ट्रंप और मेलोनी के बीच तनातनी की वजह सिर्फ़ 'फ़ोटो' नहीं, नेटो महासचिव के बयान से बढ़ीं मुश्किलें

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- Author, डेविडे ग्लियोने
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, रोम
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इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से जुड़े कई एआई मीम ट्रेंड कर रहे हैं, इनमें मेलोनी को ऐसे दिखाया गया है, जैसे वो ब्रेक-अप के बाद अपनी ज़िंदगी बदलने की कोशिश कर रही हैं.
एक एआई फोटो में उन्हें नए हेयरकट के साथ दिखाया गया है. दूसरी तस्वीरों में उन्हें सिंगल्स हॉलिडे बुक करते हुए, मैराथन की ट्रेनिंग करते हुए और डेटिंग ऐप पर प्रोफ़ाइल बनाते हुए दिखाया गया है.
ये सारी तस्वीरें असली नहीं हैं, लेकिन उनका मज़ाक इसलिए बनाया जा रहा क्योंकि मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच खुले तौर पर विवाद सामने आया है.
पिछले कुछ महीनों में ट्रंप और मेलोनी का रिश्ता कभी खुले हमलों तक गया, कभी निजी तानों तक और फिर थोड़ा ठीक भी हुआ. लेकिन इस उठापटक से यूरोप की सबसे चर्चित राजनीतिक दोस्ती ठंडी पड़ गई.
ट्रंप से नज़दीकी का दौर रहा

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कुछ समय पहले तक लोग मेलोनी को 'ट्रंप विस्परर' कहते थे. इसकी बानगी जनवरी 2025 में देखने को मिली, जब ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें सबसे आगे बैठने की जगह मिली. समारोह में यह अहम जगह पाने वाले वह अकेली यूरोपीय नेता थीं.
पिछले अप्रैल में मेलोनी व्हाइट हाउस गई थीं. वहां उनकी मुलाक़ात अमेरिकी नेताओं से हुई ताकि यूरोपीय सामान पर लगे अमेरिकी टैक्स को लेकर चल रहे तनाव को कम किया जा सके.
मेलोनी ने इटली की राजनीति में हाशिए से शुरुआत की थी. उनकी पार्टी की जड़ें इटली की पोस्ट-फ़ासीस्ट परंपरा से जुड़ी हैं.
लेकिन उन्होंने सालों तक मेहनत करके ख़ुद को एक भरोसेमंद नेता के तौर पर दिखाने की कोशिश की.
ट्रंप से उनकी नज़दीकी को सिर्फ़ कूटनीतिक रिश्ता नहीं माना गया बल्कि यह उनके बड़े मंच पर मौजूदगी का सबूत था.
ट्रंप और मेलोनी में ऐसे आई दूरियां

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वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
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लेकिन ट्रंप की अनिश्चितता मेलोनी के लिए मुश्किल भरी साबित हुई और उनकी साख को देश और विदेश दोनों जगह चोट पहुंची.
ट्रंप और मेलोनी में पहली बड़ी दरार मार्च के आख़िर में आई. इटली के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य जहाज़ों को सिसिली के सिगोनेला नेटो एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि इसके लिए संसद की मंज़ूरी ज़रूरी है. इटली ने ये क़दम इसलिए उठाया क्योंकि उनका क़ानून और जनता दोनों ही युद्ध के ख़िलाफ़ थे.
कुछ हफ़्तों बाद विवाद और बढ़ गया. अप्रैल में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोप लियो (चौदहवें) पर हमला बोला, क्योंकि उन्होंने युद्ध की आलोचना की थी. ट्रंप ने उन्हें 'कमज़ोर' बताया था.
कैथलिक देश की नेता मेलोनी ने ट्रंप के बयान को 'अस्वीकार्य' बताया.
मेलोनी की सख़्त प्रतिक्रिया ट्रंप को अच्छी नहीं लगी. उन्होंने इटली के अख़बार कोरिएरे डेला सेरा से कहा, "मैं हैरान हूं. मुझे लगा था उनमें हिम्मत है, लेकिन मैं ग़लत था. वह अब पहले जैसी नहीं रहीं और इटली भी पहले जैसा देश नहीं रहा."
इसके बाद जून तक हालात बेहतर लगने लगे. फ्रांस में जी-7 सम्मेलन में ट्रंप और मेलोनी को बातचीत करते हुए देखा गया. इटली के अधिकारियों ने इसे ऐसी बातचीत बताया जिसमें ग़लतफ़हमियां दूर हो गईं.
मेलोनी ने पत्रकारों से कहा कि बातचीत का माहौल बहुत सकारात्मक था और कोई टकराव नहीं था.
फ़ोटो वाले विवाद से बढ़ी दूरी

