नाज़ुक युद्धविराम के बीच अमेरिका से समझौते को लेकर क्या सोच रहे हैं ईरान के लोग

- Author, लीस डूसेट
- पदनाम, मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता
- ........से, ईरान
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
ईरान के उत्तर-पश्चिमी मैदानों में बादाम के पेड़ फूलों से भर गए हैं और एक नाज़ुक युद्धविराम के चलते राजमार्गों पर ज़्यादा यातायात नज़र आ रहा है क्योंकि बहुत सारे ईरानी अपने घरों को वापस लौट रहे हैं.
ताज़ा बर्फ़बारी ने तापमान को गिरा दिया है. ऐसे में तुर्की की सीमा पर बने एक वेटिंग रूम में सफ़ेद बाल वाले एक बैंकर ने हमसे कहा, "मैं अपने बेटे के साथ तुर्की में एक महीने रहा."
उन्होंने बताया, "उत्तर में बसे मेरे शहर में, इसराइली और अमेरिकी हवाई हमले ज़्यादातर सैन्य ठिकानों पर हुए, घरों और नागरिक ढांचे पर नहीं,"
हिजाब पहने एक बुज़ुर्ग महिला ने स्वीकार किया, "मैं थोड़ी डरी हुई हूँ" और उनका चेहरा चिंता से सिकुड़ गया.
उन्होंने दुखी होकर उन ईरानियों की पीड़ा की चर्चा की जो भीड़भाड़ वाले आवासीय इलाकों पर गिरे बमों और ईरान के बसीज अर्धसैनिक बलों की धमकियों से परेशान हैं.
आंखें ऊपर उठाते हुए वह बुदबुदाईं, "सब कुछ अल्लाह के हाथ में है."
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दूसरे लोगों का ध्यान ज़्यादा मौजूदा ख़तरा पर अधिक था.
एक चमकीली लाल जैकेट और बुनी हुई टोपी पहने युवती ने कहा. "बिलकुल, युद्धविराम नहीं टिकेगा. ईरान कभी भी होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा."
बाद में, जब हमने तुर्की सीमा पार कर ईरान में दाख़िल हुए तो मैंने अपने पास खड़े एक व्यक्ति से इस शांति को लेकर सवाल किया.
इस पर उन्होंने कहा, "ट्रंप कभी ईरान को अकेला नहीं छोड़ेगा; वह हमें निगल जाना चाहता है!"
तेहरान की लंबी सड़क यात्रा और ट्रंप की धमकी

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तेहरान की लंबी यात्रा में अमेरिकी राष्ट्रपति का ख्याल न आना मुश्किल है. राजधानी तेहरान तक अब लंबी ड्राइव से ही पहुंची जा सकता है क्योंकि हवाई अड्डे अब भी बंद हैं.
इसी तरह सड़कों के बीच फैले हुए पुलों से नज़रें हटाना भी मुश्किल है जो वसंत की धूप में चमक रहे हैं.
बुधवार को ट्रंप ने अपनी चेतावनी दोहराई कि वह ईरान के हर पुल को नष्ट कर सकते हैं. उन्होंने फॉक्स बिज़नेस न्यूज़ से कहा, "हम एक घंटे में उनके हर पुल को, साथ ही हर बिजलीघर को, ध्वस्त कर सकते हैं"
लेकिन उन्होंने जोड़ा, "हम ऐसा करना नहीं चाहते."
राजधानी तक 12 घंटे की इस यात्रा में अब गाड़ियां घुमावदार ग्रामीण सड़कों से होकर गुज़रती हैं क्योंकि उत्तरी शहर तबरीज़ को ज़ांजान के रास्ते तेहरान से जोड़ने वाला मुख्य पुल पिछले हफ़्ते मिसाइल हमले में ढह गया था.
नागरिक ढांचों को निशाना बनाने पर कानून के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन और संभावित युद्ध अपराध हो सकता है. अमेरिका और इसराइल का कहना है कि वे केवल सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहे हैं.
हमने भी वे ठिकाने देखे, जिनमें तबरीज़ के बाहरी इलाके में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की नष्ट हो चुकी बैरक शामिल है.
इस इलाक़े में बाक़ी सैन्य और पुलिस ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है.
जब हम सड़क किनारे एक रेस्तरां में रुके तो 7 अप्रैल को ट्रंप की धमकी, "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी", की याद आई.
यह सैकड़ों साल पुरानी सराय है, जहां पत्थर की मेहराबदार छतें और रंगीन काँच की खिड़कियाँ हैं. ये ईरान की हज़ारों साल पुरानी समृद्ध सभ्यता की झलक देती है.
प्राचीन और नया ईरान

