लेबनान के राष्ट्रपति ने युद्धविराम की कोशिशों के लिए ट्रंप को शुक्रिया कहा
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इमेज कैप्शन, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने सीज़फ़ायर के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया (फ़ाइल फोटो)
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के कार्यालय ने पुष्टि की है कि आज उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत हुई.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है कि औन ने लेबनान में युद्धविराम कराने और "स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने" की कोशिशों के लिए ट्रंप को शुक्रिया कहा.
पोस्ट के अनुसार, औन ने कहा कि वह इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जल्द से जल्द युद्धविराम चाहते हैं.
इसमें यह भी कहा गया है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने राष्ट्रपति औन और लेबनान के प्रति अपना समर्थन जताया.
इसराइल और लेबनान के बीच नहीं हो रही बातचीत, कैरिन टॉर्बे, बीबीसी अरबी संवाददाता
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इमेज कैप्शन, लेबनान के राष्ट्रपति, इसराइल के साथ बातचीत के पक्षधर हैं
आज पहले, लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इसराइल के साथ होने वाले किसी भी संपर्क की जानकारी नहीं है.
यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू आज बातचीत कर रहे हैं. बाद में एक इसराइली कैबिनेट मंत्री ने भी इस दावे को दोहराया.
अब, आधिकारिक लेबनानी सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि फिलहाल दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं होगी.
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति औन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को सूचित किया है कि वह कॉल नहीं लेंगे.
राष्ट्रपति कार्यालय ने ट्रंप के नाराज़ होने के डर से इस बात को आधिकारिक बयान में शामिल करने से परहेज किया है.
इसराइली की सैन्य कार्रवाई जारी रहने के बीच नेतन्याहू से बातचीत करना, राष्ट्रपति औन के लिए हिज़्बुल्लाह और लेबनानी समाज के एक बड़े हिस्से के साथ उनके संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है.
लेबनान के राष्ट्रपति, इसराइल के साथ बातचीत के पक्षधर हैं, लेकिन उनका कहना है कि इसके लिए युद्धविराम बेहद ज़रूरी है.
वहीं, इसराइल ने अब तक अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने से इनकार किया है.
इसराइली रक्षा मंत्री ने ईरान को 'और भी भीषण' हमलों की धमकी दी
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इमेज कैप्शन, इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ (फ़ाइल फोटो)
इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ बातचीत में किसी समझौते पर नहीं पहुंचता है तो उनका देश ईरान के विरुद्ध "और भी भीषण" हमले करेगा.
इसराइल काट्ज़ ने कहा, "ईरान एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है. यह उनके लिए चुनाव का क्षण है. उन्हें भविष्य की ओर एक पुल बनाने और विनाश की खाई में गिरने के बीच चुनाव करना है."
उनका कहना है कि अगर ईरान बाद वाला विकल्प चुनता है, तो उसे "बहुत जल्दी पता चल जाएगा" कि जिन लक्ष्यों पर इसराइल ने अभी तक हमला नहीं किया है, वे "उन लक्ष्यों से भी कहीं अधिक कष्टदायक हैं जिन पर हम पहले ही हमला कर चुके हैं."
उन्होंने कहा, "विकल्प उनके हाथ में है और परिणाम भी उन्हें ही भुगतने होंगे."
इसराइल के लेबनान पर ताज़ा हमले में दक्षिणी लेबनान का आख़िरी पुल भी टूटा
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इसराइल ने लेबनान पर ताज़ा हमले किए हैं.
नबतियेह शहर में हमले के बाद धुआँ उठता हुआ देखा गया, इस शहर की आबादी करीब 40 हज़ार है और यह लितानी नदी के ठीक उत्तर में स्थित है.
तटीय इलाके के पास क़ासमियेह में लोग हमले के बाद हुए नुकसान का जायज़ा ले रहे हैं. एक वरिष्ठ लेबनानी सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, इस हमले में दक्षिणी लेबनान को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला आख़िरी पुल भी टूट गया.
ये इसराइल द्वारा लेबनान में किए गए हमलों की ताज़ा तस्वीरें हैं.
