सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमले के बाद भारतीय दूतावास ने जारी की ये एडवाइजरी
सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर 10 अक्तूबर को हुए हमले में कई भारतीय घायल हो गए थे. सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने इस बारे में गुरुवार को अपडेट जारी किया है.
सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हमले के बाद भारतीय दूतावास ने जारी की ये एडवाइज़री
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इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर 10 अक्तूबर को हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय घायल हुए थे (प्रतीकात्मक तस्वीर)
सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर 10 अक्तूबर को हुए हमले में कई भारतीय घायल हो गए थे. सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने इस बारे में गुरुवार को अपडेट जारी किया है.
बयान में कहा गया है कि घायल भारतीय नागरिकों में से दो आईसीयू और एक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में भर्ती है. तीन अन्य घायलों का इलाज सामान्य वार्ड में चल रहा है, जबकि एक व्यक्ति को गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
भारतीय दूतावास ने जारी एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने और हवाई हमले की स्थिति में घर के अंदर रहने की अपील की है.
एडवाइजरी में कहा गया है कि सऊदी अरब से तत्काल निकलने की ज़रूरत वाले भारतीय नागरिक बहरीन, कुवैत और कतर समेत पड़ोसी देशों से उड़ान लेने पर विचार कर सकते हैं.
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें अब भी बंद हैं. वहीं, दम्माम, जेद्दा और मदीना एयरपोर्ट से उड़ानें कुछ बाधाओं के साथ जारी हैं.
भारतीय एयरलाइंस ने सऊदी अरब आने-जाने वाली उड़ानें 17 अक्तूबर तक रोक दी हैं.
गौरतलब है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किए गए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी और 10 घायल हुए थे.
सऊदी अरब में क़रीब 26 लाख भारतीय काम करते हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में इनका अहम योगदान है. अगर सऊदी अरब में ऐसी घटनाएं बेकाबू होती हैं, तो इसका भारतीय हितों पर भी सीधा असर पड़ेगा.
दीपके ने कहा- 'जहां मैं ठहरा हूं, वहां चारो ओर सादे कपड़ों में पुलिस ने घेर रखा है'
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इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को प्रदर्शन का आह्वान किया है
कॉकरोच जनता पार्टी के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में जहां वह ठहरे हुए हैं, वहां चारों तरफ़ सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.
अभिजीत दीपके ने शुक्रवार शाम पांच बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने का आह्वान किया है.
दीपके ने गुरुवार रात एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं जहां ठहरा हूं, उस जगह को चारों तरफ़ से सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने घेर रखा है. ये लोग लगातार मेरी निगरानी कर रहे हैं. सफेद रंग की स्कॉर्पियो भी हर जगह मेरा पीछा कर रही है.”
सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्तूबर यानी शुक्रवार और शनिवार को बंद रखने के एनडीएमसी के फ़ैसले पर तंज़ करते हुए उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “अगर हम 100 जगहों का एलान कर दें, तो क्या नरेंद्र मोदी उन सभी 100 जगहों को बंद कर देंगे?”
पेशावर के एक स्कूल की छत गिरने से मरने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बढ़कर 33 हुई
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इमेज कैप्शन, पेशावर स्कूल दुर्घटना के दौरान क्लास रूम में क़रीब 100 छात्र मौजूद थे
पाकिस्तान के पेशावर में एक स्कूल की छत गिरने की घटना में 33 बच्चों और एक शिक्षक सहित कुल 34 लोगों
की मौत हो गई है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, लेडी रीडिंग अस्पताल ने 33 मौतों की पुष्टि की है, जबकि नसीरुल्लाह ख़ान बाबर अस्पताल ने एक छात्र की
मौत की पुष्टि की है.
लेडी रीडिंग के आंकड़ों के अनुसार, अस्पताल
में 33 शव लाए गए, जिनमें
25 वर्षीय शिक्षिका समरीन बीबी भी शामिल थीं. अस्पताल में लाए गए बच्चों की उम्र
छह से चौदह वर्ष के बीच बताई जा रही है.
