लाइव, डोनाल्ड ट्रंप के इस फ़ैसले से नाराज़ हुआ अमेरिकी मीडिया, उठाया ये क़दम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कुछ मीडिया आउटलेट्स (सीएनएन, एमएस नाऊ और पॉलिटिको) को व्हाइट हाउस से 'बैन' कर दिया था.

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रौनक भैड़ा

  1. डोनाल्ड ट्रंप के इस फ़ैसले से नाराज़ हुआ अमेरिकी मीडिया, उठाया ये क़दम

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका के प्रमुख मीडिया आउटलेट्स ने व्हाइट हाउस की ‘टीवी पूल’ कवरेज नहीं करने का फ़ैसला किया.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कुछ मीडिया आउटलेट्स (सीएनएन, एमएस नाऊ और पॉलिटिको) को व्हाइट हाउस से 'बैन' कर दिया था.

    अमेरिका के प्रमुख मीडिया आउटलेट्स ने व्हाइट हाउस की ‘टीवी पूल’ कवरेज नहीं करने का फ़ैसला किया.

    दरअसल, ‘टीवी पूल’ कवरेज एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके के तहत अलग-अलग मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कवरेज साझा करते हैं, जिससे संसाधनों की बचत होती है.

    फ़ॉक्स न्यूज़ के वॉशिंगटन ब्यूरो प्रमुख ब्रायन बॉटन ने एक ईमेल में कहा, "सोमवार से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन कार्यक्रमों की कवरेज के लिए टीवी पूल काम नहीं करेगा, जिन्हें पूल कवरेज के तौर पर निर्धारित किया गया है."

    ईमेल में कहा गया कि व्हाइट हाउस ने ट्रंप की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान सीएनएन को अपनी कवरेज की ज़िम्मेदारी निभाने से रोक दिया था. इसके बाद टीवी नेटवर्क ने पूल कवरेज बंद करने का फ़ैसला किया. ईमेल में यह भी कहा गया कि इसकी जगह कोई नई पूल टीम नहीं बनाई जाएगी.

    एबीसी, सीबीएस, सीएनएन, फ़ॉक्स न्यूज़ और एनबीसी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, "लोगों के लिए अपनी सरकार के बारे में सही और स्वतंत्र जानकारी पाना बहुत ज़रूरी है. किसी भी प्रशासन को किसी समाचार संस्था की ख़बरों से असहमति होने के कारण उसे रीस्ट्रिक्ट नहीं करना चाहिए."

    ये पांचों नेटवर्क उन प्रमुख अमेरिकी टीवी संस्थानों में शामिल हैं, जिनके पास व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण करने के लिए ज़रूरी वित्तीय संसाधन और तकनीकी ढांचा है.

    कई अन्य अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने भी पूल के तहत होने वाले कार्यक्रमों की कवरेज में शामिल नहीं होने की घोषणा की. न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट समेत कुछ संस्थानों ने सोमवार को ट्रंप के कार्यक्रमों की तस्वीरें साझा नहीं करने की बात कही.

  2. जमुई में छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में बोलीं ममता बनर्जी, 'वीडियो देख कर मैं बहुत ग़ुस्से में हूं'

    ममता बनर्जी

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    इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की मांग की है (फ़ाइल फ़ोटो)

    बिहार के जमुई में छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है.

    ममता बनर्जी ने पुलिस कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि मॉरल पुलिसिंग के नाम पर क़ानून हाथ में लेना जायज़ नहीं है.

    ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट किया, "बिहार का यह वीडियो दिल दहला देने वाला है. चौंकाने वाला है. और सच कहूँ तो, इससे मुझे बहुत ग़ुस्सा आया है. मॉरल पुलिसिंग के नाम पर क़ानून हाथ में लेने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए. कोई भी समाज भीड़ को यह तय करने की इजाज़त नहीं दे सकता कि किसे सम्मान मिलना चाहिए, किसे आज़ादी मिलनी चाहिए या किसे सज़ा मिलनी चाहिए."

