फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल: मेसी ने कैसे आख़िरी मिनटों में इंग्लैंड के सपनों पर पानी फेर दिया

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"अर्जेंटीना, लियो के आख़िरी गोल के लिए, मैं तुम्हें लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनते देखना चाहता हूँ."
2026 के फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के दौरान अर्जेंटीना के प्रशंसकों का यह गीत हर जगह और हर समय गूंजता रहा है. सबसे मुश्किल पलों में भी उन्होंने इसी गीत से अपनी टीम का हौसला बढ़ाया.
और इस वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना को कई मुश्किल दौर से गुज़रना पड़ा है.
ताजा मिसाल बुधवार का सेमीफाइनल है. टीम 85वें मिनट तक 0-1 से पीछे थी, तभी एंजो फर्नांदेज़ ने शानदार गोल कर स्कोर बराबर कर दिया.
अटलांटा स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों का उत्साह देखते ही बनता था.
वही जोश मैदान पर भी अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में भी दिखाई दिया. लगातार हमलों के बीच 92वें मिनट (इंजरी टाइम) में लॉतारो मार्टिनेज़ ने विजयी गोल दागकर अर्जेंटीना को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.
इस नाटकीय जीत के साथ अर्जेंटीना ने फ़ाइनल में जगह बना ली, जहाँ अगले रविवार को उसका सामना स्पेन से होगा. अर्जेंटीना की टीम लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने की कोशिश करेगी.
मैच के बाद कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा, "हम अलग हैं. यह अहंकार नहीं, दिल की ताक़त है. इन खिलाड़ियों ने जो किया, वह अविश्वसनीय है."
लियोनेल मेसी की अगुआई वाली अर्जेंटीना की यह टीम, जिसके कप्तान अब तक आठ गोल कर चुके हैं, हर बार मुश्किल हालात में वापसी करने का रास्ता निकालने में कामयाब रही है.
ऐसे ही मौक़ों पर अर्जेंटीना में फुटबॉल का जुनून सबसे ज़्यादा दिखाई देता है. साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि बाक़ी 25 खिलाड़ी मेसी को उनके संभावित आख़िरी वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाने के लिए किस हद तक प्रतिबद्ध हैं.

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चार साल पहले ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेसी की कहानी पूरी हो चुकी है.
35 साल की उम्र में उन्होंने आख़िरकार वर्ल्ड कप जीत लिया था. उन्होंने तब कहा था कि यह टूर्नामेंट में उनका आख़िरी मैच होगा. कई लोगों की नजर में उसी जीत के साथ उन्होंने ख़ुद को फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी साबित कर दिया था.
लेकिन उससे भी चार साल पहले, जब उनकी उम्र 31 साल थी, तब बहुत से लोगों को, यहाँ तक कि उनके क़रीबी लोगों को भी, लगता था कि वह अपना आख़िरी वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और वर्ल्ड चैंपियन बने बिना ही करियर ख़त्म कर देंगे.
लेकिन अब 39 साल की उम्र में मेसी एक बार फिर अर्जेंटीना को लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फ़ाइनल में पहुँचाने वाले सबसे बड़े नायक बनकर सामने आए हैं. इस बार उन्होंने इंग्लैंड की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया.
इंग्लैंड पर 2-1 की जीत में मेसी ने दोनों गोल में मदद की. इसके साथ ही 2026 वर्ल्ड कप में उनके आठ गोल और चार असिस्ट हो चुके हैं.
वह इस वर्ल्ड कप में संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं और सबसे ज़्यादा असिस्ट देने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं.
अब रविवार को न्यू जर्सी में होने वाले फ़ाइनल में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा. स्पेन वही देश है, जहाँ मेसी ने बार्सिलोना के लिए अपने करियर का सबसे बड़ा हिस्सा खेला.
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने कहा, "वह इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी हैं. मुझे नहीं पता कि इसे साबित करने के लिए उन्हें और क्या करना होगा. स्पेन के ज़्यादातर लोग भी उनसे प्यार करते हैं."
बीबीसी के फुटबॉल विश्लेषक मिका रिचर्ड्स ने कहा, "अर्जेंटीना के पास लियोनेल मेसी हैं. उनके पास 'ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम' है. फुटबॉल इतिहास का सबसे महान खिलाड़ी."
उन्होंने कहा, "ऐसे मुक़ाबले ख़ास पलों से तय होते हैं. हमें लगा था कि यह काम जूड बेलिंगहैम या हैरी केन करेंगे, लेकिन यही वजह है कि मेसी आज भी बादशाह हैं."