लेडी रीडिंग अस्पताल से 17 बच्चों को
छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक
शिक्षक और तीन बच्चों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है.
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इमेज कैप्शन, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्कूल की छत जर्जर थी और छात्रों का भार नहीं सह पाई
दूसरी ओर, नसीरुल्लाह ख़ान बाबर मेमोरियल अस्पताल का कहना है कि 33 छात्र-छात्राओं को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से एक की मौत हो गई है.
इस मामले में एक जांच समिति बनाई गई है जो घटना के बारे में पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.
पेशावर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी उर्दू को बताया कि स्कूल की इमारत 'छात्रों का भार सहन नहीं कर सकी और ढह गई.'
पेशावर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) फ़रहान अहमद ने कहा कि स्कूल "बेहद जर्जर हालत" में था.
पुलिस अधिकारियों का अनुमान है कि स्कूल में लगभग 300 छात्र पढ़ रहे थे, जबकि घटना के समय तीन कक्षाओं में लगभग 100 स्टूडेंट्स मौजूद थे.
सीजेपी के प्रदर्शन से पहले दिल्ली का कनॉट प्लेस सेंट्रल पार्क दो दिनों के लिए बंद, निषेधाज्ञा लागू
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इमेज कैप्शन, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए हैं
16 अक्तूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी कर दी गई है.
साथ ही नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने सेंट्रल दिल्ली के इस पॉपुलर पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया है.
गुरुवार को दिल्ली की डीसीपी पीआरओ नेहा यादव ने कहा, "16 अक्तूबर 2026 को सीजेपी ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आम लोगों से अपील की कि वे शाम 5 बजे राष्ट्रीय तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में जुटें. आम आदमी पार्टी ने भी अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है."
"मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कनॉट प्लेस और उसके आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा पहले से लागू है."
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इमेज कैप्शन, सीजेपी ने 16 अक्तूबर को सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर इकट्ठा होने का आह्वान किया है
डीसीपी ने बताया कि एनडीएमसी ने दिल्ली पुलिस को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित किया है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्तूबर को बंद रहेगा.
डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि कनॉट प्लेस और उसके आसपास के कई व्यापारिक और मार्केट संगठनों ने अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को उपद्रवी तत्वों और गैरक़ानूनी जमावड़े से बचाने के लिए सुरक्षा की मांग की है.
उन्होंने लोगों से इस जमावड़े में शामिल न होने की अपील की है और क़ानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है.
हालांकि, उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय ध्वज लेकर राष्ट्रगान गाने के उद्देश्य से कुछ चुनिंदा लोगों को किसी उचित जगह पर इकट्ठा होने की अनुमति देने के लिए इंतज़ाम करने पर विचार कर सकती है."
ट्रंप ने निडाल हसन की सज़ा-ए-मौत के सीधे प्रसारण का फैसला वापस लिया
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इमेज कैप्शन, हसन की एक अप्रकाशित तस्वीर जिसे अधिकारियों ने 2012 में जारी किया था
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2009 के फोर्ट हूड हमले में 13 लोगों की हत्या और 32 लोगों को घायल करने वाले पूर्व अमेरिकी सेना मेजर निडाल मलिक हसन को तय कार्यक्रम के मुताबिक़ फ़ायरिंग स्क्वाड के ज़रिए मौत की सज़ा दी जाएगी.
साथ ही उन्होंने कहा कि अब इस सज़ा-ए-मौत को लाइवस्ट्रीम नहीं किया जाएगा.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "निडाल मलिक हसन, अमेरिकी सेना का पूर्व मेजर और गद्दार, एक बेहद बुरा और दुष्ट व्यक्ति है, जिसने 13 लोगों की हत्या की. इनमें एक महिला सैनिक प्रेग्नेंट थी, जिसकी अजन्मे बेटे के साथ मौत हो गई. निडाल मलिक हसन ने 32 और निर्दोष लोगों को गंभीर रूप से घायल किया."