जहां-जहां हम रुके, वहां आज का ईरान भी नज़र आया. कुछ महिलाएं हिजाब और नक़ाब में हैं, तो कुछ, बिना सिर ढके.
यह 2022-2023 की महिलाओं की ज़िंदगी की आज़ादी विरोध-प्रदर्शनों की विरासत है. महिलाएं अब पीछे लौटने से इनकार कर रही हैं, भले ही 'शालीनता' को लेकर सख़्त नियम और कठोर सज़ाएं अब भी इस देश में क़ानून हैं.
लेकिन इस समय ईरान के धर्मतंत्र के लिए ज़्यादा दबाव वाले मुद्दे दूसरे हैं.
राजमार्गों पर नए बैनर फैले हुए हैं, जिनमें 1979 की क्रांति के बाद के तीन सर्वोच्च नेताओं के चित्र हैं: आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी, आयतुल्लाह अली खामेनेई और उनके उत्तराधिकारी मोज़तबा खामेनेई हैं.
कहा जाता है कि मोजतबा ख़ामेनेई उस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता की मौत हो गई थी.
लेकिन जंग शुरू होने के बाद सार्वजनिक रूप से न तो दिखे हैं और न ही सुने गए हैं.
हालांकि कहा जाता है कि वह इस विनाशकारी युद्ध के बाद नई राजनीतिक और सुरक्षा नीति बनाने की कोशिश में भूमिका निभा रहे हैं.
इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपने कट्टर दुश्मन के साथ पुराने मतभेदों को सुलझाने के ऐतिहासिक उच्च-स्तरीय प्रयासों में भी, साथ ही नए बेहद संवेदनशील मुद्दों में भी- जैसे कि ईरान का महत्वपूर्ण होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण.
बुधवार को और विवरण सामने आए कि इस्लामाबाद में 21 घंटे तक बंद दरवाज़ों के पीछे क्या हुआ था.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के बड़े दल से आमने-सामने मिला था.
इसका नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ कर रहे थे.
वह एक कट्टरपंथी हैं जो अब आईआरजीसी से जुड़े हुए हैं, लेकिन जिन्हें संभावित व्यावहारिक नेता भी माना जाता है, भले ही वह अकेले या मुख्य निर्णयकर्ता न हों.
कूटनीति अभी ज़िंदा है

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उस रविवार की सुबह वेंस ने विमान में सवार होते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका का "आखिरी और सबसे अच्छा प्रस्ताव" मेज़ पर रख दिया है, जिससे यह संकेत मिले कि यह 'ले लो या रहने दो' वाला रुख़ है.
तब से वेंस और ट्रंप ने कई इंटरव्यू दिए हैं, जिनसे लगता है कि कूटनीति अभी मरी नहीं है.
बुधवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने ईरान की अपेक्षाकृत चुप्पी तोड़ी और इस्लामाबाद में हुई चर्चाओं पर बात की, जिसमें तेहरान की इच्छाएं झलकती हैं: "युद्ध का पूर्ण अंत, प्रतिबंधों का हटना, और अमेरिका-इसराइल के हमलों से हुए नुक़सान की भरपाई."
इस बीच वॉशिंगटन से आई रिपोर्टों ने अमेरिका की ओर से लगाई जा रहीं कड़ी शर्तों को उजागर किया- ईरान के लिए परमाणु संवर्धन कतई नहीं; संवर्धन सुविधाओं को नष्ट करना होगा; उच्च संवर्धित सारे यूरेनियम को हटाना होगा; होर्मुज़ स्ट्रेट खोलना होगा; और क्षेत्र में अपने साझेदारों व सहयोगियों, जिनमें हमास और हिज़्बुल्लाह शामिल हैं, को वित्तपोषण समाप्त करना होगा.
सूत्रों का कहना है कि ईरान ने परमाणु संवर्धन पर 20 साल के स्थगन की मांग को ठुकरा दिया है और पांच साल का विराम प्रस्तावित किया है, जैसा कि उसने यह जंग शुरू होने से पहले रखा था.
ईरान ने 440 किलो उच्च संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडार को सौंपने की मांग का भी विरोध किया है.
ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल टैंकरों और अन्य जहाज़ों को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने से रोका है. इसके बावजूद, ईरान झुकने के कोई संकेत नहीं दिखा रहा है.
हालांकि ट्रंप के बयान लगातार उनके इस ग़लत विश्वास को दर्शा रहे हैं कि ईरान जल्द ही इस बढ़ते सैन्य और आर्थिक दबाव के आगे झुक जाएगा.
बुधवार को ईरान की सर्वोच्च परिचालन कमान के शक्तिशाली कमांडर अली अब्दुल्लाही ने चुनौती को और बढ़ाते हुए धमकी दी कि "फ़ारस की खाड़ी, ओमान सागर और लाल सागर में किसी भी निर्यात या आयात को जारी नहीं रहने दिया जाएगा."
युद्धविराम बढ़ने की अटकलें

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इधर हम तेज़ी से तेहरान की ओर बढ़ रहे थे, उधर पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर, राजधानी पहुंच गए थे ताकि मध्यस्थता प्रयासों को तेज़ किया जा सके.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता पर चर्चा चल रही है, जो फिर से इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है. जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान करेगा. दो हफ़्तों के युद्धविराम को बढ़ाने की अटकलें भी हैं.
अमेरिका से आकलन आ रहे हैं कि अमेरिका का गोलीबारी वाला युद्ध, या कम से कम उसका सबसे बुरा हिस्सा, फ़िलहाल ख़त्म हो सकता है. ईरान के भीतर हालत यह है कि चाहे देश के भविष्य पर उनके विचार अलग-अलग विचार हों लेकिन अभी लोग एक-एक दिन काट रहे हैं.
ईरान के लोग पहले ही असाधारण राष्ट्रव्यापी विरोध-प्रदर्शनों से गुज़र चुके हैं, जिन्हें घातक बल प्रयोग से कुचल दिया गया था और जिनमें हज़ारों लोग मारे गए.
वे एक अधूरे बाहरी युद्ध और घरेलू प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, जिनमें व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट भी शामिल है.
इसने बहुतों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर कोई समझौता हुआ भी, तो क्या वह अंत में पंगु बना देने वाले प्रतिबंधों को हटाएगा और वह बदलाव लाएगा जिसकी उन्हें उम्मीद है.
बीबीसी की मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता लीस डूसेट इस शर्त पर तेहरान से रिपोर्ट कर रही हैं कि उनकी सामग्री बीबीसी की फ़ारसी सेवा में इस्तेमाल नहीं की जाएगी. ये प्रतिबंध ईरान में काम कर रहे सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों पर लागू होते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



