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मेसी ने कैसे तोड़ी इंग्लैंड की उम्मीदें
बार्सिलोना और पेरिस सेंट-जर्मेन के पूर्व खिलाड़ी मेसी ने अपने लंबे करियर में इससे पहले कभी इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नहीं खेला था. अब इंग्लैंड के कोच थॉमस टशेल और उनके प्रशंसक शायद यही चाहेंगे कि ऐसा कभी हुआ ही न होता.
पहले हाफ में मेसी ने बीच के हिस्से में खेलते हुए अपनी तकनीक की कुछ झलकियां दिखाईं, लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब 55वें मिनट में एंथनी गॉर्डन ने इंग्लैंड को बढ़त दिलाई.
इसके बाद टशेल ने अतिरिक्त डिफेंसिव खिलाड़ी उतार दिए और इंग्लैंड पीछे हटकर बचाव करने लगा. अगले 37 मिनट में अर्जेंटीना के पास 88 प्रतिशत गेंद पर नियंत्रण रहा.
इसी दौरान मेसी दाएं विंग पर चले गए और वहीं से पूरे मैच की दिशा बदल दी.
मैच के बाद गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज़ ने कहा, "मेसी को विंग पर ले जाना हमारे लिए सबसे अहम फ़ैसला साबित हुआ."
मेसी ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नौ सफल ड्रिब्लिंग की और दो गोल में असिस्ट दिया. 1966 से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ल्ड कप के किसी नॉकआउट मुक़ाबले में ऐसा करने वाले वह पहले खिलाड़ी बन गए हैं.
पूरी इंग्लैंड टीम ने मिलकर सिर्फ़ सात सफल ड्रिब्लिंग की.
मेसी ने विरोधी टीम के पेनल्टी बॉक्स में सात बार गेंद को छुआ. यह संख्या पूरी इंग्लैंड टीम के कुल टच के बराबर थी.
उन्होंने चार बार गोल के मौक़े भी बनाए, जो इंग्लैंड की पूरी टीम के बराबर थे.
इसके अलावा उन्होंने मैच में सबसे ज़्यादा नौ क्रॉस लगाए.
लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि अर्जेंटीना के दोनों गोल मेसी की मदद से आए.
पहले उन्होंने कॉर्नर की रणनीति के तहत एंजो फर्नांदेज़ को पास दिया, जिन्होंने 85वें मिनट में बॉक्स के बाहर से बराबरी का शानदार गोल किया.
इसके बाद इंजरी टाइम में मेसी के बेहतरीन क्रॉस पर लॉतारो मार्टिनेज़ ने हेडर के ज़रिए विजयी गोल दाग दिया.
पूर्व इंग्लैंड डिफेंडर मिका रिचर्ड्स ने कहा, "वह पूरे मैच में मैदान पर आराम से चलते हुए नज़र आते हैं, लेकिन जैसे ही गेंद उनके पैरों में आती है, वह अचानक जीवंत हो उठते हैं."
उन्होंने कहा, "यही उनकी प्रतिभा है और कई बार वही मुक़ाबले का सबसे बड़ा अंतर बन जाती है."
इंग्लैंड के पूर्व गोलकीपर जो हार्ट ने कहा, "इंग्लैंड ने वही ग़लती दोहराई जो उसने मेक्सिको और नॉर्वे के ख़िलाफ़ की थी. टीम पूरी तरह डिफेंसिव हो गई."
उन्होंने कहा, "इसका फ़ायदा मेसी को मिला. उनके पास हर ताले की चाबी थी. आख़िरी 15 मिनट में उन्होंने अकेले पूरे मैच पर नियंत्रण कर लिया."
इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने कहा, "मैच के बड़े हिस्से में हमने उन्हें अच्छी तरह रोके रखा. लेकिन दुनिया के सबसे ख़तरनाक खिलाड़ियों के साथ यही होता है. जैसे ही उनके पास गेंद आती है, वे कुछ भी कर सकते हैं. आख़िर वह इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं."