ट्रंप ने आगे लिखा, "इन सबके बावजूद, मेरा मानना है कि मौत की सज़ा की प्रक्रिया को लाइवस्ट्रीम करना दुनिया के लिए यह देखने का एक कड़ा संदेश हो सकता था कि अमेरिका हसन जैसे आतंकवादियों और ऐसे लोगों से कैसे निपटता है. लेकिन कई बेहद अच्छे और नेक इरादे वाले लोग किसी व्यक्ति को मरते हुए देखना पसंद नहीं करेंगे, चाहे वह लाइवस्ट्रीम के ज़रिए हो या किसी अन्य माध्यम से."
क्या था मामला?
पिछले सप्ताह अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि लोग फ़ायरिंग स्क्वाड के ज़रिए पूर्व अमेरिकी मेजर को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण देख सकेंगे.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि 2009 में फ़ोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 13 निहत्थे अमेरिकी सैनिकों की गोली मारकर हत्या करने वाले निडाल मलिक हसन को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण किया जाएगा.
अंकिता भंडारी मामले में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से चिट्ठी लिखकर कहा, 'उनके माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए'
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को चिट्ठी लिखी है.
राहुल गांधी ने इसे अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर हैरानी जताई है.
उन्होंने लिखा है, "19 साल की अंकिता भंडारी ने एक वीआईपी के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई. चार साल बाद भी सीबीआई की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो वीआईपी कौन था."
राहुल गांधी ने लिखा है, "अंकिता के परिवार समेत कई लोग मानते हैं कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं. ऐसे में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति से मैं स्तब्ध हूं. राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती."
"दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि महिलाओं की सुरक्षा की उन्हें बिल्कुल परवाह ही नहीं है. मैं आपसे अपील करता हूं कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न देने की सलाह दें. अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए."
इससे पहले अंकिता के माता पिता इंसाफ़ की मांग को लेकर 14 अक्तूबर को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए थे. उनसे मिलने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी गए थे.
बाद में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तड़के सुबह अंकिता के माता पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.
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इमेज कैप्शन, बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम ने इस मामले में मानहानि का मामला दर्ज कराया था
अंकिता भंडारी के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार असली लोगों को बचाया जा रहा है.
बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम अंकिता भंडारी के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में कथित वीआईपी के तौर पर बार-बार उठाया है.
गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के ख़िलाफ़ मानहानि की कार्यवाही शुरू की. बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे गौतम उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी भी रह चुके हैं.
12 अक्तूबर को उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया.
ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी पर लगा ये आरोप, व्हाइट हाउस ने क्या कहा?, सरीन हबेशियन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी कैटी ज़कारिया की कानूनी योग्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ट्रंप ने नियुक्ति के समय उन्हें वकील बताया था और ज़कारिया भी ख़ुद को लॉयर कहती रही हैं.
मामला तब चर्चा में आया जब मंगलवार को एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उन्होंने अमेरिका के किस राज्य में वकालत के लिए ज़रूरी बार परीक्षा पास की है. ज़कारिया ने जवाब दिया, "जब मैं चीन गई." बाद में उन्होंने कहा कि शोर के कारण उन्होंने सवाल को ग़लत समझ लिया था और उन्हें लगा कि पूछा गया है कि लॉ स्कूल के बाद वे कहाँ गई थीं.
असल विवाद क्या है?
ज़कारिया ने 2011 में कैलिफ़ोर्निया की पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की थी. लेकिन अमेरिका में लॉ की डिग्री अपने आप वकालत करने का लाइसेंस नहीं देती. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक़, ज़कारिया ने कैलिफ़ोर्निया बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं कर पाई थीं.
ज़कारिया का कहना है कि उन्होंने चीन में "इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन लॉ" पर काम किया और उनके पास इसके लिए "सभी ज़रूरी योग्यताएं" थीं. उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, वह 2011 से 2013 तक बीजिंग की एक लॉ फ़र्म में एसोसिएट रही थीं. चीन में विदेशी नागरिकों को वकालत का लाइसेंस नहीं मिलता, हालांकि वे लॉ फर्मों में दूसरे पदों पर काम कर सकते हैं.