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प्रियंका गांधी ने संसद में कहा- 'बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं झट से पहचान लेती हैं'
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आज लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर चर्चा हो रही है.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने लोकसभा में कहा, "आज प्रधानमंत्री के भाषण से लगा कि भाजपा ही महिला आरक्षण की चैंपियन, प्रस्तावक और सबसे बड़ी समर्थक रही है. जबकि ये कह रहे थे कि इनको इसका श्रेय नहीं चाहिए."
उन्होंने कहा कि, "कोई भी महिला आपको बता देगी कि बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं झट से पहचान लेती हैं."
उन्होंने कहा कि, "इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि महिला आरक्षण के पक्ष में डट कर खड़ी है. लेकिन अध्यक्ष महोदय सच्चाई ये है कि आज की चर्चा दरअसल महिला आरक्षण पर है ही नहीं."
उन्होंने कहा कि इस बिल में राजनीति की बू घुली हुई है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले- ज़रूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना तैयार, राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश का इंतज़ार
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इमेज कैप्शन, हेगसेथ ने कहा कि, “ईरान खोई हुई सैन्य क्षमता की भरपाई नहीं कर सकता और हम आप पर नज़र रखे रहे हैं.”
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में मीडिया को संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरानी शासन से "समझदारी से चुनाव करने" का आग्रह किया है, और यह भी कहा है कि अगर शासन "ग़लत" फैसला करता है और किसी समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका के पास युद्ध अभियान फिर से शुरू करने के लिए पर्याप्त सेना है.
हेगसेथ ने कहा कि, “ईरान खोई हुई सैन्य क्षमता की भरपाई नहीं कर सकता और हम आप पर नज़र रख रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि, "अमेरिका और ईरान की क्षमताएं एक जैसी नहीं हैं, और यह बराबरी की लड़ाई नहीं है. हम और मज़बूत होते जा रहे हैं. आप अपने बचे हुए लॉन्चर और मिसाइलों को निकाल रहे हैं, जिन्हें आप बदल नहीं सकते.”
उन्होंने कहा कि, “अमेरिकी सेना पहले से कहीं ज़्यादा ताकत के साथ फिर से तैयार हो रही है. हम अपने राष्ट्रपति के आदेश पर और एक बटन दबाते ही कार्रवाई के लिए तैयार हैं.”
कार्टून: बैलेंस भी ज़रूरी है
इमेज कैप्शन, महिला आर्कषण बिल पर गिरिराज सिंह के बयान पर आज का कार्टून.
लोकसभा में पीएम मोदी के संबोधन के बाद कांग्रेस ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता जयराम रमेश (फ़ाइल फोटो)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन पर तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित किया.
इसके बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री के संबोधन पर प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने लिखा, "असामान्य रूप से, प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में केवल 40 मिनट का भाषण दिया. सामान्य रूप से उन्होंने उन सभी मुद्दों पर बात की, सिवाय उस मुख्य मुद्दे के जो संसद के विशेष सत्र में वास्तव में दांव पर है, और वो है परिसीमन. उन्होंने इस पर उठाई गई एक भी चिंता का जवाब नहीं दिया."
उन्होंने आगे लिखा, "प्रधानमंत्री ने बार-बार दो दलीय सहयोग (बाइपार्टीजनशिप) और इन विधेयकों के सर्वसम्मति से पारित होने की अपील की.दुर्भाग्य से, उनकी सरकार ने दो दलीय विश्वास को प्रेरित करने के बजाय इसके विपरीत ही किया है. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि सरकार ने इस मुद्दे पर हर दल से बातचीत की है."
उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि उन्होंने विपक्ष के नेता द्वारा 29 अप्रैल को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की बार-बार की गई मांग को खारिज कर दिया है."
जयराम रमेश ने कहा, "सरकार ने न तो औपचारिक रूप से और न ही अनौपचारिक रूप से किसी भी राज्य सरकार से परामर्श किया है, जबकि वह लोकसभा और विधानसभाओं दोनों स्तरों पर परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है. सरकार ने कानून में लिखित रूप से यह बताने से भी इनकार किया है कि परिसीमन कैसे किया जाएगा, और इसके बजाय ऐसे विधेयक पेश किए हैं जो लोकसभा की संरचना को बड़े पैमाने पर बदलने का खतरा पैदा करते हैं."