    "उन छोटे बच्चों से कहना चाहती हूँ- मुझे माफ़ कर देना. मैं आपसे माफ़ी माँगती हूँ. क्योंकि कहीं न कहीं, किसी तरह, हम एक देश के तौर पर आपको बचाने में नाकाम रहे. हम आपकी रक्षा नहीं कर पाए. संस्थाओं और समाज पर आपने जो भरोसा किया था, हम उस भरोसे को क़ायम नहीं रख पाए."

    उन्होंने कहा, "एक राजनीतिक दोहरापन है, जिसे हम नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते. बीजेपी के नेता उन राज्यों में न्याय की माँग करते हैं, जहाँ उनकी सरकार नहीं है. लेकिन जहाँ उनकी सरकार है, वहाँ वे अन्याय का ज़रिया बन जाते हैं. भारत, अब जाग जाओ."

    दूसरी ओर, बिहार पुलिस की एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के. सुहिता अनुपम ने बताया कि तीन नाबालिग किशोरों को हिरासत में लिया गया है, इस घटना में दो और लोगों की भूमिका का पता चला है.

    क्या है मामला

    दरअसल, बिहार के जमुई का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें दिख रहा है कि नाबालिग़ छात्र-छात्रा एक स्कूटर पर बैठे हुए हैं और युवकों की भीड़ ने उन्हें घेर रखा है.

    इसी दौरान छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न किया जा रहा है. वहीं छात्र युवकों के समूह से छात्रा को बचाने की कोशिश कर रहा है.

    इस वायरल वीडियो को लेकर जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने मीडिया से बात की है.

    उन्होंने कहा, "आज सुबह (21 सितंबर) को एक वीडियो संज्ञान में आया था जिसमें दो नाबालिग स्टूडेंट के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है. वीडियो के आधार पर ही हमने विक्टिम की पहचान की, उनका बयान रिकॉर्ड किया गया और उसी से पता चला कि ये घटना 19 सितंबर को शाम सात बजे के आसपास की है. जिसमें ये लड़का और लड़की कोचिंग के लिए गए हुए थे."

    "उसी दौरान वो उस क्षेत्र में फ़ोटोशूट करने गए थे जहां पर ये घटना हुई है. ये जमुई थानाक्षेत्र की घटना है. अभियुक्तों की पहचान हो गई है और क़ानूनी कार्रवाई कर रहे हैं. जल्द ही इस मामले में गिरफ़्तारी हो जाएगी. पीड़ितों ने कोई भी आधिकारिक शिकायत नहीं दी थी लेकिन जब आज उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने आवेदन दिया जिस पर एफ़आईआर दर्ज की है."

    "छह-सात लोग वायरल वीडियो के फ्रेम में दिख रहे हैं. एफ़आईआर में किसी का नाम नहीं है और जांच से ही अभियुक्तों की पहचान की गई है."

  3. हूती हमलों के बीच सऊदी अरब की मदद के लिए आगे आया ब्रिटेन

    ब्रिटिश आर्मी

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    इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बताया कि ब्रिटेन ने सऊदी अरब के अनुरोध को स्वीकार किया है (फ़ाइल फ़ोटो: ब्रिटिश आर्मी)

    ब्रिटेन सऊदी अरब को यमन के हूतियों के हमलों के मद्देनज़र 'डिफ़ेंसिव एयर-टू-एयर रिफ़्यूलिंग' की मदद देगा. प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि सऊदी अरब की ओर से सैन्य सहायता के अनुरोध के बाद यह फ़ैसला लिया गया है.

    डिफ़ेंसिव एयर-टू-एयर रिफ़्यूलिंग का मतलब है कि एक सैन्य विमान हवा में उड़ते हुए दूसरे सैन्य विमान को ईंधन देता है, ताकि वह लंबे समय तक हवा में रह सके और उसे बार-बार एयरबेस लौटकर ईंधन भरने की जरूरत न पड़े

    माना जा रहा है कि यह मदद आने वाले कुछ दिनों में शुरू हो सकती है. इसके तहत ब्रिटेन का एक वॉयेज़र विमान तैनात किया जाएगा, जो साइप्रस स्थित आरएएफ अक्रोटिरी से ऑपरेट करेगा.

    प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग और विदेश मंत्री एड मिलिबैंड की सलाह के बाद सऊदी अरब के अनुरोध को स्वीकार किया है.