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2016 में ही मेसी ने की थी संन्यास की घोषणा
यह भूल जाना आसान है कि 2016 में, जब लियोनेल मेसी 29 साल के थे और बार्सिलोना के लिए खेल रहे थे, तब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी.
उससे पहले वह 2014 वर्ल्ड कप फ़ाइनल में जर्मनी से हार चुके थे और लगातार तीन कोपा अमेरिका फ़ाइनल भी गंवा चुके थे.
लेकिन संन्यास का फ़ैसला वापस लेने के बाद उन्होंने अर्जेंटीना को दो बार कोपा अमेरिका का चैंपियन बनाया.
2022 में, जब पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) के खिलाड़ी के रूप में मेसी ने क़तर में वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई, तो लगा कि उनके शानदार करियर की आख़िरी अधूरी कड़ी भी पूरी हो गई.
बहुत से लोगों का मानना था कि वर्ल्ड कप जीतना ही वह उपलब्धि थी, जिसकी कमी के कारण पेले और डिएगो माराडोना जैसे विश्व विजेताओं के साथ उनकी तुलना अधूरी मानी जाती थी.
2022 वर्ल्ड कप फ़ाइनल से पहले मेसी ने कहा था, "मैं बहुत खुश हूँ कि वर्ल्ड कप में मेरा सफ़र फाइनल तक पहुँचा और आख़िरी मैच फ़ाइनल में खेलने का मौक़ा मिला. इससे बड़ी संतुष्टि और क्या हो सकती है."
उन्होंने कहा था, "अगले वर्ल्ड कप तक काफ़ी समय है. मुझे नहीं लगता कि मैं वहाँ तक खेल पाऊंगा. इसलिए इस तरह अपने सफ़र का अंत करना शानदार होगा."
2023 में जब उन्होंने यूरोप छोड़कर मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) की टीम इंटर मियामी का रुख़ किया, तो लगा कि अब वह अपने करियर के अंतिम दौर में हैं.
पिछले साल फ़ीफ़ा क्लब वर्ल्ड कप में खेलने के बावजूद यह बिल्कुल तय नहीं था कि वह इस साल वर्ल्ड कप में भी नज़र आएंगे.
लेकिन 39 साल की उम्र में भी मेसी का सफ़र थमता नहीं दिख रहा, भले ही उनके खेलने का अंदाज़ पहले से बदल चुका हो.
स्पेनिश पत्रकार गुइयेम बलागे, जिन्होंने मेसी की जीवनी लिखी है, कहते हैं कि मेसी ने अपने करियर में कम से कम पाँच बार अपने खेल को नए तरीक़े से ढाला है.
इंटर मियामी और अर्जेंटीना के लिए मेसी अब लगातार 13 मैचों में या तो गोल कर चुके हैं या गोल करने में मदद कर चुके हैं.
अगर वह रविवार को स्पेन के ख़िलाफ़ फाइनल में भी किसी गोल में योगदान देते हैं, तो 2011 में बनाए गए लगातार 14 मैचों के अपने रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे.
इसके अलावा वह ब्राज़ील के महान खिलाड़ी काफू के बाद वर्ल्ड कप के तीन फाइनल खेलने वाले इतिहास के सिर्फ़ दूसरे खिलाड़ी बन जाएंगे.
क्या यही उनका आख़िरी वर्ल्ड कप मुक़ाबला होगा? आख़िर 2030 में उनकी उम्र 43 साल हो जाएगी.
लेकिन शायद अब आठ बार के बैलन डी'ऑर विजेता मेसी के बारे में कोई भी निश्चित अनुमान लगाना ठीक नहीं होगा.

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इस वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना फुटबॉल के चार यादगार पल
ग्रुप स्टेज में तीन अपेक्षाकृत आसान जीत के बाद स्कालोनी की टीम की असली परीक्षा शुरू हुई.
सबसे पहले प्री-क्वॉर्टर फ़ाइनल में इस वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी सरप्राइज टीम केप वर्डे से मुक़ाबला हुआ. निर्धारित समय तक मैच 1-1 से बराबरी पर रहा.
अतिरिक्त समय के पहले हाफ़ की शुरुआत में लिसांद्रो मार्टिनेज़ ने अर्जेंटीना को बढ़त दिलाई, लेकिन लगभग 10 मिनट बाद केप वर्डे ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल कर फिर बराबरी कर ली.
इसके बाद अर्जेंटीना का दबाव रंग लाया. कॉर्नर से आए हेडर को केप वर्डे के एक खिलाड़ी ने अनजाने में अपने ही गोल में पहुंचा दिया और अर्जेंटीना ने जीत दर्ज कर ली.
इसके बाद मिस्र के ख़िलाफ़ रोमांचक वापसी देखने को मिली. 79वें मिनट तक मिस्र 2-0 से आगे था, तभी क्रिस्टियन "कूटी" रोमेरो ने गोल कर अर्जेंटीना की उम्मीदें जगा दीं.
एक बार फिर अर्जेंटीना के आक्रामक खेल ने असर दिखाया और 83वें मिनट में मेसी ने बराबरी का शानदार गोल दाग दिया.
जब मुक़ाबला अतिरिक्त समय में जाता दिख रहा था, तभी 93वें मिनट में एंजो फर्नांदेज़ ने विजयी गोल कर अर्जेंटीना को यादगार जीत दिला दी. हालांकि इस मुक़ाबले में रेफरिंग को लेकर विवाद भी रहा.
क्वॉर्टर फ़ाइनल भी अर्जेंटीना ने अतिरिक्त समय में जीता. टीम 10वें मिनट से बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन स्विट्जरलैंड के डैन न्दोये ने 67वें मिनट में स्कोर बराबर कर दिया.
पूरा स्टेडियम अर्जेंटीना के समर्थन में गूंज रहा था. 112वें मिनट में जूलियन अल्वारेज़ ने शानदार गोल कर गतिरोध तोड़ा और नौ मिनट बाद लाउतारो मार्टिनेज़ ने एक और गोल कर जीत पक्की कर दी.
अर्जेंटीना की चौथी यादगार रात सेमीफ़ाइनल में आई, जब इंजरी टाइम में लॉतारो मार्टिनेज़ के गोल ने टीम को फ़ाइनल में पहुँचा दिया.
इन सभी मुक़ाबलों में खिलाड़ियों के जश्न का एक ख़ास दृश्य बार-बार देखने को मिला. हर बड़ी जीत के बाद पूरी टीम लियोनेल मेसी को अपने कंधों पर उठाकर जश्न मनाती रही.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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