अब शिकायत भी दर्ज
बुधवार को कैंपेन फ़ॉर अकाउंटबिलिटी नाम के एक निगरानी संगठन ने कैलिफ़ोर्निया स्टेट बार में शिकायत दर्ज कराई. संगठन ने आरोप लगाया है कि ज़कारिया ने बिना लाइसेंस वकालत करने की पात्रता होने का दावा किया हो सकता है और इस मामले की जांच की मांग की है.
ज़कारिया ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि जब उन्होंने टीवी पर आना शुरू किया था तो पेपरडाइन से पूछा था कि उन्हें ख़ुद को किस तरह पेश करना चाहिए. उनके मुताबिक़, यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ने कहा था कि वह ख़ुद को "लॉयर" कह सकती हैं, लेकिन "अटॉर्नी" नहीं.
व्हाइट हाउस ने ज़कारिया का बचाव किया है. संचार निदेशक स्टीवन चिउंग ने उन्हें "बेहद योग्य और तेज़-तर्रार" बताया है.
ज़कारिया ने चीन में अपने काम के दौरान इंटरनेशनल फ़ाइनेंस कॉरपोरेशन और वर्ल्ड बैंक के लिए भी बाहर से क़ानूनी सलाहकार के तौर पर काम करने का दावा किया था. बीबीसी ने इन संस्थाओं और चीनी लॉ फर्म से इस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी है.
दिन भरः सीजेपी प्रोटेस्ट, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई Live
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वाराणसी के सारनाथ में एक घर में भीषण विस्फोट, मलबे से तीन लोगों को बचाया गया, प्रेरणा, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
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इमेज कैप्शन, वाराणसी के जिस घर में धमाका हुआ, उसमें पटाखा बनाए जाने की आशंका पुलिस ने जताई है
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भीषण विस्फोट के बाद एक मकान का पूरा हिस्सा ढह गया.
गुरुवार शाम पांच बजे के क़रीब सारनाथ थाना क्षेत्र के सारंग तालाब की ये घटना है, जिसके बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं.
राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ़ और एसडीआरएफ़ की टीमों को भी लगाया गया है.
अब तक दो लोगों को मलबे से बाहर निकाले जाने की जानकारी मिली है. बचाव दल मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं.
वाराणसी के डीसीपी वरुणा ज़ोन, राजेश पांडेय ने बताया कि शाम करीब पांच बजे पुलिस को मकान गिरने की सूचना मिली थी.
उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी में स्थानीय स्तर पर पटाखे बनाने की बात सामने आ रही है. हालांकि, विस्फोट किस वजह से हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच की जा रही है.
डीसीपी के मुताबिक़, जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तब तक किसी के मलबे में दबे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी.
हालांकि, स्थानीय लोगों ने एक महिला के दबे होने की आशंका जताई थी. इसके बाद बचाव दलों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया और अब तक तीन लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है.
तीनों को अस्पताल रेफ़र कर दिया गया है. इसमें महिला और बच्चा शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफ़ी मांगने की ख़बरों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी सफ़ाई
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इमेज कैप्शन, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से हलफ़नामा दायर किया गया था
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मीडिया की उन रिपोर्ट्स पर सफ़ाई दी है, जिनमें कहा गया था कि गृह सचिव ने अवमानना नोटिस के जवाब में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफ़ी मांगी है.
मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, अवमानना के मामलों में जवाब दाखिल करते समय हलफ़नामे के पहले पैराग्राफ़ में बिना शर्त माफ़ी का उल्लेख करना एक निर्धारित प्रक्रिया है.
बयान के अनुसार, "गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और दूसरे संबंधित अधिकारियों की ओर से दाख़िल हलफनामों के पहले पैराग्राफ़ में इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है. इसके बाद हलफ़नामों में विस्तार से तथ्य पेश किए गए हैं."
"हलफ़नामों में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार और पुलिस ने क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की है और उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला नहीं बनता."