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लेकिन कुछ ही दिनों बाद ट्रंप और मेलोनी के बीच मामला फिर बिगड़ गया.
ट्रंप ने इतालवी चैनल ला7 को फोन इंटरव्यू में कहा कि मेलोनी ने समिट में उनसे फोटो के लिए 'मिन्नत' की थी.
ट्रंप ने कहा, "वह मेरे साथ तस्वीर चाहती थीं. मैं नहीं लेता, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया."
मेलोनी ने तुरंत जवाब दिया. उन्होंने वीडियो जारी कर ट्रंप की बात को 'पूरी तरह मनगढ़ंत' क़रार दिया.
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा क्यों करते हैं. मैं बस इतना कह सकती हूँ कि अफ़सोस है कि वह पश्चिम के दुश्मनों के ख़िलाफ़ ऐसी मज़बूती नहीं दिखाते. लेकिन एक बात याद रखनी चाहिए- न मैं मिन्नत करती हूं और न ही इटली."
इसके बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिकी यात्रा रद्द कर दी.
इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला ने मेलोनी को फ़ोन कर समर्थन व्यक्त किया. सरकार के सहयोगियों और सांसदों ने ट्रंप की टिप्पणियों को अपमानजनक बताया और माफ़ी की मांग की. विपक्ष ने भी इसे पूरे देश का अपमान कहा.
ट्रंप ने इसके बाद फिर दोहराया कि मेलोनी ने बार-बार तस्वीर की मांग की थी. मेलोनी पर आरोप लगाया कि वह अब दोबारा दोस्त बनने की कोशिश कर रही हैं, क्योंकि अमेरिका ने 'ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है.'
अमेरिका और इटली के बीच नया विवाद क्या?

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जैसे ही यह विवाद ठंडा पड़ता दिखा, तो सैन्य ठिकानों को लेकर नया विवाद शुरू हो गया.
पिछले बुधवार को नेटो के महासचिव मार्क रुटे ने फ़ॉक्स न्यूज़ को बताया कि लगभग 500 विमान इटली में अमेरिकी ठिकानों से 'ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी' के तहत उड़ान भर चुके हैं. अमेरिका-इसराइल के ईरान के खिलाफ़ अभियान को 'ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी' नाम दिया गया है.
रुटे ने कहा कि यह यूरोप से मिलने वाले बड़े समर्थन का हिस्सा है, जिसमें हज़ारों उड़ानें शामिल हैं.
लेकिन इटली को यह बात अच्छी नहीं लगी.
इटली के रक्षा मंत्रालय ने रुटे के बयान को 'ग़लत' और 'भ्रामक' बताया. मंत्रालय ने कहा कि उसने सिर्फ़ तकनीकी और सामान पहुंचाने वाली उड़ानों की इजाज़त दी थी, लड़ाई से जुड़ी उड़ानों की नहीं.
बाद में नेटो के एक प्रवक्ता ने साफ़ किया कि रुटे का मतलब सिर्फ़ यह दिखाना था कि सहयोगी देशों ने पहले से बने ठिकानों के समझौते का पालन किया है.
इन बातों से इटली में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है जबकि मेलोनी की सरकार बार-बार कह चुकी है कि उसने ईरान के ख़िलाफ़ सीधी सैन्य कार्रवाई के लिए इटली की ज़मीन इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं दी.
मेलोनी के लिए मुश्किल भरे हालात

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मेलोनी के लिए पिछले कुछ महीने काफ़ी मुश्किल रहे हैं- पहले न्याय प्रणाली में सुधार के लिए हुए संवैधानिक जनमत संग्रह में हार का सामना करना पड़ा और अब अगले साल चुनाव का सामना करना है. इन हालात में उनके सामने बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
अब मेलोनी के सामने बड़े सवाल हैं, वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह कैसे तय करेंगी? फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उनका रिश्ता आगे कैसे चलेगा, जो कभी दोस्त तो कभी विरोधी रहे हैं. लेकिन अब मैक्रों उनकी राजनीतिक स्थिति के लिए बहुत अहम हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मेलोनी और ट्रंप फिर से साथ आ पाएंगे?
लेखक और अमेरिका-इटली परिषद के उपाध्यक्ष जियानी रियोटा ने कहा कि हालात बदलना आसान नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "मेलोनी की पुल बनाने की कोशिश अब सिर्फ़ सपना लगती है. वह यूरोप और अमेरिका के बीच खड़ी नहीं हो सकीं."
रियोटा ने कहा, "पोप वाले मुद्दे ने मामला बदल दिया. मेलोनी को पोप का साथ देना पड़ा और ट्रंप को यह बात गवारा नहीं लगी. ट्रंप हमेशा दोस्त या दुश्मन वाली सोच रखते हैं, या तो मेरे साथ रहो या मेरे ख़िलाफ़. जब यह समझ टूटी, तो उन्होंने दबाव बढ़ाया और मेलोनी ने अपनी सख़्त महिला वाली छवि दिखा दी."
इटली इस रिश्ते को पूरी तरह से तोड़ना भी नहीं चाह रहा. राजनयिक हलकों में कोई भी रिश्ता पूरी तरह टूटना नहीं चाहता.
हफ़्ते की शुरुआत में ख़बर आई थी कि कई मंत्री अमेरिकी दूतावास के स्वतंत्रता दिवस समारोह में नहीं जाएंगे. इटली के नेताओं ने मेलोनी के साथ एकजुटता दिखाई.
अब माहौल थोड़ा शांत हो गया है. विदेश मंत्री तायानी ने कहा कि वह 'सिर उठाकर' वहां जाएंगे. प्रधानमंत्री के सहयोगियों ने भी कहा कि अब बहिष्कार की बात ठंडी पड़ गई है और माहौल ऐसा है कि 'हर कोई अपनी मर्ज़ी से फ़ैसला कर रहा है.'
असल परीक्षा अगले महीने अंकारा में होने वाले नेटो समिट में होगी, जहां जी-7 के बाद पहली बार ट्रंप और मेलोनी फिर एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
























