होते हैं. इस बीमारी की फ़ौरन डायग्नोसिस मुश्किल होती है क्योंकि इसकी पहली डायिग्नोसिस में तीन दिन का वक़्त लगता है."

एम वली कहते हैं यह बुख़ार हर दिन के साथ ऊपर चढ़ता है इसलिए इसे स्टेप लैडर फ़ीवर भी कहते हैं.

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने कई बार आरोप लगाया था जंतर-मंतर पर मौजूद टॉयलेट में पानी और बिजली की सप्लाई जानबूझकर रोकी जा रही है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.