इतने घंटे से कम या ज़्यादा नींद ली तो जल्द आ सकता है बुढ़ापा, जानें कितनी नींद है पर्याप्त

नींद में बूढ़ी महिला

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया है कि बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद लेने वाले लोगों में जल्दी बूढ़े होने के संकेत दिखाई दे सकते हैं
    • Author, रौनक भैड़ा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

रोज़ाना कितने घंटे की नींद लेना ज़रूरी है, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है. आमतौर पर 6 से 8 घंटे की नींद को पर्याप्त माना जाता है.

लेकिन अगर कोई व्यक्ति इससे काफ़ी कम या ज़्यादा सोता है, तो इसका असर उसकी सेहत और शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है.

हेल्थ जर्नल नेचर में प्रकाशित एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने पाया है कि बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद लेने वाले लोगों में जल्दी बूढ़े होने के संकेत दिखाई दे सकते हैं. इस अध्ययन के लिए कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर न्यूरोसाइंटिस्ट जनहाओ वेन और उनकी टीम ने यूके बायोबैंक के क़रीब 5 लाख लोगों के हेल्थ डेटा का अध्ययन किया.

स्टडी के मुताबिक, रोज़ाना 6 से 8 घंटे सोने वाले लोगों में कई स्वास्थ्य समस्याओं का ख़तरा कम पाया गया. वहीं, बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद लेने वाले लोगों में शरीर की उम्र बढ़ने से जुड़े संकेत अधिक देखने को मिले. हालांकि, रिसर्च यह भी साबित नहीं करती कि रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद लेने से सीधे तौर पर सेहत बेहतर होती है या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.

शोधकर्ताओं को नींद की अवधि और शरीर की उम्र बढ़ने के बीच कई मामलों में 'U आकार' का संबंध दिखाई दिया. इसका मतलब है कि सामान्य अवधि की नींद लेने वाले लोगों की स्थिति बेहतर रही, जबकि बहुत कम या बहुत ज़्यादा सोने वालों में उम्र बढ़ने से जुड़े संकेत अधिक पाए गए.

हालांकि, रिसर्च में यह भी सामने आया कि शरीर के सभी अंगों के लिए नींद की एक जैसी अवधि ज़रूरी नहीं है. मसलन, दिल की सेहत के लिए 6 घंटे की नींद बेहतर पाई गई, जबकि दिमाग़ के लिए 8 घंटे की नींद बेहतर पाई गई.

क्या नींद की अवधि से लोगों की उम्र बढ़ने का ताल्लुक़ है, या उम्र बढ़ने की वजह से उनकी नींद प्रभावित होती है? इसके जवाब में रिसर्चर कहते हैं, "मेरी राय में दोनों का एक-दूसरे पर असर होता है."

यानी नींद स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और दूसरी ओर स्वास्थ्य में बदलाव भी व्यक्ति की नींद की अवधि को प्रभावित कर सकते हैं.

उम्र पर निर्भर करती है स्लीप साइकिल

सोती हुई बच्ची

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जन्म के समय एक बच्चा क़रीब 18 से 20 घंटे तक सो सकता है

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ प्रतीक किशोर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहते हैं कि उम्र का नींद से सीधा संबंध है. जवान लोगों की नेचुरल स्लीप साइकिल 6 से 8 घंटे की होती है, जबकि बुज़ुर्ग लोगों की नींद की अवधि कम हो जाती है.

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ ज्योति शर्मा भी इससे इत्तेफाक रखती हैं. उनके मुताबिक़, जन्म के समय एक बच्चा क़रीब 18 से 20 घंटे तक सो सकता है. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ नींद की यह अवधि कम होती जाती है. वयस्कों के लिए 6 से 8 घंटे की नींद को पर्याप्त माना जाता है.

"अगर नींद इससे कम या बहुत ज़्यादा हो, तो इसका असर शरीर के अलग-अलग ऑर्गन की परफ़ॉर्मेंस पर पड़ सकता है."

कम या ज़्यादा नींद से शरीर से बूढ़ा हो सकता है?

सोता हुआ बूढ़ा व्यक्ति

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक स्टडी में पाया गया कि पर्याप्त नींद न लेने से बुज़ुर्ग लोगों की कोशिकाओं में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

नींद के दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोन और एंज़ाइम सक्रिय होते हैं, जो शरीर की मरम्मत में मदद करते हैं. डॉक्टर प्रतीक किशोर के मुताबिक़, पर्याप्त नींद न लेने पर शरीर में सूजन यानी इन्फ़्लेमेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यह स्थिति धमनियों में रुकावट पैदा कर सकती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ सकता है.

"इसके अलावा, नींद की कमी ब्लड शुगर के लेवल को प्रभावित कर सकती है, जिससे किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं."

नेचर में प्रकाशित रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है कि कम या ज़्यादा नींद लेने से शरीर से ऑर्गन्स पर प्रभाव पड़ता है, जिससे शरीर ज़ल्दी बूढ़ा होने की दिशा में बढ़ सकता है. हालांकि, बीबीसी इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

नींद की कमी और उम्र बढ़ने के बीच संबंध को लेकर पहले भी रिसर्च सामने आ चुकी हैं. लॉस एंजिल्स के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक स्टडी में पाया गया कि सिर्फ़ एक रात पर्याप्त नींद न लेने से बुज़ुर्ग लोगों की कोशिकाओं में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है. रिसर्च में नींद की कमी को कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया.