    सरकार के अधिकारियों ने कहा कि यह मदद सीमित समय के लिए होगी और शुरुआत में कुछ हफ़्तों तक इसके जारी रहने की संभावना है.

    गौरतलब है कि यमन में हूती विद्रोही वहां की मान्यता प्राप्त सरकार के ख़िलाफ़ गृहयुद्ध में शामिल हैं. सऊदी अरब इस सरकार का समर्थन करता है.

    हाल के दिनों में यमन के हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाया था. इसके अलावा, उन्होंने लाल सागर के तट पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को भी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने का दावा किया था.

  4. पाकिस्तान: इमरान ख़ान की पार्टी के एक बड़े नेता का 'अपहरण', अज़ीज़ुल्लाह ख़ान, बीबीसी उर्दू, पेशावर

    प्रांतीय मंत्री फ़ज़ल शकूर ख़ान

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) पार्टी से जुड़े हैं फ़ज़ल शकूर ख़ान (फ़ाइल फ़ोटो)

    पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के प्रांतीय मंत्री फ़ज़ल शकूर ख़ान के कथित अपहरण का मामला सामने आया है.

    प्रांतीय सरकार ने दावा किया है कि पेशावर में अज्ञात लोगों ने फ़ज़ल शकूर ख़ान का अपहरण कर लिया.

    पेशावर में सोमवार को पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी ने आरोप लगाया कि फ़ज़ल शकूर ख़ान को सादे कपड़ों में आए लोगों ने अगवा किया. उन्होंने दावा किया कि मंत्री के वाहन पर गोलीबारी भी की गई.

    मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर किसी को लगता है कि इस तरह की कार्रवाई से हमारा आंदोलन कमजोर हो जाएगा, तो ऐसा नहीं होगा."

    पीटीआई ने एक अन्य प्रांतीय मंत्री शकील अहमद के साथ भी रविवार को इसी तरह की घटना होने का दावा किया गया है. पार्टी के मुताबिक़, शकील अहमद के कथित अपहरण की कोशिश के दौरान भी गोलीबारी हुई, लेकिन वह मौके से बच निकलने में कामयाब रहे.

    इन दोनों घटनाओं को लेकर ख़ैबर पख़्तूनख़्वा विधानसभा का सोमवार शाम आपात सत्र बुलाया गया. रिपोर्ट लिखे जाने तक विधानसभा की कार्यवाही जारी थी.

    फ़ज़ल शकूर ख़ान के सचिव मुहम्मद आलम ने बीबीसी उर्दू को बताया कि इस घटना को लेकर चामकनी थाने में मामला दर्ज किया गया है.

    बीबीसी ने घटना के संबंध में पेशावर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की और उन्हें सवाल भी भेजे, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने तक पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था.

  5. अमेरिका के एलान के बाद इन देशों ने ईरानी एयरलाइंस की एंट्री पर लगाई रोक

    ईरानी एयरलाइन

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका के एलान के बाद ईरान की विमानन कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की है कि 23 सितंबर से दुनियाभर में ईरानी एयरलाइंस के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया जाएगा.

    इसके बाद तुर्की, इराक और जॉर्जिया ने ईरानी एयरलाइंस को अपने-अपने देश में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है.

    एएफ़पी की रिपोर्ट के मुताबिक़, इराक़ के दो अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि अमेरिकी ट्रेज़री विभाग की घोषणा के बाद इराक़ ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को निलंबित करेगा.

    इसके बाद जॉर्जिया ने भी ईरानी एयरलाइंस के अपने क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया.

    इससे पहले शनिवार को ईरानी एयरलाइन महान एयर ने घोषणा की थी कि तुर्की सरकार के अनुरोध पर उसने तुर्की के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं. कंपनी ने बताया था कि तुर्की की ओर से उसे उड़ानें रोकने के लिए कहा गया था.

    गौतलब है कि क़रीब दो सप्ताह पहले अमेरिकी ट्रेज़री विभाग ने 27 ईरानी एयरलाइंस को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया था. इसके बाद अब ईरान की विमानन कंपनियों पर दबाव और बढ़ गया है.

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