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'अग्निवीर नियमित सैनिकों की तरह लाभ का दावा नहीं कर सकते' केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में और क्या कहा
- Author, अल्पेश करकरे
- पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि चूंकि अग्निवीर नियमित सैनिकों की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए युद्ध या सैन्य कार्रवाई में उनकी मृत्यु होने पर उनके परिवार नियमित सैनिकों के समान पेंशन लाभ का दावा नहीं कर सकते हैं.
केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में यह स्पष्टीकरण ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए अग्निवीर मुरली नाइक की मां की याचिका के जवाब में दायर एक हलफ़नामे में दिया.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल, 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मुरली नाइक की मां की याचिका पर जवाब देने में देरी के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी और भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी थी.
केंद्र सरकार ने इसके बाद ज्योतिबाई नाइक द्वारा दायर याचिका के जवाब में 6 मई, 2026 को एक हलफ़नामा पेश किया.
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हलफ़नामे में क्या लिखा है?
हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि नियमित सैनिकों और अग्निवीरों का वर्गीकरण संवैधानिक रूप से वैध है. 'अग्निवीर योजना' एक अल्पकालिक भर्ती योजना है जिसे वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
हलफ़नामे में स्पष्ट किया गया है कि अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल है. अग्निवीरों और नियमित सैनिकों की स्थिति एक जैसी नहीं है.
'नियमित सैनिकों को मिलने वाली पेंशन और अन्य लाभ उनकी सेवा अवधि से जुड़े होते हैं. इसलिए, इन दो अलग-अलग श्रेणियों के व्यक्तियों के बीच समानता संभव नहीं है.'
यह वर्गीकरण अग्निवीर योजना के उद्देश्यों के अनुरूप है और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत वैध है. इसलिए, संविधान में समानता के अधिकार का कोई उल्लंघन नहीं है, क्योंकि सशस्त्र बलों के लिए एक अलग क़ानूनी व्यवस्था है.
हलफ़नामें कें कहा गया है कि नियमित सैनिकों को मिलने वाले पेंशन लाभ या अन्य पारिश्रमिक केवल दीर्घकालिक सेवारत सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए आरक्षित हैं. अग्निशामकों को 'अग्निपथ योजनाओं' के तहत देय सभी वित्तीय और सेवा समाप्ति लाभ दिए जाते हैं.
'अग्निपथ योजना' में नियुक्ति के लिए नियम बनाए गए हैं. इन नियमों में पेंशन या अन्य लाभों का प्रावधान नहीं है. हलफ़नामे में कहा गया है कि शहीदों के लिए एक राशि निर्धारित की गई है और उन्हें उचित सम्मान दिया जाता है.
इसके अलावा, हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने सूचित किया है कि दिवंगत अग्निवीर मुरली नाइक को 2.3 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया गया है. हलफ़नामे में यह भी कहा गया है कि उन्हें 'युद्ध में मारे गए' घोषित किया गया है और सशस्त्र बलों में 'शहीद' शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है.
मुरली नाइक का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया और नियमित सैनिकों की तरह, उनके परिवार को रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफ़िसर की ओर से एक शोक पत्र दिया गया है.
इसके अलावा, नाइक परिवार को अग्निपथ योजना के तहत मिलने वाले सभी वित्तीय और समाप्ति लाभ दिए गए हैं. लगभग 2.3 करोड़ रुपये का मुआवज़ा, बीमा कवर और अन्य मुआवज़ा भी दिया गया है.
साथ ही, अन्य अग्निवीरों के मामलों में उठे विवादों का भी इस हलफ़नामे में उल्लेख किया गया है. अग्निवीरों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अतीत में दिए गए निर्णयों और तर्कों का भी इस हलफ़नामे में उल्लेख किया गया है.
इसलिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत हलफ़नामे पर मुरली नाइक की मां और उनके वकील अब क्या तर्क देते हैं. नाइक परिवार के वकीलों ने कहा है कि इस हलफ़नामे का विधिवत क़ानूनी अध्ययन किया जाएगा और अदालत में इस पर बहस की जाएगी.
इस मामले की अगली सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में 18 जून, 2026 को होगी.
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार क्यों लगाई?
अग्निवीर मुरली नाइक की पिछले साल मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जम्मू-कश्मीर में हुई गोलीबारी में मौत हो गई थी.
उनकी मां ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि युद्ध में 'शहीद' हुए नियमित सैनिकों की तरह ही उन्हें भी मरणोपरांत लाभ दिए जाएं.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल को सुनवाई के दौरान याचिका पर जवाब देने में देरी के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी और भारी जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी.
न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और हितेन वेनेगांवकर की पीठ ने केंद्र सरकार को इस याचिका के जवाब में हलफ़नामा दाखिल करने के लिए 6 मई तक का समय दिया था.
अदालत ने गौर किया कि पिछले साल दिसंबर में और फिर जनवरी में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया.
न्यायमूर्ति घुगे ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी, "यह याचिका पिछले साल से लंबित है. याचिकाकर्ता ने पिछले साल जुलाई में सरकार को लिखे पत्र में याचिका में उठाए गए मुद्दों पर टिप्पणी की है. हलफ़नामे में जवाब दाखिल करना ज़रूरी है. यदि अगली तारीख तक जवाब और हलफ़नामा दाखिल नहीं किया गया, तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे."
अदालत ने यह भी कहा कि आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा.
याचिका में क्या कहा गया है?
