अमेरिका में पंजाब पुलिस का इंस्पेक्टर वॉन्टेड, पूरा मामला

इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह

इमेज स्रोत, Pradeep Sharma

इमेज कैप्शन, इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए ख़ारिज कर दिया
    • Author, शकील अख़्तर
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

अमेरिकी न्याय विभाग के जांचकर्ताओं ने एक बड़े ऑपरेशन में भारत में स्थित आपराधिक गिरोहों से जुड़े 24 अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. उन्होंने इन पर आरोप पत्र दाखिल करने की घोषणा की है.

कैलिफ़ोर्निया में एक न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस में इन गिरफ़्तारियों की घोषणा की गई. इसके साथ ही न्याय विभाग के अधिकारी बिल एसेली ने पंजाब के एक पुलिस अफ़सर के रंगदारी (एक्सटॉर्शन) में शामिल होने का भी आरोप लगाया.

एसेली ने बताया कि भारत के पंजाब के होशियारपुर ज़िले के टांडा क़स्बे के एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह के सदस्यों की मदद ली.

उन्होंने अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय परिवार को धमकी दी कि अगर उन्होंने चार लाख डॉलर (क़रीब 3 करोड़ 80 लाख रुपए) नहीं दिए, तो वे पंजाब में उनके परिवार को हत्या के झूठे मामले में फंसा देंगे.

उन्होंने कहा कि नागरा ने शुरुआत में इस परिवार से ज़्यादा पैसों की मांग की थी. लेकिन बाद में यह मामला चार लाख डॉलर पर तय हुआ.

एसेली ने न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस में कहा कि यह पुलिस अफ़सर अभी अमेरिका की हिरासत में नहीं है. लेकिन उन्हें हिरासत में लिया जाएगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन पर मुक़दमा चलाने के लिए उन्हें भारत से अमेरिका लाया जाएगा.

भारतीय सरकार ने इस बारे में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन पंजाब पुलिस ने गुरिंदरजीत सिंह नागरा को एसएचओ के पद से निलंबित कर दिया.

जालंधर क्षेत्र के डीआईबी दफ़्तर से एक बयान जारी हुआ. इस बयान के मुताबिक़ नागरा को रंगदारी के मामले की जांच के सिलसिले में निलंबन के बाद पुलिस लाइन भेज दिया गया.

इस बयान में कहा गया कि पंजाब पुलिस ने मीडिया की ख़बरों और सोशल मीडिया पोस्ट्स का संज्ञान लिया. उन्होंने नागरा को तुरंत टांडा के एसएचओ पद से हटा दिया. इसके बाद उन्हें होशियारपुर की पुलिस लाइन भेज दिया गया.

हत्या के झूठे मामले में फंसाने का आरोप

इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह

इमेज स्रोत, Pradeep Sharma

इमेज कैप्शन, विपक्षी दलों ने इस मामले पर नाराज़गी जताई है
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर (Dinbhar)

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

एपिसोड

समाप्त

पुलिस के बयान में आगे कहा गया कि डीआईजी ने एक पुलिस अधीक्षक (एसपी) के नेतृत्व में इस मामले की औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं.

जांच अफ़सर को निर्देश दिया गया है कि वे सभी आरोपों और तथ्यों की जांच करें. इसके बाद वे जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें. इस जांच के बाद अगर ज़रूरत पड़ी, तो कानून के मुताबिक़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

एफ़बीआई ने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया की ज़िला अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है.

इस आरोप पत्र के मुताबिक़ नागरा ने अप्रैल और जून के बीच लॉस एंजिल्स काउंटी में मकान ख़रीदने की कोशिश की थी.

एफ़बीआई रिपोर्ट में कहा गया कि गैंगस्टर भगवानपुरिया भारत की एक जेल से अपनी आपराधिक गतिविधियां चलाता है. उसकी मदद से गुरिंदरजीत सिंह नागरा ने अमेरिका में रहने वाले एक परिवार को भारत में हत्या के एक झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी.

आरोप पत्र के मुताबिक़ इस परिवार से केस में न फंसाने के लिए चार लाख डॉलर की रकम मांगी गई थी.

गैंगस्टर भगवानपुरिया के ख़िलाफ़ पंजाब और दूसरे राज्यों में हत्या, हत्या के प्रयास और दूसरे अपराधों में एक सौ से ज़्यादा मामले दर्ज हैं.

वह पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी एक अभियुक्त है. मार्च 2025 में उसे बठिंडा की सेंट्रल जेल से असम की सिलचर सेंट्रल जेल भेज दिया गया था.

टांडा, जालंधर-पठानकोट हाईवे पर स्थित एक छोटा सा क़स्बा है. इसी साल 15 जनवरी को यहां के एक गांव मियानी में बलविंदर सिंह नाम के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

एफ़बीआई के केस का संबंध भी हत्या के इसी मामले से है. आरोप पत्र के मुताबिक़ इसी मामले में पुलिस इंस्पेक्टर ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवार को फंसाने की धमकी दी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस अब वैश्विक स्तर पर शर्मिंदगी का कारण बन गई है.

स्थानीय मीडिया की ख़बरों के मुताबिक़ इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद कहकर ख़ारिज कर दिया.

उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उन्हें इस मामले के बारे में सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ख़बरों से पता चला. उन्हें जांच एजेंसियों से अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित