लाइव, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान पर लगाए ये आरोप

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.

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रौनक भैड़ा

  1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान पर लगाए ये आरोप

    अनुपमा सिंह

    इमेज स्रोत, United Nations

    इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.

    अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हो रही हिंसा का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान पर कई आरोप लगाए.

    अनुपमा सिंह ने कहा, "जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अधूरा मुद्दा पाकिस्तान का भारतीय क्षेत्रों पर अवैध क़ब्ज़ा और उनका वापस आना है. पाकिस्तान का झूठा प्रचार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में हो रहे अत्याचारों की सच्चाई को नहीं छिपा सकता."

    उन्होंने आगे कहा, "रावलाकोट में जारी त्रासदी, सैकड़ों नागरिकों की हत्या और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर में हो रही हिंसक कार्रवाई उस व्यवस्था का नतीजा है जो जबरन क़ब्ज़े पर बनी है और दमन से चल रही है."

    अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि दशकों से इनकी सेना ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रही है.

    उन्होंने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का ज़िक्र करते हुए कहा, "जनसंख्या में ज़बरदस्ती बदलाव और लोगों को बुनियादी आज़ादियों से वंचित करने की वजह से हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब अगर कोई रोटी, बिजली, अपने अधिकार या इज़्ज़त की मांग करता है तो उसे गोलियों और हिंसा से दबा दिया जाता है."

    गौरतलब है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं. प्रतिबंधित संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग है कि यहां की विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था ख़त्म की जाए.

    इन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं जो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में नहीं बल्कि पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं.

  2. अमेरिका ने ईरान के साथ डील होते ही उसे दी ये छूट

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, सेंटकॉम ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर नाक़ाबंदी हटा ली है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाक़ाबंदी हटा ली गई है. दोनों देशों के बीच समझौते पर हुए हस्ताक्षर के ठीक बाद यह क़दम उठाया गया है.

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा है कि राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार नाक़ाबंदी ख़त्म कर दी गई है.

    सेंटकॉम ने एक्स पर लिखा, "आज अमेरिकी सेनाओं ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाक़ों में आने-जाने वाले सभी जहाज़ों पर लगी नाक़ाबंदी हटा दी है."

    सेंटकॉम ने आगे लिखा, "अमेरिकी सेनाएं अब ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाज़ों को नहीं रोक रही हैं. अमेरिकी नौसैनिक नाक़ाबंदी लागू करने की सभी कोशिशें बंद कर दी गई हैं. हमारे बड़े नौसैनिक जहाज़ सामान्य क्षेत्र में रहेंगे ताकि समझौते के सभी पहलुओं का पालन सुनिश्चित हो सके."

    गौरतलब है कि बतौर मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने गुरुवार को ही कह दिया था कि यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू होगा.

    उन्होंने कहा था कि इसके पहले क़दम के तौर पर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट खोलेगा और अमेरिका नौसैनिक नाक़ाबंदी हटाएगा.

  3. ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई पहली बार अमेरिका के साथ डील पर ये बोले

    मोजतबा ख़ामेनेई

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    इमेज कैप्शन, यह पहली बार है जब मोजतबा ख़ामेनेई ने इस समझौते पर प्रतिक्रिया दी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते पर उनकी अलग राय थी, लेकिन फिर भी उन्होंने इस पर दस्तख़त करने की इजाज़त दे दी.

    ईरानी मीडिया ने गुरुवार शाम को मोजतबा ख़ामेनेई का बयान प्रकाशित किया.

    मोजतबा ख़ामेनेई ने अपने लिखित संदेश में कहा, "इस समझौते पर मेरी राय अलग थी. लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने मुझे भरोसा दिलाया कि वो ईरानी जनता और विरोधी ताक़तों के ख़िलाफ़ खड़े लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे. उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी भी ली. इसी वजह से मैंने मंज़ूरी दी."

    ख़ामेनेई ने कहा कि पेज़ेश्कियान ने उन्हें बताया कि अगर अमेरिकी पक्ष ज़्यादा मांग करेगा तो वे उसे नहीं मानेंगे.

    ख़ामेनेई ने संदेश में लिखा, "अब से हम सब, मैं और हमारा गर्वित देश, बताए गए शर्तों के पूरे होने का इंतज़ार करेंगे."

    इस संदेश में ख़ामेनेई ने सीधे तौर पर ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत की अनुमति भी दी है.

    यह पहली बार है जब मोजतबा ख़ामेनेई ने इस समझौते पर प्रतिक्रिया दी है. मार्च में सुप्रीम लीडर का पद संभालने के बाद से वो जनता के सामने नहीं आए हैं.

    उनके पिता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की 28 फ़रवरी को अमेरिका-इसराइल के हमले में मौत हो गई थी.

  4. नमस्कार!

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