मुरली नाइक की मां ने वकील संदेश मोरे, हेमंत घडीगांवकर और हितेंद्र गांधी के माध्यम से दायर याचिका में तर्क देते हुए कहा, "अग्निवीर नियमित सैनिकों की तरह कर्तव्य निभाते हैं और उन्हीं ख़तरों का सामना करते हैं, फिर भी इस अल्पकालिक भर्ती कार्यक्रम के तहत भर्ती किए गए लोगों के परिवारों को दीर्घकालिक पेंशन और अन्य कल्याणकारी लाभों से वंचित रखा जाता है."
याचिका में यह भी कहा गया है कि "सरकार द्वारा शुरू की गई अग्निपथ योजना स्पष्ट रूप से अग्निवीरों को सेवा-पश्चात पेंशन और अन्य दीर्घकालिक कल्याणकारी लाभों से वंचित करती है जो आमतौर पर नियमित सैनिकों को उपलब्ध होते हैं."
इस याचिका के अनुसार, यह कहा गया था कि नाइक परिवार को लगभग एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि मिली, लेकिन उन्हें नियमित पारिवारिक पेंशन या कोई अन्य लाभ नहीं मिला.
याचिका में सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि सेवा के दौरान 'शहीद' हुए अग्निवीरों के परिवारों को पेंशन, संस्थागत मान्यता और कल्याणकारी उपायों सहित समान मरणोपरांत लाभ प्रदान किए जाएं.
यह भी मांग की गई कि संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया जाए कि ये लाभ उसके परिवार के सदस्यों को भी प्रदान किए जाएं.
याचिका में कहा गया है कि नाइक को जून 2023 में अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती किया गया था.
उनकी मृत्यु के बाद, उनकी मां ने कई अधिकारियों को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि उनके परिवार को उन लाभों के समान लाभ प्राप्त हों जो कर्तव्य की राह में मारे गए आम सैनिकों के परिवारों को प्रदान किए जाते हैं.
याचिका में कहा गया है कि उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.
याचिका में आगे कहा गया कि हालांकि पूरी अग्निपथ योजना की वैधता को चुनौती नहीं दी गई थी, लेकिन यह पहल 'भेदभावपूर्ण' थी और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती थी.
मुरली नाइक कौन थे?
अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए मुरली श्रीराम नाइक (उम्र 23 वर्ष) की पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के उरी में थी.
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान, पाकिस्तान ने 8 मई की रात को पंजाब, राजस्थान और गुजरात में भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिकों को निशाना बनाने का प्रयास किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा, श्रीनगर, जम्मू और पठानकोट भी शामिल थे. हमले में मुरली नाइक की मौत हो गई थी.
उनकी मृत्यु की खबर मिलने के बाद बीबीसी मराठी ने मुरली नाइक के मामा लक्ष्मण नाइक से बात की.
बेहद दुखी लक्ष्मण नाइक ने कहा था, "हमारे परिवार का हंसमुख बेटा देश के लिए लड़ा. हमारा पूरा परिवार उस पर गर्व करता है. हालांकि, मुरली की मृत्यु के साथ ही परिवार ने अपना सहारा खो दिया है."
उन्होंने आगे कहा, "मुरली बहुत शांत और बुद्धिमान था और कम उम्र में ही राष्ट्रीय सेवा में शामिल हो गया था. परिवार को खुशी थी कि वह सैन्य सेवा में शामिल हो गया था. लेकिन अभी उनके जाने का समय नहीं था. घर पर सिर्फ उनके माता-पिता ही हैं. अब उनका कोई नहीं है, उनका क्या होगा? "
मुरली नाइक का परिवार आंध्र प्रदेश के सत्यसाई जिले के गोरंटला तालुका के कल्की टांडा से आता है. उनके पिता श्रीराम नाइक और माता ज्योतिबाई नाइक काम के सिलसिले में मुंबई आए थे.
वे मुंबई के घाटकोपर के कामराज नगर इलाके में रहते थे. श्रीराम नाइक मुंबई में अकुशल मजदूर के रूप में काम करते थे, जबकि उनकी मां ज्योतिबाई घर का काम करती थीं.
मुरली नाइक का जन्म 23 अक्तूबर 2000 को मुंबई के राजावाड़ी अस्पताल में हुआ था. उन्होंने आंध्र प्रदेश से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी.
'हम अनाथ हो गए'
मुरली के पिता श्रीराम नाइक ने कहा था, "सुबह 9 बजे एक अधिकारी ने फोन किया. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी गोलीबारी में गोली लगने से मुरली की मौत हो गई है."
उन्होंने कहा, "हम मुंबई में रहते थे. मुरली तीन महीने पहले घर आया था. 20 दिन बाद वह वापस ड्यूटी पर चला गया. बेटे ने देश के लिए लड़ाई लड़ी. हमारा इकलौता बेटा था, हम उस पर निर्भर थे. अब वह चला गया, मैं और मेरी पत्नी अनाथ हो गए हैं."
"मेरी बस एक ही इच्छा है. मेरे बेटे की एक प्रतिमा ज़िले में स्थापित की जाए. मुझे खुशी होगी अगर कोई उसे मुझे नमस्कार करते हुए देखे."
मुरली की मां ज्योतिबाई ने कहा, "कल उसने मुझसे वीडियो कॉल पर बात की. उसने, 'क्या तुम ठीक हो? क्या तुमने खाना खा लिया?' लेकिन मेरा इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है," यह कहते हुए वह फूट-फूटकर रोने लगीं.
सेना में अग्निवीर
मुरली नायक को दिसंबर 2022 में अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती किया गया था. इसके बाद, उन्होंने नासिक के देवलाली में नौ महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रशिक्षण के बाद, उनकी पहली पोस्टिंग असम में हुई थी.
असम में कुछ महीने सेवा करने के बाद उनकी पोस्टिंग पंजाब में की गई थी. कुछ दिन पहले ही उनकी तैनाती कश्मीर में हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.