हिज़्बुल्लाह ने दागे रॉकेट, इसराइल ने दक्षिणी लेबनान पर हमलों की चेतावनी जारी की
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इमेज कैप्शन, यह तस्वीर बुधवार की है जब इसराइली एयर डिफ़ेंस ने हमलों को रोका था
इसराइल ने चेतावनी दी है कि वह दक्षिणी लेबनान पर हमले कर रहा है.
इसराइल डिफ़ेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) के अरबी भाषा के प्रवक्ता,अविचाई अद्राई ने दक्षिणी लेबनान में रहने वाले लोगों के लिए एक "बहुत ही अहम चेतावनी" जारी की है, क्योंकि वहाँ हवाई हमले जारी हैं.
अद्राई का कहना है कि हिज़्बुल्लाह इसराइली सेना को इस इलाके में कार्रवाई करने के लिए "मजबूर" कर रहा है और आईडीएफ़ का "आम लोगों को नुक़सान पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है."
उन्होंने कहा, "हम अपनी बात दोहराते हैं और आपसे आग्रह करते हैं कि आप तुरंत अपने घर खाली कर दें और ज़हरानी नदी के उत्तर की ओर चले जाएँ. जो कोई भी हिज़्बुल्लाह के लोगों, उनके ठिकानों या हथियारों के पास मौजूद होगा, वह अपनी जान को ख़तरे में डालेगा."
वहीं ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने गुरुवार सुबह इसराइल पर कई रॉकेट हमले किए हैं.
टेलीग्राम पर एक पोस्ट में हिज़्बुल्लाह ने लेबनान बॉर्डर के पास इसराइली इलाक़े में हमले का दावा किया.
इसमें कहा गया है कि जब तक अमेरिका और इसराइल लेबनान और यहां के लोगों पर हमला जारी रखेंगे, तब तक हिज़्बुल्लाह की प्रतिक्रिया जारी रहेगी.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के रिफ़्यूजी चीफ़ ने लेबनान में दस लाख लोगों के विस्थापित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘फौरन मदद’ की अपील की है.
यूएन रिफ़्यूजी एजेंसी के प्रमुख बरहम सालेह ने कहा है कि लेबनान के लोगों को फ़ौरन राहत और मदद की ज़रूरत है.
सालेह ने कहा है कि संघर्ष की वजह से लेबनान के बीस फ़ीसदी लोग विस्थापित हुए हैं और यह ‘’अभूतपूर्व’’ है.
महिला आरक्षण पर पीएम मोदी बोले- ये उनका हक है और हमने कई दशकों से रोका हुआ है
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण और परिसीमन पर तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने परिसीमन पर कहा कि "मैं आज ज़िम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी. किसी के साथ अन्याय नहीं होगा."
"पहले जो परिसीमन हुआ है और जो अनुपात पहले से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उसी के अनुसार परिसीमन होगा."
"अगर गारंटी चाहिए, तो मैं गारंटी भी देता हूं."
उन्होंने महिला आरक्षण पर कहा कि "हम भ्रम में न रहें कि हम कुछ नारी शक्ति को दे रहे हैं, ये उनका हक है. और हमने कई दशकों से रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित कर हमें उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है."
देश की 50 फ़ीसदी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल होना चाहिए: पीएम मोदी
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पीएम मोदी महिला आरक्षण और परिसीमन पर तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं.
इस दौरान उन्होंने कहा कि जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि अब देश की बहनों पर भरोसा करें, 33 फ़ीसदी महिलाओं को यहां आने दें और उन्हें निर्णय करने दें.
महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि देश की 50 फ़ीसदी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मुझे सबको साथ लेकर चलना है और मुझे संविधान ने यही सिखाया है.”
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, 'बच्चों को सोशल मीडिया के बुरे असर से बचाने के लिए सबकुछ करूंगा'
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इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर चिंता ज़ाहिर की है (फ़ाइल फ़ोटो)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने गुरुवार को एक्स, मेटा, स्नैप, यूट्यूब, और टिकटॉक जैसे प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म्स से अपील की है कि वे बच्चों पर होने वाले सोशल मीडिया के असर के ख़िलाफ़ आगे आएं.
ब्रिटिश पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मुझे पता है कि माता-पिता सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा पर इसके असर को लेकर चिंतित हैं. वे सही हैं और इस मामले में जल्द कार्रवाई की उम्मीद करते हैं.”