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मध्य दिल्ली में इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़ा है.
इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने कहा कि अदालत परिसर पहुंचने पर उन्हें समाचार चैनलों और अखबारों से पता चला कि सरकार पहले ही हलफ़नामा दाख़िल कर बिना शर्त माफ़ी मांग चुकी है और कोर्ट से कुछ निर्देश देने की मांग की है.
उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान आइटम नंबर 22 पर सुनवाई शुरू होने पर अदालत में काफ़ी हलचल हुई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आइटम नंबर 23 और उससे जुड़े मामलों में नोटिस जारी किए.
प्रशांत भूषण ने कहा- 'हां हम चाहते हैं सत्ता परिवर्तन हो'
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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने रिजीम चेंज के आरोपों का जवाब दिया
गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में हुए कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है और हम इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे."
उन्होंने कहा, "यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है. हम ऐसे तानाशाही शासन को स्वीकार नहीं करेंगे, जो हमारी चुनावी व्यवस्था को कुचल रहा है."
प्रशांत भूषण ने नेहा बोरा, अभिजीत दीपके और प्रकाश राज के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हिस्सा लिया था.
चुनाव आयोग की कामकाज को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर सरकार के रवैये को लेकर प्रशांत भूषण ने कहा, "अब सरकार कह रही है कि यह तो विपक्ष का रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) का ऑपरेशन है."
उन्होंने कहा अभी तो हम चुनावी लोकतंत्र ठीक करने की गुहार लगा रहे थे लेकिन सरकार की इस तरह की बर्बरता चलेगी तो ज़रूर रिजीम चेंज होगा.
रिजीम चेंज के आरोपों पर उन्होंने कहा, "हां हम चाहते हैं रिजीम चेंज हो, हम सब चाहते हैं रिजीम चेंज हो. क्या इसमें ग़लती है? बीजेपी रिजीम चेंज के लिए बार-बार आंदोलन करे और कहते हैं कि ये लोग रिजीम चेंज की साज़िश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "रिजीम चेंज कराना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है. हमारे संविधान में सरकार के ख़िलाफ़ विरोध पैदा करना कोई अपराध नहीं है. और इसलिए अब ये सचमुच रिजीम चेंज की लड़ाई है. इस तरह की तानाशाह की सरकार इस देश में नहीं चल सकती जोकि हमारे देश में सारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचल रही हो और जो हमारे चुनावी लोकतंत्र को कुचल रही हो."
कार्टून: दुस्साहस तो देखो
इमेज कैप्शन, प्रोटेस्ट में भाग लेने पर अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के नोटिस पर आज का कार्टून.
सीजेपी के प्रदर्शन के एलान के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी तैयारियों पर क्या बताया
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इमेज कैप्शन, सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि वह 16 अक्तूबर को कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए 'हर संभव कदम' उठाएगी.
बार एंड बेंच के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ़ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की पीठ के सामने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पुलिस की ओर से ये बात कही.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की आशंकाओं पर ध्यान दिया जाएगा. संबंधित पक्षों ने सीजेपी और उसके फ़ाउंडर अभिजीत दीपके की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए पहले ही पर्याप्त कदम उठाए हैं. ज़रूरत पड़ने पर क़ानून के मुताबिक़ सभी संभव कदम उठाए जाएंगे.
चेतन शर्मा ने कोर्ट से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या आदेश में दीपके के साथ उनके सहयोगी भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि ऐसा न होने पर दीपके पर रोक लगने के बावजूद उनके सहयोगी गतिविधियां जारी रख सकते हैं.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश में सीजेपी के पदाधिकारी और अन्य सभी लोग शामिल होंगे.
अनिल कुमार गुप्ता ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी.
अभिजीत दीपके ने नागरिकों से 16 अक्तूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगे के साथ जुटने की अपील की है.
यह प्रदर्शन पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के विरोध में बुलाया गया है.