इस स्टडी में 61 से 86 साल की उम्र के 29 बुज़ुर्ग लोगों को शामिल किया गया था. रिसर्च के दौरान उन्हें चार रातों तक अलग-अलग तरह की नींद दी गई. इसमें एक रात उनकी नींद रात 3 बजे से सुबह 7 बजे तक यानी सिर्फ़ 4 घंटे कर दी गई.

शोधकर्ताओं ने हर सुबह इन लोगों के ब्लड सैंपल लिए और उनमें होने वाले बदलावों का अध्ययन किया. इसमें पाया गया कि कम नींद के बाद शरीर की कुछ कोशिकाओं में ऐसे बदलाव हुए, जो कोशिकाओं को नुक़सान पहुंचने और उनके समय से पहले बूढ़ा होने की प्रक्रिया से जुड़े थे.

इस स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के कजिन्स सेंटर फॉर साइकोन्यूरोइम्यूनोलॉजी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ जूडिथ कैरोल ने कहा, "बुज़ुर्ग लोगों में सिर्फ़ एक रात पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में ऐसे महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल बदलाव हो सकते हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं."

नींद से जुड़े हैं दिल-दिमाग़ के तार

डॉ ज्योति शर्मा

नींद की कमी का असर सिर्फ़ शरीर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग़ पर भी पड़ सकता है.

डॉ ज्योति शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "मस्तिष्क एक कंप्यूटर की तरह काम करता है, जो नींद के दौरान भी सक्रिय रहता है. इस दौरान वह दिनभर की यादों को व्यवस्थित करने यानी मेमोरी कंसोलिडेशन का काम करता है. साथ ही, नींद के दौरान दिमाग में जमा गंदगी और बेकार पदार्थ भी साफ़ होते हैं."

मस्तिष्क और हृदय एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. डॉ प्रतीक किशोर के मुताबिक, मस्तिष्क शरीर की कई गतिविधियों को नियंत्रित करता है. अगर उसे पर्याप्त रिकवरी का समय नहीं मिलता, तो इसका असर हृदय के काम करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है.

सोती हुई महिला

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, विशेषज्ञों के मुताबिक़ बिस्तर पर सिर्फ़ लेटने के बजाय क्वालिटी स्लीप ज़्यादा अहम होती है

डॉ प्रतीक किशोर कहते हैं, "केवल बिस्तर पर बिताए गए घंटों से ज़्यादा महत्वपूर्ण क्वालिटी स्लीप है. यानी कोई व्यक्ति 8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद अगर बार-बार जागता है या उसकी नींद बाधित होती रहती है, तो उसे पर्याप्त आराम नहीं मिल सकता."

अक्सर लोग खर्राटों को गहरी नींद का संकेत मानते हैं, जबकि यह ज़रूरी नहीं है. डॉ ज्योति शर्मा के मुताबिक़, खर्राटे आने का मतलब यह हो सकता है कि नींद बार-बार बाधित हो रही है.

इसी तरह ज़रूरत से ज़्यादा सोना भी ख़राब स्लीप क्वालिटी का संकेत हो सकता है. इससे तनाव का स्तर बढ़ सकता है और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है. साथ ही, कुछ मामलों में स्ट्रोक या दिल के दौरे का जोखिम भी बढ़ सकता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया की डॉ क्रिस्टीन याफे के मुताबिक़, दिमाग़ की सेहत बनाए रखने के लिए नियमित समय पर सोना-जागना, एक्सरसाइज़ करना, सोने से पहले कैफ़ीन और अल्कोहल से बचना और रिलैक्सेशन तकनीकों का इस्तेमाल मददगार हो सकता है.

डॉ ज्योति शर्मा नींद की तुलना मोबाइल की चार्जिंग से करती हैं. जिस तरह बिना चार्ज किए मोबाइल ठीक से काम नहीं कर सकता, उसी तरह पर्याप्त नींद न मिलने पर दिमाग़ अगले दिन प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाता.

कैसे पता करें कि आपके लिए कितनी नींद ज़रूरी है?

सोता हुआ व्यक्ति

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, कई दफ़ा जागने के बाद शरीर दर्द करता है, जो इस बात का संकेत है कि आपने क्वालिटी स्लीप नहीं ली

हर व्यक्ति की नींद की ज़रूरत अलग हो सकती है. डॉ ज्योति शर्मा के मुताबिक़, इसे समझने का एक तरीका यह है कि किसी दिन बिना अलार्म लगाए सोएं और देखें कि शरीर प्राकृतिक रूप से कब जागता है.

"अगर जागने के बाद आप तरोताज़ा और एक्टिव महसूस करते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके शरीर को उतनी नींद पर्याप्त लग रही है."

कई दफ़ा जागने के बाद शरीर दर्द करता है या सिर में भी दर्द होने लगता है, ये क्या संकेत है?

इसके जवाब में डॉ ज्योति शर्मा कहती हैं, "यह स्पष्ट संकेत है कि आपने भले नींद ली हो, लेकिन ये क्वालिटी स्लीप नहीं थी. मुमकिन है कि आपकी नींद बीच में टूटी हो या आप कंफर्टेबली नहीं सो पाए हैं."

हालांकि, अगर लगातार नींद से जुड़ी परेशानी रहती है, बहुत ज्यादा खर्राटे आते हैं या पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिनभर थकान रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.