किएर स्टार्मर ने कहा, “बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए जो कुछ भी ज़रूरी होगा, मैं वह सब करूँगा.”
ऑस्ट्रेलिया पहला देश है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ज़्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.
हाल ही में फ्रांसीसी संसद में 15 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच पर रोक लगाने के लिए पहल की गई.
भारत में भी कम से कम दो दक्षिणी राज्यों के मंत्रियों ने हाल में कहा है कि वे यह जांच कर रहे हैं कि क्या ऐसी पाबंदी बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने में कारगर होगी.
भारत में इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में सिफ़ारिश की गई है कि केंद्र सरकार को बच्चों की उम्र के आधार पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल की सीमाएं तय करने पर विचार करना चाहिए.
आईपीएल 2026: सीएसके के खलील अहमद हुए बाहर, जानिए वजह
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इमेज कैप्शन, खलील अहमद बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल 2026 में एक बड़ा झटका लगा है. सीएसके के खिलाड़ी खलील अहमद चोट के कारण इंडियन प्रीमियर लीग से बाहर हो गए हैं.
चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.
सीएसके ने लिखा, “केकेआर के ख़िलाफ़ मैच में दाहिने क्वाड्रिसेप में चोट लगने के कारण ख़लील अहमद आईपीएल 2026 से बाहर हो गए हैं. हम ख़लील के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं.”
ख़लील अहमद बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं. आईपीएल-2026 में वापसी की कोशिश में लगे सीएसके के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है.
ख़लील ने 14 अप्रैल को केकेआर के ख़िलाफ़ मैच के दौरान चोट की शिकायत की थी. सीएसके ने आईपीएल 2026 के अब तक के अपने पांच में से दो मैचों में जीत हासिल की है.
चीन ने ईरान से होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने का आग्रह किया
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इमेज कैप्शन, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट का खुलना हर किसी के हित में है (फ़ाइल फ़ोटो)
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से होर्मुज़ स्ट्रेट में सामान्य आवागमन बहाल करने की कोशिश का आग्रह किया है.
वांग ने कहा कि जहाँ एक ओर होर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान और बचाव किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर इस जलमार्ग से आवागमन की स्वतंत्रता और सुरक्षा की भी गारंटी दी जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग को खोलने में सभी देशों का हित है.
वांग ने आगे कहा कि चीन संघर्षविराम बनाए रखने और बातचीत फिर से शुरू करने का समर्थन करता है.
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहे हैं.
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, "चीन इस बात से बहुत खुश है कि मैं होर्मुज़ स्ट्रेट को हमेशा के लिए खोल रहा हूँ. मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूँ और दुनिया भर के लिए भी. ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी."
होर्मुज़ स्ट्रेट एक अहम समुद्री मार्ग है. यहां से आम दिनों में दुनिया भर में 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है. 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते की नाकेबंदी कर रखी है.
होर्मुज़ स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में तेल और गैस को लेकर संकट बढ़ा है और इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. माना जा रहा है कि ईरान युद्ध के बाद शुरू हुए इस संकट से आने वाले दिनों में ऊर्जा की सप्लाई पर और भी गंभीर असर देखा जा सकता है.
ट्रंप ने कहा, इसराइल और लेबनान के बीच क़रीब 34 साल बाद होगी बातचीत
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इमेज कैप्शन, 15 अप्रैल को भी दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले जारी रहे
इसराइल और लेबनान के बीच बातचीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राहत का अवसर बनाने की कोशिश बताया है.
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, ''इसराइल और लेबनान के बीच थोड़ी राहत की गुंजाइश बनाने की कोशिश की जा रही है. दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुए काफी लंबा समय हो गया है- क़रीब 34 साल. यह बातचीत कल होगी.''
हालाँकि लेबनान के एक अधिकारी ने बीबीसी से ट्रंप के दावों का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि लेबनान को कुछ नहीं पता है कि इसराइल से उसकी संभावित बातचीत कब होने वाली है.
इससे पहले 14 अप्रैल को लेबनान और इसराइल ने क़रीब 34 साल बाद अपनी पहली कूटनीतिक बातचीत की है. इसका मक़सद इसराइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह गुट के बीच चल रही लड़ाई को ख़त्म करना है.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस बातचीत की मध्यस्थता की. उन्होंने कहा था कि हिज़्बुल्लाह के प्रभाव को ख़त्म करने का यह एक "ऐतिहासिक मौक़ा" है.