चीफ़ जस्टिस ने क्यों कहा, 'कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता'
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इमेज कैप्शन, 12 अक्तूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की कोशिश की थी
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्तूबर को कोर्ट परिसर में मार्च निकालने और रजिस्ट्री में जाने के मामले में कांग्रेस, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है.
बार एंड बेंच के अनुसार, गुरुवार को कोर्ट ने कोर्ट परिसर में राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर जवाब मांगा है.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चार वकीलों की याचिका पर यह आदेश दिया.
याचिकाकर्ताओं ने सीजेआई सूर्यकांत के ख़िलाफ़ कांग्रेस की केरल इकाई की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अवमानना की कार्रवाई की मांग भी की है.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में इस तरह के प्रदर्शन नहीं होने चाहिए.
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता."
हालांकि, कोर्ट ने फ़िलहाल अवमानना की कार्रवाई की मांग पर नोटिस जारी नहीं किया.
पीठ ने कहा कि अभी अन्य मांगों पर जवाब मांगा जा रहा है और जवाब मिलने के बाद आगे विचार किया जाएगा.
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में हंगामा
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इमेज कैप्शन, हंगामे की वजह से सीजेपी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कुछ देर बाधा पैदा हुई
16 अक्तूबर शुक्रवार को दिल्ली में
प्रदर्शन के आह्वान से एक दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने गुरुवार को एक प्रेस
कॉन्फ़्रेंस आयोजित की.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सीजेपी के
फ़ाउंडर अभिजीत दीपके, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, अभिनेता प्रकाश राज
और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और वामपंथी छात्र संगठनों के नेताओं
समेत कई लोग मौजूद थे.
दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस
कॉन्फ़्रेंस में जैसे ही नेहा बोरा ने बोलना शुरू हुआ वहां हंगामे की स्थिति पैदा
हो गई और कुछ देर के लिए प्रेस कॉन्फ़्रेंस बाधित रहा.
इससे पहले नेहा बोरा ने कहा कि वोट
का अधिकार एक बुनियादी अधिकार है और जब आशुतोष रांका और सौरव दास को जेल भेजा जाता
है और लोगों को सड़कों पर घसीटा जाता है तो यह उन 13 करोड़ लोगों के साथ किया जाता
है जिन्हें मतदाता सूची से हटा दिया गया.
लेकिन तभी एक
पत्रकार ने सवाल पूछना शुरू कर दिया, जिस पर नेहा बोरा ने कहा कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस
का नियम है कि अंत में सवाल जवाब होता है.
हालांकि शोर बढ़ने के बाद सभी लोग
उठकर खड़े हो गए.
अभिजीत दीपके को बीच में उठकर लोगों को शांत
कराना पड़ा. इसके तुरंत बाद उन्होंने प्रेस को संबोधित करना शुरू किया और सरकार पर 'तानाशाही' अपनाने का आरोप लगाया.
अभिजीत दीपके ने पूछा- 'नरेंद्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार तिरंगे से ज़्यादा अहम क्यों हो गए हैं'
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इमेज कैप्शन, सीजेपी फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने नेहा बोरा और प्रकाश राज के साथ आज प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार को केंद्र की मोदी सरकार पर तीख़ा हमला बोलते हुए सरकार को 'तानाशाह' बताया है.
उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी एक तानाशाह बन चुके हैं
लेकिन उनमें इमरजेंसी लगाने की हिम्मत नहीं है."
बीते कुछ दिनों में सीजेपी कार्यकर्ताओं, वामपंथी छात्र संगठनों, पत्रकारों और सिविल सोसायटी के लोगों पर पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लिए जाने पर सवाल खड़ा किया.
उन्होंने कहा, "अगर ऐसे ही लोगों
को डिटेन करना है तो इमरजेंसी डिक्लेयर करिए. कबतक लोगों को बेवकूफ़ बनाते रहेंगे."
दो दिन पहले ही सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर मंतर पर तिरंगा झंडा लेकर पहुंचने पर गिरफ़्तार किया गया और उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
इसके हवाला देते हुए दीपके ने कहा, "तिरंगा लहराना
कब से अपराध हो गया. अंग्रेज़ों के जमाने में ऐसा होता है, आज मोदी और शाह की पुलिस
भी यही कर रही है. आज ये दिन आ गए कि हमारे देश में ही तिरंगा नहीं लहराने दिया जा रहा."
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, "नरेंद्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार
तिरंगे से ज़्यादा क्यों अहम हो गए हैं."
उन्होंने आरोप लगाया कि आज केंद्र में जो सरकार बैठी है उनके जुड़े लोगों की स्वतंत्रता संघर्ष में कोई भागीदारी नहीं थी.
"इन्होंने अपनी शाखा पर तिरंगा लहराया
ही नहीं. जब आशुतोष और सौरव ने तिरंगा लहराया तो आपको दिक्कत होनी ही थी."
अभिजीत दीपके ने कहा, "यह देश गांधी के विचार और बाबा साहब के
संविधान पर चलेगा."
दीपके ने 16 अक्तूबर शुक्रवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लोगों से इकट्ठा होने का आह्वान किया है. यह आह्वान जंतर-मंतर को धरना प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने और सीजेपी नेताओं को गिरफ़्तार किए जाने के ख़िलाफ़ किया है.
सीजेपी ने पिछले महीने के अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग रखी थी और 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसके बाद धरना प्रदर्शन की शुरुआत हुई.
एसीपी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार की गिरफ़्तारी पर रोक
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इमेज कैप्शन, यौन हमले का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार पर दिल्ली पुलिस के एसीपी ने एससी/एसटी एक्ट के तहत एफ़आईआर दर्ज कराई थी
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को गिरफ़्तारी से राहत दी है.
दरअसल, एसीपी ने उस महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था.
लाइव लॉ के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाली महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोपों की जांच की मांग करने वाले पत्रकार संगठनों की याचिकाओं पर यह आदेश दिया.
कोर्ट ने कहा कि महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ कोई 'दंडात्मक कार्रवाई' नहीं की जाएगी.
महिला पत्रकार पर दायर एफ़आईआर में कहा गया है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी ड्यूटी निभा रहे एसीपी भगत को अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और जातिसूचक गालियां दीं.
एफ़आईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221 (लोक सेवक के काम में बाधा डालना), धारा 356(2) (मानहानि) और धारा 3(5) (सामूहिक दायित्व) के साथ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान भी शामिल हैं.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाली महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक अलग समिति गठित करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि इस समिति में एक सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को शामिल किया जाए.
तीन अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी पर महिला पत्रकार पर यौन हमले का आरोप लगा था.
इसके बाद से अधिकारी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की मांग को लेकर थाने के बाहर धरना प्रदर्शन हुआ.
राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और ज्ञानेश कुमार को जारी किया नोटिस
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इमेज कैप्शन, याचिकाकर्ताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई अन्य नेता भी शामिल हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया.
एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने नोटिस जारी किया है.
बार एंड बेंच के अनुसार, ये याचिकाएं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने दाख़िल की हैं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाब मांगा.
साथ ही, अदालत ने इन याचिकाओं को विभिन्न राज्यों में एसआईआर की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया.
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि याचिकाओं पर नोटिस जारी किया जा रहा है और इन्हें पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाएगा.
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि निर्वाचन आयोग की ओर से कोई नोटिस स्वीकार करे, अन्यथा आयोग को नोटिस की तामील कराई जाए.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के आचरण पर भी सवाल उठाया. हालांकि, पीठ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस याचिकाकर्ता की बात कर रही है.
अदालत ने कहा, "अगली सुनवाई पर संबंधित याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा."
पीठ ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत किसी निष्कर्ष पर पहुंच गई है या किसी की निंदा कर रही है.
पीठ ने कहा कि संबंधित याचिकाकर्ता के मामले में नोटिस को फ़िलहाल अस्थायी आधार पर स्वीकार किया जाएगा और यह उसके आचरण के स्पष्टीकरण पर निर्भर करेगा.
इस मामले में याचिका दायर करने वाले अन्य नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत शामिल हैं.