अमेरिका ने बताया था कि दोनों पक्ष सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमत हो गए हैं, जिसका समय और जगह बाद में तय की जाएगी.
ट्रंप ने अपनी ताज़ा पोस्ट में इसी के बारे में जानकारी दी है.
इसराइल और लेबनान के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं है. उनके बीच आखिरी उच्च-स्तरीय प्रत्यक्ष बातचीत साल 1993 में हुई थी.
2 मार्च को लेबनान में इसराइली सेना के ऑपरेशन शुरू होने के बाद से अब तक दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. ये ऑपरेशन ईरान में अमेरिका और इसराइल के हमलों के शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद शुरू हुए थे.
ईरान ने कहा, 'कई देशों को अब अंतरराष्ट्रीय कानून याद आ रहा है'
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इमेज कैप्शन, 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. शुरुआती हमलों में ही देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई मारे गए थे (सांकेतिक तस्वीर)
ईरान ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका और इसराइल का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन था, यह जानते हुए भी कई देशों ने यह अपराध होने दिया.
जापान में ईरानी दूतावास ने कहा है, ''कुछ देशों ने अमेरिकियों को ईरान के ख़िलाफ़ आक्रामक जंग छेड़ने के लिए अपना इलाक़ा और हवाई क्षेत्र इस्तेमाल करने दिया. यह मानना मुश्किल है कि वे होने वाले हमलों से अनजान थे. वे जानते थे कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का घोर उल्लंघन है, फिर भी उन्होंने इसमें मदद की.''
ईरानी दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''निश्चित रूप से उस इलाक़े के देशों ने देखा कि कैसे अमेरिकी हथियार होर्मुज़ स्ट्रेट से होते हुए ईरान के ख़िलाफ़ जंग को भड़काने के लिए भेजे जा रहे थे. इस दौरान आवागमन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों की पूरी तरह अनदेखी की गई. फिर भी वे ख़ामोश रहे.''
दूतावास ने आगे लिखा, ''अब जब इसके बुरे नतीजे उन्हें ख़ुद भुगतने पड़ रहे हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की फिर से याद आ रही है. लेकिन अब भी वे पीड़ित के लिए न्याय नहीं मांग रहे, बल्कि अपने ख़ुद के हितों के बारे में सोच रहे हैं.''
यह 'भेदभाव' ही असल में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की नींव को कमज़ोर करता है, जहाँ सिद्धांतों को तभी लागू किया जाता है, जब वे अपने लिए ठीक हों.
गिरिराज सिंह ने कहा, 'महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं करने वालों को घर में भोजन नहीं मिलेगा'
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इमेज कैप्शन, गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि डीलिमिटेशन से किसी राज्य को नुक़सान नहीं होगा
डीलिमिटेशन और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष के विरोध पर प्रतिक्रिया दी है.
गिरिराज सिंह ने कहा, ''मुझे पूरा भरोसा है कि जब वो सदन के अंदर आएंगे, तो उनमें महिलाओं के प्रति संवेदना जगेगी. महिलाएं वर्षों से इसका इंतज़ार कर रही हैं,अब उनके सब्र की सीमा टूट रही है और उसे सब मिलकर पास करेंगे. जो इसे पास नहीं करेंगे, उसे घर में भोजन भी नहीं मिलेगा.''
गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि डीलिमिटेशन से किसी को नुक़सान नहीं होगा और किसी को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
मोदी सरकार ने गुरुवार को संसद में डीलिमिटेशन बिल पेश किया है. इसको लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है.
इस बिल में लोकसभा में सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. साथ ही लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का भी प्रस्ताव है.
हालांकि महिला आरक्षण का ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके लागू होने को भविष्य में होने वाली जनगणना और डीलिमिटेशन (परिसीमन प्रक्रिया) से जोड़ा गया था.
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि जो तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं और ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में दिखाया और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में डीलिमिटेशन का मुद्दा है.
केंद्र सरकार के तीन विधेयकों को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 'छल कपट से भरा' बताया है.
विपक्षी दलों का आरोप है कि डीलिमिटेशन ज़्यादा जनसंख्या वाले उन राज्यों को फायदा पहुंचाने वाली है, जहां फ़िलहाल बीजेपी मजबूत है.
केंद्र सरकार के तीन विधेयकों को कांग्रेस ने 'छल कपट से भरा' बताया
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ज़्यादा आबादी वाले राज्यों में अपने फ़ायदे के लिए डीलिमिटेशन का सहारा ले रही है (सांकेतिक तस्वीर)
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं और ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में दिखाया और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में डीलिमिटेशन का मुद्दा है.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ''डीलिमिटेशन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं. यह ज़्यादा जनसंख्या वाले कुछ राज्यों को फायदा पहुंचाने वाली है, जहां फ़िलहाल बीजेपी मजबूत है.''
उनका कहना है, "इससे लोकसभा में कई राज्यों की तुलनात्मक शक्ति वास्तव में कम हो जाएगी. असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी कितने ख़तरनाक तरीके से काम करती है.''
जयराम रमेश ने आरोप लगाया, ''इन विधेयकों का असली मक़सद और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बहुत व्यापक और नुक़सान पहुंचाने वाला है. इन्हें वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह ख़ारिज किया जाना चाहिए.''
उन्होंने इस पोस्ट में विपक्ष की मांगों का ज़िक्र किया है, जिनमें, ''लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, साथ ही अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाली महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए.''
''साल 2023 में भी विपक्ष का यही रुख़ था और आज भी यही है. यही असली सत्ता में भागीदारी है, जो कहीं अधिक लोकतांत्रिक है और संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों के मुताबिक़ है.''
ईरान युद्ध के बारे में अमेरिकी वित्त मंत्री के आरोपों पर चीन ने दिया ये जवाब
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध में चीन भरोसेमंद साझेदार साबित नहीं हुआ (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के आरोप पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी है.
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा गया कि ‘क्या ऐसी ( बेसेंट की) टिप्पणियों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित चीन यात्रा पर असर पड़ सकता है?’
इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, “चीन ने ईरान के मुद्दे पर अपना रुख़ बार-बार स्पष्ट किया है और दोनों पक्ष राष्ट्रपति ट्र्प की चीन यात्रा के बारे में लगातार बातचीत कर रहे हैं.”
इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ईरान युद्ध के दौरान चीन भरोसे के लायक साझेदार नहीं था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मध्य-पूर्व युद्ध के दौरान चीन एक अविश्वसनीय वैश्विक साझेदार साबित हुआ है.
उन्होंने कहा, ''उसने (चीन ने) तेल का भंडारण किया और कुछ वस्तुओं के निर्यात को सीमित कर दिया; यह ठीक वैसा ही है जैसा उसने कोविड-19 महामारी के दौरान चिकित्सा सामग्री के मामले में किया था.''
डीलिमिटेशन के ख़िलाफ़ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने फहराया काला झंडा
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इमेज कैप्शन, प्रस्तावित डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी में आग लगाते हुए एमके स्टालिन
डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने काला झंडा फहराकर डीलिमिटेशन के फ़ैसले का विरोध किया है. केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का विरोध करने के लिए उन्होंने अपने समर्थकों के साथ काले कपड़े भी पहन रखे थे.
इस दौरान उन्होंने प्रस्तावित डीलिमिटेशन विधेयक की कॉपी में आग लगाकर भी अपना विरोध जताया.
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है.
इससे पहले मंगलवार को सांसदों को तीन ड्राफ़्ट बिल (मसौदा विधेयक) भेजे गए हैं, उनमें दो बड़े ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित हैं- पहला, लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना और दूसरा, संसद के निचले सदन यानी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना.
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इमेज कैप्शन, स्टालिन के साथ ही उनके सहयोगियों ने भी काले कपड़े पहनकर अपना विरोध जताया
लोक सभा सीटों की संख्या 850 करने के मामले को दक्षिण भारत के कई राज्य भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. डीलिमिटेशन का सबसे मुखर विरोध करने वालों में डीएमके शामिल है.
डीएमके का आरोप है कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की केंद्र की राजनीति में ताक़त कम होगी.
विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, जहाँ बीजेपी तुलनात्मक तौर पर ज़्यादा ताक़तवर है और इससे उसके लिए केंद्र में सरकार बनाना आसान हो जाएगा.